नीतीश कुमार और सरयू राय की मुलाकात से सियासी हलचल हुई तेज

 क्या रघुवर दास की झारखंड की राजनीति में होगी वापसी?

दीपक कुमार तिवारी

पटना/रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दल जहां अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। वहीं विभिन्न पार्टियों के नेता भी चुनाव मैदान में उतरने के पहले राजनीतिक समीकरण को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। जमशेदपुर पूर्वी के निर्दलीय विधायक सरयू राय ने अपने बचपन के दोस्त और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरयू राय आगामी विधानसभा चुनाव में भी जमशेदपुर पूर्वी सीट से ही चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं।

ऐसे में नीतीश कुमार से सरयू राय की मुलाकात के बाद कई तरह की चर्चा शुरू हो गई है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में सरयू राय को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार का साथ मिल सकता है। सरयू राय ने वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया।

सरयू राय ने 2014 के चुनाव में जमशेदपुर पश्चिम सीट से जीत हासिल की थी और 2019 में भी चुनाव लड़ने को इच्छुक थे, लेकिन बीजेपी ने सरयू राय को टिकट देने से इनकार कर दिया। जिसके बाद सरयू राय निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर गए। चुनाव में सरयू राय की जीत हुई और रघुवर दास को करारी हार का सामना करना पड़ा।

जिसके बाद कुछ महीने बाद रघुवर दास को ओडिशा का राज्यपाल बना दिया गया। इसके साथ ही रघुवर दास झारखंड की राजनीति से दूर हो गए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार निर्दलीय विधायक और पूर्व मंत्री सरयू राय बिहार के सीएम नीतीश कुमार का समर्थन हासिल कर एक तीर से दो निशाना साधने की कोशिश में हैं। सरयू राय यह चाहते हैं वो जमशेदपुर पूर्वी सीट से एनडीए उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरें। इसे लेकर नीतीश कुमार बीजेपी के शीर्ष नेताओं से बातचीत कर सकते हैं और जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट गठबंधन के तहत जेडीयू के लिए छोड़ने की बात कह सकते हैं।

ऐसी स्थिति में सरयू राय एनडीए उम्मीदवार हो जाएंगे, तो क्षेत्र के बीजेपी नेताओं-कार्यकर्ताओं का समर्थन उन्हें मिल पाएगा। वहीं दूसरा फायदा उन्हें यह मिलेगा कि सरयू राय यदि जमशेदपुर सीट से एनडीए उम्मीदवार बन जाते हैं, तो रघुवर दास की झारखंड की राजनीति में वापसी की संभावना कम हो जाएगी, क्योंकि रघुवर दास भी जमशेदपुर पूर्वी सीट से ही चुनाव मैदान में उतरकर विजयी होते रहे हैं। हालांकि रघुवर दास भी संवैधानिक पद पर जाने के पहले झारखंड बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे हैं।

ऐसे में यदि जमशेदपुर पूर्वी की सीट पर सरयू राय को मिल जाती है, तो रघुवर दास जमशेदपुर पश्चिमी सीट से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। लेकिन इससे पहले बीजेपी नेतृत्व और रघुवर दास को ये तय करना है कि वो अभी झारखंड की सक्रिय राजनीति में वापस लौटेंगे या नहीं।

नीतीश कुमार और सरयू राय को करीब से जानने वाले लोगों का कहना है कि दोनों पटना साइंस कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल में एक रूम शेयर करते थे। दोनों के बीच गहरी मित्रता थी और छात्र राजनीति में दोनों ने एक साथ कदम रखा। बिहार से अलग झारखंड राज्य गठन के बाद सरयू राय रांची आ गए, लेकिन इसके बावजूद समय-समय पर दोनों नेताओं के बीच मुलाकात का सिलसिला बना रहा। सोमवार 24 जून को एक बार फिर सरयू राय और नीतीश कुमार की मुलाकात हुई।

इस मुलाकात में दोनों के बीच क्या बात हुई, इसका खुलासा तो आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले समय में इस मुलाकात का असर देखने को मिल सकता है।ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास का कार्यकाल अभी बचा है, लेकिन इससे पहले झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 को लेकर उनके राज्य की राजनीति में वापस लौटने की चर्चा शुरू हो गई है। रघुवर दास के कई समर्थक उनकी वापसी की तिथि से लेकर राज्य की राजनीति में सक्रिय होने के दिन और समय को लेकर कई दावे कर रहे है।

रघुवर दास भी ओडिशा का राज्यपाल रहने के बावजूद समय-समय पर जमशेदपुर स्थित अपने पैतृक आवास आते रहे हैं। ऐसे में उनके सक्रिय राजनीति में वापस लौटने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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