वेनेजुएला के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए राजनीतिक दलों ने सुरजीत भवन में किया जनसभा का आयोजन

नई दिल्ली। वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप बंद करने व राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा और अमेरिकी आक्रमाता के खिलाफ सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआईएमएल, एआईएफवी, आरएसपी, एसपी, आरजेडी, एएपी, डीएमके, वीसीके ने आज सुरजीत भवन नई दिल्ली पर जनसभा का आयोजन किया।

जनसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि हम, भारत की राजनीतिक पार्टियाँ, जो देश की जनता का प्रतिनिधित्व करती हैं, वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ अमेरिका की आक्रामक कार्रवाई तथा उसके निर्वाचित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और प्रथम महिला सिलिया फ़्लोरेस के अपहरण की घटना की कड़ी निंदा करती हैं।
हम क्यूबा, मेक्सिको, कोलंबिया, ईरान और ग्रीनलैंड के विरुद्ध अमेरिका की दी जा रही धमकियों की भी कड़ी निंदा करते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका की ये कार्रवाइयाँ संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन हैं, जिसमें राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान और संप्रभु देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की बात कही गई है।

अमेरिकी आक्रामकता का असली उद्देश्य वेनेज़ुएला के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर उसके तेल पर कब्ज़ा करना है। अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े ज्ञात तेल भंडारों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है, जो वेनेज़ुएला में स्थित हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही अमेरिकी तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ कई बैठकें कर चुके हैं और कथित तौर पर इस संसाधन-हथियाने की योजना बना रहे हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, 2025 में यह साफ़ कहा गया है कि वह मोनरो सिद्धांत के ट्रम्प कोरोलरी को लागू करना चाहता है। इसका उद्देश्य पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित करना है। अमेरिका ने खुले तौर पर कहा है कि वह लैटिन अमेरिकी देशों को क्षेत्र के बाहर के देशों के साथ व्यापार नहीं करने देगा। यह आज के दौर की खुली दादागिरी और ज़ोर-ज़बरदस्ती है। हम लैटिन अमेरिका के संप्रभु देशों के अधिकारों के इस गंभीर उल्लंघन की कड़ी निंदा करते हैं।
हम वेनेज़ुएला की जनता के साथ मज़बूती से खड़े हैं। वे अमेरिकी आक्रमण के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं। वे अपने निर्वाचित राष्ट्रपति और प्रथम महिला की रिहाई की माँग कर रहे हैं।
हम क्यूबा की जनता के साथ पूरी एकजुटता जताते हैं। क्यूबा पर अमेरिका ने लंबे समय से अमानवीय आर्थिक नाकेबंदी लगा रखी है। अब उसे सीधे सैन्य हमले की धमकी भी दी जा रही है।
हम फ़िलिस्तीन की जनता के साथ भी खड़े हैं। हम उन सभी देशों की जनता के साथ एकजुट हैं, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों, जिनमें इज़राइल शामिल है, की आक्रामक नीतियों का विरोध कर रहे हैं।
भारत की जनता अपनी आज़ादी और संप्रभुता को बहुत महत्व देती है। वह चाहती है कि हर देश की जनता को भी यही अधिकार मिले। पहले भारत की विदेश नीति इसी सोच पर आधारित थी। लेकिन वर्तमान भाजपा-नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की विदेश नीति इस परंपरा से हट गई है। यह सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक गई है। वह ग्लोबल साउथ के देशों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने को तैयार नहीं है।
हम मांग करते हैं कि सरकार इस आत्मसमर्पण वाली विदेश नीति को बदले। भारत को अपनी स्वतंत्र और स्वायत्त विदेश नीति को मज़बूती से अपनाना चाहिए। हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि वह वेनेज़ुएला, क्यूबा और फ़िलिस्तीन की जनता के साथ खुलकर एकजुटता जताए और अमेरिकी आक्रमण की निंदा करे।
हम अपने देश की जनता से भी अपील करते हैं कि वे वेनेज़ुएला के साथ एकजुटता दिखाएँ। अमेरिकी आक्रमण का खुलकर विरोध करें। आक्रामक और दबंग ताक़तें दुनिया की शांति के लिए ख़तरा हैं। वे सभी देशों और लोगों के लिए खतरा पैदा करती हैं। ऐसे आक्रमणों का विरोध करना और संप्रभुता की रक्षा करना हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
जनसभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के हजारों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। नोएडा से सीपीआई(एम) नेता रामसागर, गंगेश्वर दत्त शर्मा, रामकिशन, टीकम सिंह, अरुण कुमार, रेखा चौहान, गुड़िया देवी, पिंकी, सरोज आदि के नेतृत्व में दर्जनों माकपा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सभा को माकपा के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड एम ए बेबी व कामरेड प्रकाश करात सहित कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने संबोधित किया।

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