Political History : एक नेता जिसने हमेशा सत्ता ठुकराई तथा सिद्धांत के लिए लड़ाई मोल ली

प्रोफेसर राजकुमार जैन

हिंदुस्तान की सियासत में ऐसी बहुत ही कम मिसालें हैं जहां नेता ने सत्ता को नहीं उसूल को चुना हो। मधु लिमए ने बरतानिया हुकूमत से हिंदुस्तान को तथा पुर्तगाली जारशाही खूंखार निजाम से गोवा की आजादी के लिए लड़कपन से लड़ते हुए अनेकों यातनाएं तो सही ही थी। आजादी के बाद भी हिंदुस्तान की संसद में और सड़क पर समाजवाद के सिद्धांत, समता, संपन्नता,और स्वतंत्रता का परचम लहराने के लिए ताउम्र जद्दोजहद की।


उद्भट विद्वान,  चिंतक, डॉ. राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण की आंखों के तारे मधु लिमए के इतिहास को जाने बिना जनता पार्टी के निर्माण और विघटन तथा खासतौर से राज नारायण जी की भूमिका से वाकिफ नहीं हुआ जा सकता। डॉक्टर लोहिया रामनारायण -मधुलिमए अलग-अलग नाम होने के बावजूद एक तंजीम का मुकम्मल नाम है।  आपातकाल समाप्ति की घोषणा के बाद हिसार जेल (हरियाणा) से 19 महीने का बंदी जीवन गुजारने वाले राजनारायण तथा नरसिंहगढ़ जेल (मध्य प्रदेश)के सींकचौ से आजाद होने वाले मधु लिमए का हजारों  सोशलिस्ट कार्यकर्ता, खुद जेलों से रिहा होकर बेकरारी से इंतजार कर रहे थे।
दिल्ली में प्रमुख रूप से कांग्रेस(ओ) मोरारजी देसाई, भारतीय जनसंघ, सोशलिस्ट पार्टी, तथा भारतीय लोक दल, तथा बाद में सीएफडी  (बाबू जगजीवन राम) पार्टियों ने मिलकर जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ कर संसद में बहुमत प्राप्त कर लिया।


आपसी सहमति से मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री चुन लिया गया तथा साथ ही यह भी तय किया गया कि हर घटक से 3 सदस्य तथा चंद्रशेखर जी को पहले मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी।
जनता पार्टी के विभिन्न घटकों के नेता सरकार और विपक्ष में रहते हुए मधु लिमए के 1964,1967,1973,1977 में चार बार लोकसभा के सदस्य चुने जाने पर उनकी संसदीय दक्षता,धार, ज्ञान,प्रतिभा, सादगी से बखूबी वाकिफ थे। संसद में मधु लिमए ने मोरारजी भाई  की कई बार बखिया उधेड़ी थी।परंतु मोरारजी भाई देसाई, बाबू जगजीवन राम, अटल बिहारी वाजपेई चाहते थे कि मधु लिमए  केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो। मधु लिमए ने विनम्रता के साथ इसे अस्वीकार कर दिया, यही रास्ता जनसंघ के नानाजी देशमुख ने भी अपनाया उनका नाम भी मंत्रिमंडल की पहली सूची में शामिल था उन्होंने भी इनकार कर दिया।

चंद्रशेखर जी ने पार्टी से अनुरोध किया कि उनके स्थान पर उनके पुराने साथी मोहन धारिया को मंत्री बना दिया जाए। जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर चंद्रशेखर जी को चुन लिया गया। उन्हीं के साथ पार्टी के महामंत्री के रूप में मधु लिमए (सोशलिस्ट) नानाजी देशमुख (जनसंघ) रवि राय (भारतीय लोक दल)बना दिए गए। जनता पार्टी के इतिहास में मधु लिमए की सर्वाधिक रचनात्मक भूमिका रही है,परंतु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  जनसंघ की दोहरी सदस्यता के सैद्धांतिक सवाल को उठाकर उन्होंने जहां एक और ऐतिहासिक भूमिका निभाई वही विपक्षी खेमे के साथ-साथ अपनों ने भी मंत्री पद गवाने की  तड़फ पर भयानक कुप्रचार,आरोप, मधु लिमए पर पार्टी तोड़क यहां तक की रूस के  इशारे पर काम करने के आरोप लगाए। जिस समय चौधरी चरण सिंह रामनारायण जी को केंद्रीय मंत्रिमंडल से निकाला गया उस समय मधु लिमए विदेशी दौरे पर अमेरिका में थे।दिल्ली से हड़बड़ाहट में केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम कौशिक, पार्टी महासचिव रविराय तथा अन्य लोगों ने अमेरिका में संपर्क साध कर तत्काल हिंदुस्तान आने का अनुरोध किया।


5 जुलाई को मधुलिमये अमेरिका दौरा बीच में छोड़कर वापिस आ गए।मधुलिमये ने सबसे पहले बीजू पटनायक को टेलीफोन किया, फिर जार्ज फर्नाडीज़ को कहा कि संसदीय बोर्ड का निर्णय बहुत विनाशकारी होगा, फिर वे जार्ज फर्नांडीज़ को साथ लेकर बीजू पटनायक के पास गए। शुरू की ना नुकर के बाद बीजू पटनायक भी मधु लिमये के साथ सुलह के प्रयास में शामिल हो गए। तब मधु जी चौ. चरण सिंह के यहां गए । चौधरी साहब ने कहा कि किसी भी सम्मान पूर्वक समझौते को मान लूंगा। उसके बाद मधु लिमये ने अटल जी को टेलीफोन किया । अटल जी बहुत निराश थे, उन्होंने कहा अब क्या हो सकता है। मामला तो बहुत दूर तक चला गया। अंत में उन्होंने कहा कि वे अपने आप तो कोई पहल नहीं करेंगे, परंतु मैं भी चाहता हूं कि समझौता हो। आप अपना प्रयास जारी रखें। मैं आपके साथ हूं। फिर मधु जी ने चंद्रशेखर जी (अध्यक्ष) से बात की। चंद्रशेखर जी ने कहा कि कोई सम्मानजनक समझौता अगर तुम निकाल सकते हो तो मैं तुम्हारे साथ हूं। इसके बाद मोरारजी देसाई से मधु जी मिले। उन्होंने मोरारजी से पूछा कि क्या आपने अंतिम रूप से चौधरी साहब से अलग रहने का निर्णय कर लिया है। उन्होंने कहा कि नहीं, परंतु उन्होंने (चौ. चरण सिंह) उनके पुत्र कांति देसाई पर आरोप लगाए हैं तथा रैली करने का निर्णय ले लिया है।

मधु लिमये ने कहा कि अगर मैं चौ. चरण सिंह को रैली ना करने के लिए राजी कर लूं तो क्या हरियाणा में विश्वास मत आप टाल देंगे ? मोरारजी ने कहा नहीं, क्योंकि देवीलाल ने केंद्रीय नेताओं पर साजिश करने का आरोप लगाया है । उनको बिना किसी शर्त उसको वापिस लेना होगा । उस हालात में चण्डीगढ़ में विश्वास मत वाली बैठक को खत्म किया जा सकता है। मधु लिमये लिखते हैं कि मुझे कुछ सुकून मिला। मैंने तीन बिंदुओं पर केंद्रित किया- 1. चौ. चरण सिंह को प्रस्तावित रैली को खत्म करना होगा।  2. चौ. देवीलाल को केंद्रीय नेताओं पर लगाए आरोपों को वापिस लेना होगा। 3. केंद्रीय संसदीय बोर्ड को हरियाणा में विश्वासमत लेने के निर्णय को वापिस लेना होगा।  उसके बाद मधु जी ने चौ. साहब को रैली स्थगित करने के लिए मना लिया, फिर बीजू पटनायक के साथ मिलकर चौ. देवीलाल को रैली स्थगित तथा केंद्रीय नेताओं के विरुद्ध लगाए आरोप वापिस लेने को राजी कर लिया ।
मधु लिमये ने पहले अटल बिहारी वाजपेयी से बात की, फिर एल.के. आडवाणी, जार्ज फर्नांडीज़, बीजू पटनायक, कर्पूरी ठाकुर, रवि राय तथा एस. एन. मिश्रा को भी शामिल कर लिया। इस प्रकार 8 लोगों ने जिस तीन सूत्रीय फॉर्मूले पर मधु जी ने मोरारजी देसाई को राजी किया था, उस पर हस्ताक्षर करके समझौता प्रयास शुरू कर दिया ।

  • Related Posts

    विनाश की नींव पर खड़ी…
    • TN15TN15
    • March 12, 2026

    पेड़ के कटने का मतलब है, अपने पैरों…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    फिर भी ईरान ने अपने को भारत का दोस्त साबित किया!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    फिर भी ईरान ने अपने को भारत का दोस्त साबित किया!

    ना गैस, ना चूल्हा-इंडक्शन पर फूली-फूली, रुई जैसी नरम रोटी बनाएं!

    • By TN15
    • March 12, 2026
    ना गैस, ना चूल्हा-इंडक्शन पर फूली-फूली, रुई जैसी नरम रोटी बनाएं!

    नेपाल की स्थिरता के साथ परिवर्तन की खोज

    • By TN15
    • March 12, 2026
    नेपाल की स्थिरता के साथ परिवर्तन की खोज

    विनाश की नींव पर खड़ी…

    • By TN15
    • March 12, 2026
    विनाश की नींव पर खड़ी…

    THE WHITE MEN’S BURDEN

    • By TN15
    • March 12, 2026
    THE WHITE MEN’S BURDEN

    न बचेगी ट्रम्प शाही …

    • By TN15
    • March 11, 2026
    न बचेगी ट्रम्प शाही …