वंदना पांडेय
यूपी की योगी सरकार ने बताया कि कुंभ में 37 लोगों की मौत हुई है जबकि बीबीसी के एक जाबाज रिपोर्टर ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया की कुंभ में भगदड़ के दौरान 37 नहीं बल्कि 82 लोगों की मौत हुई थी।
उस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि करीब 26 मृतकों के परिवार को 5-5 लाख रूपए कैश दिए गए, जिनके नाम सरकार द्वारा जारी की गयी मृतकों की लिस्ट में शामिल नहीं थे।
BBC ने सबूत सहित ये दावा किया है कि 26 ऐसे परिवार हैं जिनका कोई अपना महाकुम्भ की भगदड़ में मर गया लेकिन योगी सरकार ने “ऑफिशियली” नहीं माना और बाद में उन परिवारों को 5–5 लाख रुपए के पैकेट योगी जी की तरफ़ से दिये गए और उनसे यह लिखवा लिया गया कि बीमारी या किन्हीं अन्य वजहों से उनके प्रियजनों की मौतें हुई है।
19 और परिवार तो ऐसे है की जिन्हें कुंभ में भगदड़ के दौरान अपने प्रियजनों को खोने के बाद सरकार की तरफ़ से केवल उनके प्रियजनों की लाश मिली थी।
बीबीसी के रिपोर्ट के खुलासे के बाद योगी सरकार के ऊपर कई गंभीर आरोप दिखाई दे रहे है 26 परिवारों को दिए गए कुल एक करोड़ 30 लाख कैश रुपए कहाँ से आए और किसके माध्यम से आए थे?
BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रयागराज महाकुंभ में मची भगदड़ में 82 लोगों की मौत हुई थी। जबकि योगी जी ने भव्य दिव्य कुंभ के नाम पर राजनीति चमकाने के लिए आकड़े को छिपाया था।
वैसे भी मोदी और योगी या कहे कि बीजेपी का मौतों के आकड़ो में हेरा फेरी करने और छिपाने की आदत पुरानी है। प्रयागराज में हुई भगदड़ में मौतों का आंकड़ा छिपाने से पहले बीजेपी वाले नोटबंदी के कारण हुई मौतों का, लॉक डाउन के कारण पैदल घर जाने में हुई प्रवासी मजदूरों की मौतों का, कोरोना में आक्सीजन की कमी के कारण मौतों का छिपाने का भी आरोप लग चुका है।
योगी और बीजेपी द्वारा अपनी ब्रांडिंग के लिए डेढ़ सौ वर्ष के बाद का कुंभ प्रचारित करके अपनी इमेज बनायी और इमेज बनाने के लिए देश की जनता से इतना घिनौना कम किया कुंभ मेले को लेकर बीबीसी की रिपोर्ट आने के बाद यूपी सरकार को तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए और गृहमंत्री अमित शाह को इस्तीफा दे देना चाहिए।
योगी सरकार के इस घिनौने कृत्य के बाद भी विपक्ष के लोग कुछ ट्वीट करके अपना काम पूरा कर लिया किसी ने न तो इस्तीफ़ा मांगा और न ही सड़क पर उतर कर सभी परिवारों को इंसाफ दिलाने की बात कही।
आज का विपक्ष देख कर लोहिया जी का कथन “अगर सड़कें खामोश हो जाएँ तो संसद आवारा हो जाएगी” तो बिल्कुल सटीक लग रहा है विपक्ष ने सड़को को खामोश कर दिया है इसलिए आजकल की सरकारें आवारा या कहे की तानाशाह हो गई है।
अपनी ब्रांडिंग चहरे को चमकाने और पीएम बनने के सपने के लिए योगी आदित्यनाथ द्वारा किये गए इस घिनौने कृत्य के बाद आदित्यनाथ को योगी कहने और लिखने में शर्म आ रही है।
क्या सच में कोई योगी अपनी महत्वाकांक्षा में ऐसे कुकृत्य कर सकता है?
महाकुंभ के दौरान मृत्यु को प्राप्त पुण्यात्माओं के साथ योगी के द्वारा किए गये काले कारनामे को सबके सामने लाने वाले पत्रकार अभिनव अरोड़ा का साधुवाद।








