पवित्र रिश्ते पर दाग़ है सोनम जैसी लड़कियाँ

ऊषा शुक्ला

भगवान न करें किसी घर में सोनम जैसी लड़की पैदा हो । जिसने दो दो घर उजाड़ दिया है ,एक तो अपने माता पिता का घर बर्बाद कर दिया और फिर एक माँ से उसका बेटा छीन लिया ।भारत के मध्यवर्ग और उच्च मध्यवर्ग में लड़कियों को अब लड़कों के बराबर प्यार मिलने लगा है. कभी कभी तो लगता है कि लड़कियों को ज्यादा प्यार और सम्मान मिल रहा है. पर जब अधिकारों की बात आती है तो लड़कों को वरियता मिलने लगती है. तब समझ में आता है कि नहीं, अभी भी हम पुराने दौर में ही जी रहे हैं।बच्चे जब कोई गलती करते हैं तो इसका सारा दोष माता पिता को दिया जाता है । कोई भी माता पिता अपने बच्चे को ग़लत शिक्षा नहीं देते हैं । पर बच्चे TV के माध्यम से और आज कल 24 घंटे मोबाइल में लगे रहने के माध्यम से जानें क्या क्या सीखते जा रहे हैं । सोनम जैसी लड़कियाँ माता पिता के लिए एक अभिशाप है ,बहुत बड़ा सबक़ है । माता पिता ने तो बच्चे को नहीं कहा होगा कि हम शादी पे इतना पैसा ख़र्च करना है और तुम शादी के बाद अपने पति को मार देना । ये माता पिता ने समाज की ख़ातिर अपने बच्चे को एक रहीस और अच्छे घर में भेजा था कि उसे एक कबाड़ी वाला पसंद आया । क्या इसके पीछे की कहानी कुछ और है । अब ज़रूरत है बच्चों के पैरों में बेड़ियां बाँधने की। बच्चों की हर हरकत पर है माता पिता को नज़र रखनी चाहिए । जानती हूँ बच्चे सुनने वाले नहीं हैं , बच्चे आपसे लड़ेंगे , झगड़ा करेंगे ।बच्चों को गलत दिशा में जाने से बचाने के लिए, माता-पिता को बच्चों को सकारात्मक और सुरक्षित वातावराण प्रदान करना चाहिए, उन्हें उनकी रुचियों और प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, और उन्हें गलत संगत से बचाना चाहिए। इसके अलावा, बच्चों को उनकी शिक्षा और विकास के लिए प्रेरित करने के लिए, माता-पिता को उन्हें प्यार और समर्थन देना चाहिए, और उन्हें उनकी गलतियों से सीखने का मौका देना चाहिए। बच्चे अक्सर खतरनाक स्थितियों में फंस सकते हैं। यदि आप उन पर ध्यान रखते हैं, तो आप उन्हें खतरों से बचा सकते हैं।सोनम जैसी लड़कियां शुरुआत में संस्कारी, समझदार और आदर्श बहू का दिखावा करती हैं, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उनका असली चेहरा सामने आने लगता है. ऐसे में जरूरी है कि रिश्ता तय करने से पहले कुछ बेहद जरूरी बातों पर ध्यान दिया जाए, ताकि भविष्य में पछताना न पड़े। केवल लड़की की पढ़ाई और परिवार के बारे में जान लेना काफी नहीं है. यह नोटिस करना जरूरी है कि आप जिनके साथ एक नये रिश्ते में बंधने जा रहे हैं तो वह अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों और पुराने दोस्तों के साथ किस तरह का व्यवहार रखती है. अगर संभव हो, तो उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भी नजर डालें. जहां से आपको पार्टनर की सोच का पता चल सकेगा. साथ ही उसके बैकग्राउंड का भी पता चल सकता है।अक्सर रिश्ते देखने के लिए पहले से समय और तारीख तय होती है. ऐसे में कोई भी अपना इमेज अच्छा बनाने की कोशिश करेगा. लेकिन एक बार बिना बताए उसके इलाके में पहुंच जाए तो असल जिंदगी के बारे में काफी कुछ पता चल सकता है. इससे यह भी पता चलता है कि लड़की का व्यवहार कैसा है? कहीं वह कोई बनावटी करने की कोशिश तो नहीं कर रही है।कई बार कुछ लड़कियां शादी को एक ‘सोर्स ऑफ इनकम’ की तरह देखने लगती हैं. शादी के बाद वह अपनी शौक को पूरा करने के लिए जिद पर अड़ जाती है. बातचीत के दौरान पैसों को लेकर उनकी सोच का पता लगाने की कोशिश करें. इसलिए रिश्ते से पहले लड़की और उसके परिवार के पैसे को लेकर नजरिए को समझना बहुत जरूरी है।अगर लड़की कामकाजी है तो उसके साथ आगे की क्या प्लानिंग है उस पर जरूर चर्चा करें. वहीं, यदि वह करियर बनाने के स्टेज पर है तो यह जानने की कोशिश करें कि वह किस दिशा में अपना करियर बनाना चाहती है. इस बात की चर्चा करना बिल्कुल न भूलें कि वह परिवार और प्रोफेशन के बीच कैसे संतुलन बनाएगी।सिर्फ लड़की ही नहीं, उसके परिवार का स्वभाव और सोच भी शादी के बाद असर डालता है. इसलिए अगर घर में किसी भी सदस्य का स्वभाव आक्रामक, लालची या दिखावटी हो तो सतर्क रहें।हर रिश्ता सिर्फ बातचीत या पहली मुलाकात से तय नहीं होता है. इसलिए पार्टनर को देखने के बाद थोड़ा वक्त लें. उन्हें अच्छी से समझें और उसके स्वभाव को नोटिस करें. कई बार परिवार की जल्दबाजी और समाज का दबाव आपको गलत निर्णय की ओर धकेल सकता है।हर रिश्ते में पारदर्शिता जरूरी होता है. इसलिए शादी से पहले यह जरूर नोटिस करें कि आपका पार्टनर अपने पास्ट के बारे में बात करना चाह रहा है नहीं. अगर बात करता है तो वह कितना उसके बारे में बताता है. बातचीत में ही उनके किसी रिलेशन के बारे में ही जानने की कोशिश करें. ऊपर बतायी गयी सारी बातें जानना न सिर्फ लड़कों के लिए जरूरी है बल्कि लड़कियों के लिए उतना ही आवश्यक है।सोशल मीडिया पर इन दिनों सोनम रघुवंशी, निकिता सिंघानिया, मुस्कान रस्तोगी आदि नामों की चर्चा करके महिलाओं को विलेन बनाया जा रहा है. समाज की कुछ औरतों का उदाहरण देकर यह मान लिया जा रहा है कि आज की औरतें ऐसी ही होती जा रही हैं. इसके लिए तुलसीदास से लेकर गौतम बुद्ध तक के उपदेश सुनाए जा रहे हैं. एक धारणा बनाई जा रही है कि पत्नियों द्वारा पतियों की हत्या एक ट्रेंड बन रहा है. जाहिर है कि यह अतिशयोक्ति समाज में डर और अविश्वास को बढ़ा रही है. पर इसमें दोष लोगों का भी नहीं है. हमारा सामाजिक ढांचा ही ऐसा है कि जहां महिलाओं के बारे में ये राय सदियों से रही है. एक तरफ हमारे यहां शास्त्रों में यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।कहकर नारी को सम्मान दिया गया है तो दूसरी तरफ ऐसे ग्रंथों की भी कमी नहीं है जो नारी को नरक का द्वार मानते रहे हैं।
 

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