मोदी सरकार की नेम चेंज पॉलिसी में हाल के सालों में कई प्रमुख बदलाव आए हैं, जिन्हें सरकार “सत्ता से सेवा” (satta se seva), “औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति” और “कर्तव्य-केंद्रित शासन” की दिशा में कदम बताती है। ये बदलाव मुख्य रूप से दिल्ली के केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र (Central Vista) और सरकारी प्रतीकों पर केंद्रित रहे हैं।
प्रमुख नाम बदलावों की ‘करेक्टेड लिस्ट’ (2014 से अब तक के संदर्भ में हालिया फोकस):
राजपथ → कर्तव्य पथ
दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ (Rashtrapati Bhavan से India Gate तक), जो ब्रिटिश काल में Kingsway और बाद में राजाओं की शक्ति का प्रतीक था, अब कर्तव्य पथ बन गया।
इसका उद्देश्य: सत्ता के बजाय जनता के कर्तव्य और सार्वजनिक स्वामित्व पर जोर।
पीएम मोदी ने 8 सितंबर 2022 को इसका उद्घाटन किया।यहां देखिए कर्तव्य पथ की कुछ खूबसूरत तस्वीरें, जो इस बदलाव के बाद की हैं:
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) परिसर → सेवा तीर्थ (Seva Teerth) (2025-26)
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नया PMO कॉम्प्लेक्स (Executive Enclave) अब सेवा तीर्थ कहलाता है।
सेवा तीर्थ-1: मुख्य PMO
सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय (सितंबर 2025 से शिफ्ट)
सेवा तीर्थ-3: NSA ऑफिस
लागत: लगभग ₹1,189 करोड़।
14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति) से पीएम मोदी यहां से काम शुरू कर चुके हैं — आजादी के बाद पहली बार PMO साउथ ब्लॉक से बाहर आया।
संदेश: “सत्ता नहीं, सेवा” — पीएम खुद को ‘प्रधान सेवक’ कहते हैं, तो PMO को तीर्थ (पवित्र सेवा स्थल) बनाया गया।
सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स का आधुनिक लुक यहां देखिए:
अन्य जुड़े बदलाव:
प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास: 7 Race Course Road → लोक कल्याण मार्ग (2016) — कल्याण और सेवा पर फोकस।
केंद्रीय सचिवालय → कर्तव्य भवन — प्रशासनिक हब, जहां सेवा को कर्तव्य माना गया।
राजभवन (देशभर में) → लोक भवन (2025 से कई राज्यों में लागू) — ‘राज’ से ‘लोक’ की ओर शिफ्ट।
ये बदलाव सरकार के मुताबिक भारतीय संस्कृति, सेवा-भाव और जन-केंद्रित शासन को मजबूत करते हैं। विपक्ष इन्हें “कॉस्मेटिक” या प्राथमिकताओं में गड़बड़ी बताता है। कुल मिलाकर, ये नाम सिर्फ शब्द नहीं — शासन के दर्शन का प्रतीक हैं!







