पीएम मोदी का मणिपुर दौरा: पृष्ठभूमि और अपेक्षाएँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर का दौरा करेंगे। यह उनका 2023 में राज्य में भड़की कुकी-मैतेई जातीय हिंसा के बाद पहला दौरा होगा। यह यात्रा न केवल विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेगी, बल्कि हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में शांति प्रयासों को भी गति देगी।

 

दौरे का कार्यक्रम

 

प्रधानमंत्री मोदी का दौरा लगभग 4 घंटे का होगा, जो मिजोरम से होते हुए मणिपुर पहुंचने के साथ शुरू होगा। चुराचांदपुर (कुकी बहुल क्षेत्र): दोपहर 11:30 बजे पहुंचकर पीस ग्राउंड पर सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। यहां 7,300 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास रखेंगे।
इंफाल (मैतेई बहुल राजधानी): कंगला फोर्ट पर एक और सभा को संबोधित करेंगे। यहां 1,200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, जिसमें नई पुलिस मुख्यालय और सचिवालय भवन शामिल हैं।
कुल मूल्य: 8,500 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं, जैसे सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं।
अतिरिक्त: हिंसा से विस्थापित परिवारों से मुलाकात और शांति संदेश।
यह दौरा मिजोरम, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार के दौरे का हिस्सा है, जहां कुल 71,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लॉन्च होंगी।

 

 

2 साल पहले की जातीय हिंसा: एक संक्षिप्त इतिहास

 

 

मणिपुर में कुकी (जो मुख्य रूप से ईसाई हैं) और मैतेई (हिंदू बहुमत) समुदायों के बीच हिंसा 3 मई 2023 को भड़की। यह राज्य की लंबे समय से चली आ रही जातीय तनावों का परिणाम थी। मुख्य कारण:

ट्रिगर: मणिपुर हाईकोर्ट के एक फैसले ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की सिफारिश की, जिससे कुकी-जो समुदायों ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन चुराचांदपुर और बिश्नुपुर जिलों की सीमा पर हिंसक हो गया।
कारण: भूमि अधिकार, संसाधनों पर नियंत्रण और अवैध प्रवासियों के आरोप। मैतेई घाटी में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में। मैतेई एसटी दर्जा पाने पर पहाड़ी भूमि खरीद सकेंगे, जिससे कुकी डर गए।
प्रभाव:

 

258 से अधिक मौतें (नवंबर 2024 तक)।

 

60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित।
गांव जलाए गए, हथियार लूटे गए, और राज्य दो हिस्सों में बंट गया—घाटी मैतेई-नियंत्रित, पहाड़ियां कुकी-नियंत्रित।
राजनीतिक पृष्ठभूमि: 2025 में राष्ट्रपति शासन लागू। पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह (मैतेई) ने इस्तीफा दिया। केंद्र सरकार ने केंद्रीय बल तैनात किए, लेकिन हिंसा की छिटपुट घटनाएं जारी रहीं।
वर्ष मुख्य घटना प्रभाव
2023 (मई) हिंसा का प्रारंभ, हाईकोर्ट फैसला 100+ मौतें, 60,000 विस्थापित
2024 छिटपुट झड़पें, बलों की तैनाती 258 कुल मौतें
2025 (सितंबर) नई झड़पें (जिरीबाम में 6 मौतें) सुरक्षा बढ़ाई गई
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस का विरोध: राहुल गांधी ने कहा, “मणिपुर का मुद्दा लंबे समय से चल रहा है। अब जाना अच्छा है, लेकिन असली समस्या ‘वोट चोरी’ है।” विपक्ष ने पीएम पर देरी का आरोप लगाया।
बीजेपी का बचाव: राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने विधायकों से शांतिपूर्ण दौरा सुनिश्चित करने को कहा। कुकी समूहों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 खोलने का वादा किया।
अंडरग्राउंड ग्रुप्स: कुछ संगठनों ने बहिष्कार की धमकी दी, लेकिन सुरक्षा बल तैनात हैं।
अपेक्षित प्रभाव
यह दौरा शांति प्रक्रिया को मजबूत कर सकता है, खासकर चुराचांदपुर और इंफाल दोनों क्षेत्रों को कवर करने से। हालांकि, गहरे जातीय विभाजन को ठीक करने के लिए संवाद जरूरी है। केंद्र सरकार ने त्रिपक्षीय समझौते को पुनर्जीवित किया है, जिसमें कुकी समूहों की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित की गई। उम्मीद है कि यह यात्रा मणिपुर को सामान्य स्थिति की ओर ले जाएगी।

 

पीएम मोदी का मणिपुर दौरा: पृष्ठभूमि और महत्व

 

 

कल, 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर का दौरा करेंगे। यह उनका 2023 में राज्य में भड़की कुकी-मैतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा के बाद पहला दौरा होगा। यह यात्रा लगभग चार घंटे की होगी, जिसमें विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, विस्थापित परिवारों से मुलाकात और सार्वजनिक सभाएं शामिल हैं। यह दौरा मणिपुर की शांति प्रक्रिया और विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विवादों के बीच हो रहा है।

 

दौरे का कार्यक्रम

 

स्थान और समय: पीएम मोदी मिजोरम से मणिपुर पहुंचेंगे। सबसे पहले कुकी बहुल क्षेत्र चर्चाचांदपुर के पीस ग्राउंड पर दोपहर 11:30 बजे से एक घंटे की सार्वजनिक सभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद इम्फाल के कंगला फोर्ट में दूसरी सभा होगी। शाम 4 बजे तक वे गुवाहाटी के लिए रवाना हो जाएंगे।
परियोजनाएं: लगभग 8,500 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन। इसमें 7,300 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं का फाउंडेशन स्टोन (चर्चाचांदपुर में) और 1,200 करोड़ रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं (इम्फाल में) शामिल हैं। इसमें नया पुलिस मुख्यालय, सेक्रेटेरिएट भवन और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। कुल मिलाकर, मिजोरम, मणिपुर और असम में 35,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन होगा।
विशेष फोकस: विस्थापित परिवारों से मुलाकात और शांति बहाली के प्रयास। केंद्र सरकार ने हाल ही में कुकी समुदाय के साथ समझौते किए हैं, जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को फिर से खोलना और अलग प्रशासनिक व्यवस्था पर चर्चा।
यह दौरा मणिपुर के गवर्नर अजय कुमार भल्ला द्वारा विधायकों को दिए निर्देशों के बाद हो रहा है, जिसमें उन्होंने “शांतिपूर्ण” माहौल सुनिश्चित करने पर जोर दिया। हालांकि, कुछ भूमिगत संगठनों ने दौरा बहिष्कार का आह्वान किया है।

 

2 साल पहले भड़की जातीय हिंसा: पृष्ठभूमि

 

मणिपुर में कुकी (जो कुखी-जो के रूप में भी जाना जाता है, मुख्यतः ईसाई) और मैतेई (मुख्यतः हिंदू, घाटी क्षेत्र में बहुमत) समुदायों के बीच हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई। यह हिंसा मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग को लेकर भड़की, जो उच्च न्यायालय के एक आदेश से प्रेरित था। कुकी समुदाय ने इसका विरोध किया, क्योंकि इससे मैतेई को पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खरीदने और आरक्षण जैसे लाभ मिल सकते थे, जो पारंपरिक रूप से आदिवासी क्षेत्र हैं।

ट्रिगर: ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर (एटीएसयूएम) द्वारा “ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च” का आयोजन। चुराचांदपुर और बिश्नुपुर जिलों की सीमा पर झड़पें हुईं, जो घर जलाने और हमलों में बदल गईं।
प्रभाव: 2024 के अंत तक 258 से अधिक मौतें, 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित। घाटी (मैतेई बहुल) और पहाड़ (कुकी बहुल) क्षेत्रों में जातीय सफाई हो गई। हथियारों की लूट, बलात्कार और हमलों की घटनाएं हुईं। 2025 में राष्ट्रपति शासन लागू है (फरवरी से, पूर्व सीएम एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद)।
कारण: ऐतिहासिक रूप से, भूमि, संसाधन और सत्ता पर विवाद। मैतेई (53% आबादी) घाटी में रहते हैं, जबकि कुकी (16%) पहाड़ों में। ब्रिटिश काल से चली आ रही तनाव, जिसमें नगा समुदाय भी शामिल रहा। हाल के वर्षों में, ड्रग तस्करी, अवैध प्रवास (म्यांमार से) और वन कटाई जैसे मुद्दों ने आग में घी डाला।
हिंसा ने राज्य को दो भागों में बांट दिया: मैतेई पुलिस घाटी संभाल रही है, जबकि केंद्रीय बल पहाड़ों में। केंद्र सरकार ने अमित शाह के नेतृत्व में हस्तक्षेप किया, लेकिन विपक्ष ने देरी की आलोचना की।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस का तंज: राहुल गांधी ने कहा, “मणिपुर का मुद्दा लंबे समय से चल रहा है। अब जाना अच्छा है, लेकिन देश का मुख्य मुद्दा ‘वोट चोरी’ है।” विपक्ष ने पीएम के विलंब पर सवाल उठाए।
बीजेपी का पक्ष: दौरे को शांति और विकास का संदेश बताया। पूर्व सीएम बीरेन सिंह और अन्य विधायकों ने स्वागत की तैयारी की।
कुकी संगठनों की मांग: अलग प्रशासनिक इकाई। कुछ समूहों ने दौरा का बहिष्कार किया, लेकिन केंद्र के समझौतों से उम्मीद बंधी है।
यह दौरा मणिपुर की जटिल स्थिति को सुधारने का प्रयास है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बिना समुदायों के बीच संवाद के स्थायी शांति मुश्किल है। राज्य में हाल ही में जिरिबाम जिले में हिंसा की घटनाएं हुईं, जो तनाव बरकरार रखती हैं।

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