पाकिस्तान ने दिखाई ट्रंप को आंख, बात मानने से किया इनकार!

अमेरिका की चापलूसी करने में जुटे शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के सामने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसी शर्त रख दी, जिनसे पाकिस्तान के हुक्मरानों की नींद उड़ गई है। ट्रंप ने 5 देशों से अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने की मांग की, जिनमें पाकिस्तान का नाम भी शामिल है। इस बात से पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ भड़क गए और उन्होंने इस पर अमेरिका को दो टूक जवाब दे दिया।

ख्वाजा आसिफ ने कहा कि वह इस्लामाबाद के अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने के पक्ष में नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में शामिल मुस्लिम देशों को अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए। UAE और बहरीन पहले से ही इस समझौते के सदस्य हैं। सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्र और जॉर्डन के भी इस पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है। बता दें कि ये समझौता इजरायल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित करने को लेकर है।

हमारी मूल विचारधारा के खिलाफ: आसिफ

ट्रंप ने कहा था कि मौजूदा देशों को इस समझौते से काफी फायदा हुआ है और भविष्य में इससे होने वाले फायदे पहले से कहीं ज्यादा हो सकते हैं। पाकिस्तान के न्यूज चैनल समा टीवी को दिए इंटरव्यू में रक्षामंत्री ने कहा, ‘व्यक्तिगत रूप से मुझे नहीं लगता कि हमें किसी ऐसे समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी मूल विचारधारा के खिलाफ हो

पाकिस्तान के रुख पर क्या बोले ख्वाजा आसिफ?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि उनका देश लंबे समय से इस रुख पर कायम है कि 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना होने तक वह इजरायल को मान्यता नहीं देगा। उन्होंने कहा, ‘हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि यह हमें स्वीकार नहीं है।

उनके साथ कैसे बैठें, जिन पर रत्तीभर भरोसा नहीं: आसिफ

ख्वाजा आसिफ ने विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, ‘आप उन लोगों के साथ कैसे बैठेंगे जिनके शब्द पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं किया जा सकता?’ उन्होंने पाकिस्तान के पासपोर्ट का भी जिक्र किया, जिस पर लिखा है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए वैध नहीं है. आसिफ उन नेताओं में शामिल रहे हैं जो इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने के किसी भी विचार का कड़ा विरोध करते हैं. पिछले महीने उन्होंने इजरायल को मानवता के लिए अभिशाप बताया था और उस पर क्षेत्र में नरसंहार करने का आरोप लगाया था।
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