सऊदी अरब के साथ उसके रक्षा समझौते के चलते बड़ी डिप्लोमैटिक और डिफेंसिव चर्चा हो रही है कि पाकिस्तान युद्ध में कूद रहा है।
क्या हो रहा है?
दरअसल अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई मारे गए। ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए। इजरायल, अमेरिकी बेस और गल्फ देशों (सऊदी अरब समेत) पर मिसाइल-ड्रोन बरसाए। सऊदी पर तेल सुविधाओं और रियाद में अमेरिकी दूतावास पर भी हमले की खबरें हैं।
सऊदी घबरा गया है। वह खुद को न्यूट्रल बताता है, लेकिन ईरान ने चेतावनी दी कि अगर सऊदी की जमीन से इजरायल-अमेरिका ने हमला किया तो सऊदी भी निशाना बनेगा।
सऊदी घबरा गया है। वह खुद को न्यूट्रल बताता है, लेकिन ईरान ने चेतावनी दी कि अगर सऊदी की जमीन से इजरायल-अमेरिका ने हमला किया तो सऊदी भी निशाना बनेगा।
पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता (सितंबर 2025)
सितंबर 2025 में दोनों देशों ने Strategic Mutual Defence Agreement (SMDA) साइन किया था। इसमें साफ लिखा है: “एक पर हमला = दोनों पर हमला” (NATO Article 5 जैसा)।
पाकिस्तान ने इसे ईरान को याद दिलाया है।
पाकिस्तान ने इसे ईरान को याद दिलाया है।
बड़ी मुलाकात
सऊदी डिफेंस मिनिस्टर खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर (जो चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज भी हैं) से रियाद में मुलाकात की।
खालिद बिन सलमान ने X पर लिखा
“हमने ईरानी हमलों को रोकने के लिए हमारे संयुक्त सामरिक रक्षा समझौते के तहत जरूरी कदमों पर चर्चा की। ऐसे कदम क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। उम्मीद है ईरान समझदारी दिखाएगा और गलत आकलन से बचेगा।”
दोनों तरफ से हाई-लेवल अफसर भी मौजूद थे।
यह मुलाकात ईरानी हमलों को रोकने और संयुक्त डिफेंस प्लानिंग पर केंद्रित थी — हमला करने या पाकिस्तानी फौज भेजने पर नहीं।
दोनों तरफ से हाई-लेवल अफसर भी मौजूद थे।
यह मुलाकात ईरानी हमलों को रोकने और संयुक्त डिफेंस प्लानिंग पर केंद्रित थी — हमला करने या पाकिस्तानी फौज भेजने पर नहीं।
पाकिस्तान की आधिकारिक लाइन
विदेश मंत्री इशाक दार ने संसद में कहा: हमने ईरान को बैकचैनल पर चेतावनी दी कि सऊदी पर हमला = पाकिस्तान पर हमला। इसी वजह से सऊदी पर हमले कम हुए।
पाकिस्तान दोनों तरफ से डी-एस्केलेशन की अपील कर रहा है और खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। कोई ट्रूप्स भेजने या ऑफेंसिव एक्शन की घोषणा नहीं हुई।
पाकिस्तान दोनों तरफ से डी-एस्केलेशन की अपील कर रहा है और खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। कोई ट्रूप्स भेजने या ऑफेंसिव एक्शन की घोषणा नहीं हुई।
क्यों पाकिस्तान पूरा युद्ध नहीं लड़ेगा?
ईरान से 900+ किमी लंबी सीमा — सीधा खतरा।
पाकिस्तान में 15-20% शिया आबादी — खामेनेई की मौत पर कराची, इस्लामाबाद में हिंसक प्रदर्शन हो चुके (23+ मौतें)।
अफगानिस्तान बॉर्डर पर पहले से तनाव (तालिबान हमले बढ़े)।
अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर — सऊदी से तेल, रेमिटेंस और मदद मिलती है, लेकिन ईरान से भी व्यापार और गैस पाइपलाइन की बातें चलती रही हैं।
विश्लेषक (Ayesha Siddiqa, Zahid Shahab Ahmed आदि) कहते हैं: पाकिस्तान डिटरेंस और इंटेलिजेंस/नेवल सपोर्ट दे सकता है, लेकिन फुल मिलिट्री इन्वॉल्वमेंट बहुत महंगा पड़ेगा।
पाकिस्तान में 15-20% शिया आबादी — खामेनेई की मौत पर कराची, इस्लामाबाद में हिंसक प्रदर्शन हो चुके (23+ मौतें)।
अफगानिस्तान बॉर्डर पर पहले से तनाव (तालिबान हमले बढ़े)।
अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर — सऊदी से तेल, रेमिटेंस और मदद मिलती है, लेकिन ईरान से भी व्यापार और गैस पाइपलाइन की बातें चलती रही हैं।
विश्लेषक (Ayesha Siddiqa, Zahid Shahab Ahmed आदि) कहते हैं: पाकिस्तान डिटरेंस और इंटेलिजेंस/नेवल सपोर्ट दे सकता है, लेकिन फुल मिलिट्री इन्वॉल्वमेंट बहुत महंगा पड़ेगा।







