उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को जारी वीडियो में स्नेहा गुप्ता ने रूस प्रशासन पर लगाया अपने पति को गिरफ्तार करने का आरोप, सेना में भर्ती करने की जताई आशंका
सेना में भर्ती 227 भारतीय नागरिकों में 51 मारे जा चुके हैं, मुक्त कराए हैं 139
मार्च 2024 में द हिन्दू अख़बार में रूस सेना में भारतीय नागरिकों के जबरदस्ती सेना में भेजने की छपी थी खबर
चरण सिंह
रूस में भारतीय नागरिकों को जबरदस्ती सेना में भर्ती कराया जा रहा है। रूस की सेना में भर्ती 51 भारतीयों की मौत भी हो चुकी है। इस बात को उत्तर प्रदेश की एक महिला का वायरल वीडियो बल दे रहा है। दरअसल भारत से रूस में वर्क वीजा पर काम कर रहे इंजीनियर चंदन गुप्ता की पत्नी स्नेहा गुप्ता ने सीएम योगी से मदद की गुहार लगाई है। स्नेहा ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने रूसी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने बिना किसी कारण के उनके पति को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने आशंका जताई है कि अब उन्हें सेना में भेज दिया जाएगा।

स्नेहा इस वायरल वीडियो में कह रही हैं कि मेरा नाम स्नेहा गुप्ता है। मैं मॉस्को में रहती हूं। मेरे हस्बैंड चंदन गुप्ता यूफ्लेक्स कंपनी पॉलीफिस में हैं जो इंडिया की कंपनी है। यह कंपनी सेक्टर 62 नोएडा की है। यहां पर मेरे हस्बैंड हाई क्वालिफाइड वीजा पर हम सब रह रहे हैं। मेरे हस्बैंड इंजीनियर हैं और कंपनी के थ्रू आए हैं। यूफ्लेक्स के थ्रू। उनका पासपोर्ट नंबर है वी781317 है और कानपुर उत्तर प्रदेश उनका एड्रेस है। स्नेहा वीडियो में कहती दिखाई दे रही हैं कि मेरा माननीय मुख्यमंत्री मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि यहां पर पुलिस उनको रात लगभग 12.30 बजे ले गई है।
स्नेहा कह रही हैं कि कल मॉस्को डे था और ये लोग परेशान करके फंसा के अब वो जेल में डाल दिए हैं वो निकाल नहीं रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी ना मुझे यहां की लैंग्वेज आती है मेरे साथ मेरा 10 साल का बच्चा है और हम यहां से कैसे निकालें मेरे हस्बैंड को। प्लीज उनकी हेल्प करिए। उनको निकालिए क्योंकि यहां पर रशियन आर्मी में लोगों को भेज दिया जा रहा है जबरदस्ती। इनके पास आर्मी में लोगों की कमी है। प्लीज मेरी विनती है कि मेरे वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लोग यह मुख्यमंत्री तक पहुंचाएं क्योंकि यहां पर लोगों को ऐसे ही फंसा के और भेज कहां पर भेज देते हैं कुछ पता नहीं चलता है।
इधर जानकारी मिल रही है कि चंदन गुप्ता और उनके दोस्त आशीष को शनिवार की रात लगभग 11:30 बजे रेड स्क्वायर इलाके में हिरासत में लिया गया। उन पर नशे में होने और पास खड़ी एम्बुलेंस के शीशे तोड़ने का आरोप है। फिलहाल उन्हें मॉस्को के बाउमानस्काया पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया है।
इधर जानकारी मिल रही है कि चंदन गुप्ता और उनके दोस्त आशीष को शनिवार की रात लगभग 11:30 बजे रेड स्क्वायर इलाके में हिरासत में लिया गया। उन पर नशे में होने और पास खड़ी एम्बुलेंस के शीशे तोड़ने का आरोप है। फिलहाल उन्हें मॉस्को के बाउमानस्काया पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया है।
दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों के सामने यह मामला उठाया है और उन्हें रिहा करने का अनुरोध किया है। साथ ही, उनसे मिलने की इजाज़त (कॉन्सुलर एक्सेस) भी मांगी गई है। दूतावास श्री चंदन गुप्ता की पत्नी, सुश्री स्नेहा गुप्ता के संपर्क में है।
स्नेहा गुप्ता की बात में दम इसलिए लगता है क्योंकि हाल ही में खुद सरकार की ओर से खबर आई थी कि रूसी सेना में भर्ती किए गए 227 भारतीय नागरिकों में से अब तक 51 भारतीयों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी बाकायदा विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दी थी।
दरअसल मौजूदा हालात में विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए तरह तरह की समस्याएं खड़ी हो रही हैं। गत दिनों अमेरिका से हथकड़ी और बेड़िया लगाकर भारतीय नागरिकों को भारत भेजा गया था। भारतीयों का वीजा न बढ़ाने की बात भी सामने आ रही है। रूस तो कई कदम आगे निकल गया। भारतीय नागरिकों को जबरदस्ती सेना में भर्ती कराया जा रहा है।
4 मार्च 2024 को अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू ने एक रिपोर्ट की थी, जिसमें कहा गया था की नौकरी का झांसा देकर कुछ भारतीयों को रूस ले जाया गया और फिर उन्हें रूसी सेना में भर्ती करा दिया गया। इस रिपोर्ट के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया था कि इस मामले पर रूस की सरकार से बात की जा रही है और इन लोगों को वापस लाने के लिए काम किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन सीमा पर फँसे सात और भारतीयों के एक समूह ने इस सप्ताह दो वीडियो जारी कर भारत लौटने के लिए सरकार से मदद मांगी थी। सात भारतीयों की पहचान गगनदीप सिंह (24), लवप्रीत सिंह (24), नारायण सिंह (22), गुरप्रीत सिंह (21), गुरप्रीत सिंह (23), हर्ष कुमार (20) और अभिषेक कुमार (21) के रूप में की गई थी। इनमें से पाँच मजदूर पंजाब के बताए गए थे। दो हरियाणा के बताए गए थे। जानकारी के अनुसार उनमें से एक व्यक्ति ने कहा था कि वे टूरिस्ट वीज़ा पर रूस पहुंचे थे और पुलिस ने दस्तावेज़ नहीं होने के कारण उन्हें हिरासत में लिया और बाद में “सहायक” के रूप में रूसी सेना में भर्ती होने के लिए मजबूर किया गया। इन लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें रूस की सेना में शामिल होने के लिए मजबूर किया और कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें 10 साल की क़ैद दे दी जाएगी।






