हत्या के मामले क्यों नहीं दर्ज होते छात्रों की जान लेने वाले इन धंधेबाज लोगों के खिलाफ ?
अवैध रूप से बढ़ाते चले जा रहे हैं जर्जर बिल्डिंग को, अधिकारियों की मिली भगत के चलते फल फूल रहा किराए का धंधा
रविवार को भी भरभराकर गिर गई एक जर्जर बिल्डिंग, पीजी का चल रहा था धंधा, 6 की मौत, कई की है मलबे में दबे आशंका
चरण सिंह
कितना दर्दनाक और पीड़ादायक होता है कि जब कोई युवा देश की राजधानी में अपना भविष्य संवारने आता है और जर्जर मकान के ध्वस्त होने पर काल के मुंह में समा जाता है। क्या बीतती होगी इन बच्चों के माता-पिता और परिवार वालों पर ? पर इससे किसी कोई क्या मतलब ? नेताओं को अपने वोटबैंक से मतलब और अधिकारियों को रिश्वत से। पैसे की भूख है कि बढ़ती ही जा रही है। मकानों के गिरने और मलबे के नीचे दबकर मरने की घटनाएं दिल्ली में लगातार हो रही हैं। कुछ दिन चर्चा होती है फिर लोग भूल जाते हैं। अवैध रूप से चल रहे किराए के धंधे के न जाने कितने होनहारों की जान ले ली है।
दिल्ली सरकार और पुलिस की उदासीनता के चलते दूर दराज गांवों से कोचिंग करने और पढ़ने वाले युवा इन जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। संबंधित अधिकारी को मंथली मिल जाती है और किराए का धंधा फलता फूलता रहता है। जिस सत्य निकेतन में यह जो हादसा हुआ है उसकी बसीकत ही ऐसी है कि जैसे यह निकेतन छात्रों को मरने के लिए ही आमंत्रित करता हो।
दिल्ली में एक साल में इस तरह की 7 घटनाएं हुईं हैं और इनमें 35 लोग मारे गए हैं। दिल्ली सरकार बताए कि कितने मकान मालिकों पर क्या कार्रवाई हुई ? कितने मकान मालिक जेल में हैं। कितने मकान मालिक जेल में हैं। इन मकान मालिकों के खिलाफ 302 धारा में हत्या का मामला क्यों नहीं दर्ज कराया जाता है। यह अपने आप में दिलचस्प है कि नाम सत्य निकेतन है और टिका हुआ है पूरा झूठ पर।
दरअसल सत्य निकेतन वह संकरी गली है जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र पीजी या कमरा लेकर रहते हैं। यहां रविवार को एक पीजी वाली ऐसी ही इमारत भरभराकर गिर पड़ी और छात्रों समेत कई लोग मलबे के नीचे दब गए। रविवार होने की वजह से कॉलेज बंद थे और कई बच्चे पीजी थे। इमारत में कितने लोग थे, इस बात की पुष्टि तो नहीं हो सकी है। 6 लोगों की मौत होने की खबर है। 20 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। कई लोग अभी भी मलबे के नीचे मौत से लड़ाई लड़ रहे हैं। मकान मालिक फरार है। पकड़ा भी जाएगा पर कुछ खास नहीं होगा। बच्चों की जाने लेने वाले इन धंधेबाजों के खिलाफ हत्या के मामले क्यों दर्ज किये जाते हैं ? मकान मालिक ही क्यों ? स्थानीय जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारियों पर पर भी हत्या का मामला दर्ज हो।
ऐसा भी नहीं है कि सत्य निकेतन बिल्डिंग का गिरना कोई पहला हादसा है। इस तरह के हादसे लगातार हो रहे हैं। वोटबैंक की राजनीति में मशगूल दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता क्या कर रही हैं ? जब हादसे का शिकार हुई यह बिल्डिंग 30 साल पुरानी थी और जर्जर हो चुकी थी। इसके अगल-बगल की इमारतें भी ऐसी ही खराब हालत हालत में हैं। बीजेपी सरकारों को 100 साल पुरानी मस्जिद के बारे में तो पता चल जाता है यह अवैध रूप से बनी हुई है पर अवैध रूप से खड़े जर्जर वे मकान नहीं दिखाई देते जो छात्रों की जान ले रहे हैं।
दरअसल ये बिल्डिंग अवैध रूप से बढ़ती रही हैं धंधे के लिए बिल्डिंग के फ्लोर भी बढ़ाए जाते रहे। वह बात दूसरी है कि प्रशासन की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी गई थी। तो फिर एमसीडी के अधिकारी क्या कर रहे थे ? स्थानीय जनप्रतिनिधि क्या कर रहे थे ?
जुलाई में हुआ रोहिणी बिल्डिंग हादसा, 3 मजदूरों की हुई थी मौत
देश की राजधानी में लगातार इमारत ढहने और मलबे के नीचे दबकर लोगों की जान जाने जानकारी समय समय पर मिलती रहती है।जुलाई में रोहिणी इलाके में चार मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह जाने से 3 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ था।
साकेत मेट्रो स्टेशन के पास हुआ था हादसा
गत 30 मई को साकेत/महरौली के करीब सैदुलाजाब इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने से 6 लोगों की जान चली गई थी। यह इमारत साकेत मेट्रो स्टेशन के पास थी. इसे भी अवैध बताया गया था। यह इमारत पूरी तरह ढहकर बगल में बनी कैंटीन पर गिर गई थी, जिसमें कई छात्र बैठकर खाना खा रहे थे। हादसे का शिकार हुई यह बिल्डिंग कमर्शियल थी और इसमें कई ऑफिस बने थे। शनिवार होने की वजह से ऑफिस बंद थे, लेकिन जिस बिल्डिंग पर ढहकर यह इमारत गिरी वहां काफी लोग मौजूद थे। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी।
वेलकम इलाके में गिरा था पुराना जर्जर घर
जुलाई 2025 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के वेलकम इलाके में 4 मंजिला जर्जर इमारत गिरी थी। इसमें कई लोगों की जान चली गई थी। इमारत के पुरानी और जर्जर होने के कारण यह अचानक भरभरा कर गिर गई थी। यह एक रिहायशी इमारत थी जिसमें 10 से ज्यादा लोग रहते थे।
पहाड़गंज हादसे में तीन की हुई थी मौत
17 मई 2025 को पहाड़गंज में एक निर्माणाधीन इमारत का बेसमेंट ढहने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। तेज आंधी और बारिश को यह इमारत झेल नहीं पाई थी। इस इमारत के नीचे दबकर 3 मजदूरों ने दम तोड़ दिया था।
मुस्तफाबाद हादसे में गई थी 11 लोगों की जान
18 अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद में 4 मंजिला इमारत ढही थी, जिसमें 11 लोगों ने दम तोड़ दिया था। उस दौरान भी यही कहा गया था कि वह पूरा इलाका इलीगल था और कार्रवाई की जाएगी। पर क्या हुआ ? ढाक के तीन पात। लोग मरते हैं और धंधा आगे बढ़ता रहता है।