बिहार में नीतिश-मांझी की तर्ज पर झारखंड में रहा हेमंत-चंपई का ‘प्रयोग’

अभिजीत / रामनरेश

पटना । बिहार में वर्ष 2015 में नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाकर प्रयोग किया। उसी तर्ज पर हेमंत सोरेन ने चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनवाया। लेकिन समय आने पर चंपाई सोरेन बिना किसी कठिनाई के हेमंत सोरेन के लिए पद छोड़ दिया। हालांकि चर्चा है कि हेमंत सोरेन इस बार अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को सीएम बनवाना चाहते थे, लेकिन चंपाई सोरेन की नाराजगी की वजह से यह प्रयास सफल नहीं हो सका।

 

झारखंड में सत्ता के गलियारे में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच हेमंत सोरेन तीसरी बार सीएम पद की शपथ लेने को तैयार हैं। शपथ ग्रहण समारोह 7 जुलाई को संभावित है। 2019 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद सीएम बने हेमंत सोरेन ने 31 जनवरी को जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जेल जाने के पहले ‘स्टॉप गैप अरेंजमेंट’ के तहत चंपई सोरेन को अपनी कुर्सी सौंपी थी। अब जमानत पर जेल से बाहर आने के छह दिनों के भीतर ही उन्होंने कुर्सी उनसे वापस मांग ली।

चंपई सोरेन से सीएम की कुर्सी वापस लेने में हेमंत सोरेन को वैसी हील-हुज्जत नहीं झेलनी पड़ी, जैसा 2015 में बिहार में जदयू नेता नीतीश कुमार को जीतन राम मांझी को हटाने में झेलनी पड़ी थी। नीतीश कुमार ने 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की पराजय की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था और खुद की जगह जीतन राम मांझी को सीएम की कुर्सी पर बिठाया था।

नीतीश को भरोसा था कि जीतन राम मांझी उनके इशारे पर चलेंगे, लेकिन कुर्सी पर बैठते ही वह रंग बदलकर खुदमुख्तार बन बैठे थे और नीतीश को परेशानी में डाल दिया था। बाद में नीतीश को उन्हें हटाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी थी।
हेमंत सोरेन के सामने ऐसी परिस्थितियां नहीं बनीं और अपने लोगों के बीच ‘टाइगर’ कहलाने वाले चंपई सोरेन ने आसानी से समर्पण कर दिया और सिर्फ छोटी-मोटी शर्तों के साथ पांच महीने के बाद सीएम की कुर्सी वापस लौटाने पर राजी हो गए।

दो दिन पहले कांग्रेस लीडर सोनिया गांधी ने हेमंत सोरेन से फोन पर बात की थी। सूत्रों के मुताबिक सोनिया ने ही हेमंत सोरेन को कहा कि चूंकि 2019 में झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन ने उनके नेतृत्व में चुनाव लड़कर सत्ता हासिल की थी और 2024 में भी जनता के बीच यह संदेश जाना चाहिए कि आप ही गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में चंपई सोरेन सीएम पद पर रहते हैं तो भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। बताया जाता है कि सोनिया गांधी की ओर से मिली इसी ‘सियासी सलाह’ के बाद हेमंत ने चंपई सोरेन को हटाकर फिर से सीएम की कुर्सी पर बैठने का फैसला लिया।

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