Noida News : विश्व श्रवण दिवस आज : अपने कान की करें देखभाल, ईयरफोन का कम करें इस्तेमाल : डा. मनोज

120 डेसीबल से ऊपर की आवाज अचानक ही स्थाई रूप से कानों को नुकसान पहुंचा सकती है

 

नोएडा । … खुशियां जिंदगी भर बनी रहेंगी अगर व्यक्ति के हैं स्वस्थ कान। अपने कान की करें देखभाल, ईयर फोन का कम करें इस्तेमाल.. इस तरह के स्लोगन से लोगों को कानों को स्वस्थ रखने के लिए जागरूक किया जा रहा। शुक्रवार (तीन मार्च) को विश्व श्रवण दिवस है। इसको मनाने का उद्देश्य श्रवण हानि के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। इस बार इस दिवस की थीम है- ईयर एंड हियरिंग केयर फॉर ऑल लेट्स मेक इट रियली।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भंगेल के ईएनटी सर्जन डा. मनोज कुमार कहते हैं, कानों की सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुनने की क्षमता का ठीक होना बेहद आवश्यक है क्योंकि बातचीत, संगीत या फिर कोई भी आवाज सही तरीके से सुन पाना जीवन के लिए बेहद जरूरी है। सुनने की क्षमता में कमी भी जीवन के आनंद को कम कर सकती है। अगर हम सुन नहीं पाएंगे तो जीवन का सुख कम हो जाएगा।

डॉ. मनोज का कहना है कि आजकल ईयर फोन लोगों को बहरा बनाने का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। बहुत से लोग हर वक्त ईयर फोन लगाए रखते हैं, जो बहुत ही नुकसानदायक है। इसके अत्यधिक प्रयोग से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और धीरे-धीरे व्यक्ति बहरा होने की ओर अग्रसर होता जाता है।  उन्होंने सलाह दी है – बहरापन और कानों से जुड़ी समस्या से बचने के लिए कानों में लीड लगाकर ऊंची आवाज में कुछ भी सुनना बंद करें। अगर सुनने में किसी प्रकार की समस्या हो रही है तो तुरंत चिकित्सक से जांच कराएं।

मानक से ज्यादा शोर कानों के लिए घातक है। अचानक से हुए तेज धमाके से कान की नसें कमजोर हो जाती हैं। कई बार तेज आवाज से कान का पर्दा फटने तक का डर रहता है। उन्होंने बताया- 70 डेसीबल से ऊपर की आवाज थोड़े समय में और120 डेसीबल से ऊपर की आवाज अचानक ही स्थाई रूप से कानों को नुकसान पहुंचा सकती है।

ऐसे सुरक्षित रखे अपने कान

ईयर फोन लगाकर तेज ध्वनि में गाने कतई न सुनें

तेज आवाज के संपर्क में आने से बचें

ईयर प्लग का उपयोग करें जो शोर को रोकते हैं।

तेज आवाज वाले वातावरण से बचें

कान की अच्छी स्वच्छता बनाए रखें

कानों की सफाई चिकित्सक से ही कराएं

अपनी सुनने क्षमता की जाँच करें।

 

मुख्य कारण:

सुनने की क्षमता में कमी हो जाने के मुख्य कारण उम्र बढ़ना, ज्यादा शोर होना, आनुवंशिकता, हानिकारक या अन्य बीमारियों में दी जाने वाली दवा, कान का संक्रमण, चोट लगना, उच्च रक्तचाप या मधुमेह, ज्यादा शराब पीना या धूम्रपान करना ।

अगर कान बहता है तो:

– कान में पानी न जाने दें और किसी प्रकार का तरल पदार्थ न डालें।

– मवाद को साफ और नरम कपड़े से साफ करें।

– मवाद में बदबू होना या खून आना गंभीर रोग के लक्षण हो सकते हैं।

– कान से मवाद आते रहने से, बहरापन हो सकता है।

– तुरन्त स्वास्थ्य केन्द्र मे जाँच करायें।

 

 

गैर संचारी रोग कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. आरपी सिंह ने बताया- बधिरों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीपीसीडी)  चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत नवजात से लेकर वृद्धों तक की श्रवन हानि की जल्दी से जल्दी पहचान करनी है। इसकी स्क्रीनिंग की सुविधा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) पर उपलब्ध है।  कार्यक्रम के अंतर्गत डॉक्टर, स्त्री रोग विशेषज्ञ, आशा एएनएम आंगनबाड़ी और स्कूल टीचर को ट्रेनिंग करायी गई है, ताकि नवजात और बच्चों की कानों (सुनने की शक्ति) की समस्या की पहचान और उसका समाधान जल्दी हो सके।

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