नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से 17 नवंबर को मुलाकात की, लेकिन तुरंत इस्तीफा नहीं सौंपा। इसके बजाय, उन्होंने स्पष्ट किया कि 19 नवंबर से विधानसभा भंग हो जाएगी और तब तक वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे।
राजनीतिक संदर्भ
बिहार चुनाव में एनडीए ने शानदार जीत हासिल की। जेडीयू को 85 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को 89 सीटें मिलीं। इससे भाजपा अब ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आ गई है। टिकट बंटवारे को लेकर नीतीश कुमार पहले से ही नाराज थे। चुनाव से पहले ही चर्चा चल रही थी कि भाजपा अपना अलग मुख्यमंत्री चुन सकती है, जो नीतीश को सत्ता से हटा दे।
इस्तीफा न सौंपने की ‘डर’ वाली वजह
नीतीश कुमार को यह डर है कि 19 नवंबर को विधायक दल की बैठक में भाजपा किसी अन्य नेता (जैसे सुशील कुमार मोदी या सम्राट चौधरी) के नाम पर मुहर लगा देगी और उन्हें साइडलाइन कर देगी। इसलिए, उन्होंने इस्तीफे को टाल दिया ताकि भाजपा को कोई ‘खेल’ खेलने का मौका न मिले। यह एक रणनीतिक कदम है, जिससे वे अपनी स्थिति मजबूत रख सकें और नई सरकार गठन में दबदबा बनाए रखें।








