नीतीश कुमार को विपक्ष ने ‘पलटूराम’ कहकर खूब निशाना बनाया था। वो लेबल जो उनकी बार-बार गठबंधन बदलने की आदत पर चिपक गया, लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में उन्हीं नीतीश ने सारे समीकरण उलट-पलट कर दिए।
पलटूराम का बैकग्राउंड
नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। कुल 20 साल से ज्यादा। लेकिन उनकी राजनीति में ‘पलटना’ मशहूर है।
विपक्ष (खासकर RJD और कांग्रेस) ने इन्हें ‘पलटूराम’ कहकर मजाक उड़ाया, लेकिन नीतीश ने इसे अपनी ताकत बना लिया। 74 साल की उम्र में उन्होंने चुनाव प्रचार में 181 रैलियां कीं, 1448 घंटे फील्ड पर बिताए, और हर बार कहा, “उ लोग कुछ नहीं किया, हमने किया।”
2025 चुनाव: उलटे समीकरण
बिहार चुनाव 6 अक्टूबर को घोषित हुए, और 14 नवंबर (आज) को रिजल्ट्स आ रहे हैं। एग्जिट पोल्स पहले ही NDA की झाड़ू बताते थे। 8 पोल में NDA को बहुमत (185+ सीटें) की भविष्यवाणी। अब ट्रेंड्स के मुताबिक –
NDA: 185 सीटों पर लीड (JD(U) अकेले 81 पर)।
विपक्ष ने सोचा था कि नीतीश की उम्र, स्वास्थ्य और ‘पलटू’ इमेज से NDA हार जाएगा। लेकिन जातिगत समीकरण (EBC, महादलित, कुर्मी वोट), विकास के दावे (सुशासन बाबू की छवि), और BJP का साथ ने सब उलट दिया। एंटी-इनकंबेंसी के बावजूद, नीतीश ने इसे ‘मेक ऑर ब्रेक’ मोमेंट बना लिया।
विपक्षी: “पलटूराम फिर कूद सकता है।” लेकिन ज्यादातर मान रहे हैं कि अब वो नहीं पलटेंगे—सम्मानजनक रिटायरमेंट चाहेंगे।
समर्थक: “सुशासन बाबू की जीत, पलटूराम नहीं।”
गठबंधन लीडिंग सीटें (ट्रेंड्स )मुख्य फैक्टर NDA (नीतीश-BJP)185EBC/महादलित वोट, विकास एजेंडा महागठबंधन (RJD-कांग्रेस)~80जाति एकीकरण फेल।








