Mulayam Pariwar : क्या शिवपाल यादव के खिलाफ भी मुलायम सिंह यादव ने बेटे के लिए चला था चरखा दांव ?

क्या शिवपाल यादव के खिलाफ भी मुलायम सिंह यादव ने बेटे के लिए चला था चरखा दांव, क्यों होती है चर्चा
मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश से ही खफा नजरआए, लेकिन जब चुनाव आयोग में पार्टी पर दावेदारी के लिए पत्र लिकने की बात आई तो पीछे हट गये। यही नहीं वह पार्टी में एकता की बातें करने लगे। मुलायम सिंह यादव का पहलवानी में इतर सियासत में भी चरखा दांव मशहूर रहा है एक समय में सोनिया गांधी को पीएम बनने से रोकने और अजित सिंह को सीएम न बनने देने वाले मुलायम सिंह ने अपने परिवार की जंग में भी ऐसा ही दांव चला था। ऐसा राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं। दरअसल 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी में आपसी कलह देखने को मिली थी। इसमें शुरुआती दौर में तो मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश से ही खफा नजर आए लेकिन जब चुनाव आयोग में पार्टी पर दावेदारी के लिए पत्र लिखने की बात आई तो वह पीछे हट गये। यही नहीं वह पार्टी में एकता की बातें करने लगे और अंत में अखिलेश यादव ही सपा के सर्वेसवा हो गये और शिवपाल यादव को अपनी अलग पार्टी बनानी पड़ी।

सपा और यूपी की राजनीति को समझने वाले जानकार मानते हैं कि शायद इसके पीछे मुलायम सिंह यादव का ही दांव था कि बेटे अखिलेश यादव के आगे के सारे कील-कांटे हटा दिये जाएं। दरअसल अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच 2015 में अदावत शुरू हो गई थी, जब शिवपाल ने भतीजे के तीन करीबियों को पार्टी से बाहर कर दिया था। इन लोगों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। इस पर अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव से दूरी बना ली और नाराजगी का खुला इजहार किया। लेकिन यह जंग तब सड़कों पर आई, जब शिवपाल ने मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के सपा में विलय का ऐलान किया।

शिवपाल को जब अखिलेश ने कैबिनेट से ही किया था बाहर


अखिलेश यादव ने इसके जवाब में शिवपाल के करीबी बलराम सिंह यादव को मंत्री परिषद से बाहर कर दिया था। इसके बाद शिवपाल और अखिलेश के बीच खुलकर बयानबाजी शुरू हो गई थी। आखिर यह टकराव तब तेज हुआ जब अखिलेश यादव ने शिवपाल और गायत्री प्रजापति को ही कैबिनेट से बाहर कर दिया। फिर मुलायम सिंह यादव ने दखल दिया और शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद समझौता हुआ तो शिवपाल कैबिनेट में लौटे, लेकिन मंत्रालय कमजोर मिला। अंत में 1 जनवरी 2017 को पार्टी कार्यकारिणी का स्पेशल सेशन बुलाकर अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गय। मुख्तार की पार्टी के विलय पर अखिलेश यादव ने कई बार दोहराया कि सपा उन लोगों का समर्थन नहीं करेगी, जिनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हैं। इसके बाद पार्टी के सम्मेलन में भी टकराव हुआ और अंत में अखिलेश यादव गुट की कार्यकारिणी बैठक में उन्हें ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनवा दिया। तब मुलायम सिंह यादव के भी अपमान की चर्चाएं छिड़ीं, लेकिन अंत में वह बेटे से राजी हो गये लेकिन चाचा और भतीजे के बीच दूरी बन गई। वह दूरी आज भी कायम है और शिवपाल यादव अपनी अलग पार्टी के साथ नेपथ्य में दिखते हैं जबकि मुलायम सिंह की बनाई सपा के उनके बेटे ही सर्वेसवा हैं।

क्या होती है शिवपाल पर चरखा दांव चलाने की चर्चा

मुलायम सिंह यादव के बेटे के लिए चरखा दांव चलने की चर्चाएं इसलिए होती हैं क्योंकि अखिलेश यादव ने अध्यक्ष बनने के बाद साइकिल सिंबल के लिए चुनाव आयोग में दावा ठोका था तब मुलायम सिंह दिल्ली चले गये और कयास लगे कि वह पार्टी पर दावा ठोक सकते हैं। लेकिन वह नहीं गये और अमर सिंह एवं शिवपाल जैसे करीबी नेताओं को निराश किया। उन्होंने सपा कार्यालय पहुंचकर कहा कि पार्टी को एक रखना है। शायद उनके इस बयान का ही असर था कि आजम खान, राजेद्र चौधरी, राम गोविंद चौधरी समेत तमाम सीनियर नेता अखिलेश यादव के साथ हो लिये थे।

 

  • Related Posts

    सोनिया गांधी की किताब को अब ये कंपनी करेगी पब्लिश, विवाद के बीच ऐलान
    • TN15TN15
    • September 4, 2026

    कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की किताब Belonging: A…

    Continue reading
    झारखंड, दिल्ली-महाराष्ट्र में SIR पर बवाल, विपक्ष बोला- ‘BJP को जिताने के लिए…’
    • TN15TN15
    • September 2, 2026

    चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    वैज्ञानिक के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महक रही बिजनौर मिट्टी की सौंधी खुशबू!

    वैज्ञानिक के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महक रही बिजनौर मिट्टी की सौंधी खुशबू!

    Municipal Council Elections : भिवाड़ी में नरेश पटेल की रैली, उमड़ी भीड़ 

    Municipal Council Elections : भिवाड़ी में नरेश पटेल की रैली, उमड़ी भीड़ 

    रूस में रह रहे भारतीयों पर कहर, गिरफ्तार कर जबरदस्ती भर्ती कराया जा रहा है सेना में!

    रूस में रह रहे भारतीयों पर कहर, गिरफ्तार कर जबरदस्ती भर्ती कराया जा रहा है सेना में!

    सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की मुख्यमंत्री नैतिक जिम्मेदारी लें और पदत्याग करें अन्यथा राष्ट्रपति उन्हें बर्खास्त करें : रघु ठाकुर

    सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की मुख्यमंत्री  नैतिक जिम्मेदारी लें और पदत्याग करें अन्यथा राष्ट्रपति उन्हें बर्खास्त करें : रघु ठाकुर

    The Bloody Building : छात्रों के लिए काल बन रहे दिल्ली के जर्जर मकान, एक साल में 6 हादसे और 35 मौत 

    The Bloody Building : छात्रों के लिए काल बन रहे दिल्ली के जर्जर मकान, एक साल में 6 हादसे और 35 मौत 

    क्या भारत में पुलिस किसी व्यक्ति को नजरबंद (House Arrest) कर सकती है?

    क्या भारत में पुलिस किसी व्यक्ति को नजरबंद (House Arrest) कर सकती है?