नेपाल में बसे दो लाख से ज्यादा मधेशी की चुनाव में अहम भूमिका

अभिजीत पाण्डेय
पटना । रोजगार और कारोबार के लिए नेपाल में अस्थायी तौर पर बसे दो-ढाई लाख मतदाता इस बार भी लोकसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे।बिहार से नेपाल की लगी सैंकड़ों किलोमीटर की सीमा में आधा दर्जन से अधिक लोकसभा की सीट ऐसी है जिस पर नेपाल में रह रहे बिहार प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे तो नेपाल में मधेशियों की आबादी काफी अच्छी संख्या में है। लेकिन बड़ी संख्या में बिहारी ऐसे भी हैं जिन्हें नेपाल की नागरिकता नहीं मिली है।

ऐसे लोग चुनाव के समय बिहार में अपने घर आकर वोट डालते हैं। ढाई लाख से अधिक बिहारी नेपाल में रोजगार करते हैं।सबसे अधिक मोतिहारी और सीतामढ़ी के लोग नेपाल में रहते हैं. एक अनुमान के अनुसार 50000 से अधिक आबादी दोनों लोकसभा सीट के लोग नेपाल में रहते हैं। इसी तरह 20000 से 25000 की आबादी प्रत्येक लोकसभा सीट पर नेपाल में रह रहे।

बिहारी अपने वोट से प्रभावित करते हैं, हालांकि इस पर कभी भी अध्ययन नहीं हुआ।बिहार के अलावे उत्तर प्रदेश का भी 7 जिला 570 किलोमीटर की लंबाई में नेपाल से सटा है। कई लोकसभा सीट नेपाल सीमा से लगी है। वहां भी हजारों लोग चुनाव देने पहुंचते हैं लेकिन सबसे ज्यादा बिहार के सीतामढ़ी, मोतिहारी, शिवहर, वाल्मीकि नगर और मधुबनी जैसे लोकसभा सीटों पर नेपाल में रह रहे बिहारी असर डालते हैं। नेपाल में रह रहे बिहारी पर लोकसभा सीट से जुड़े हुए प्रत्याशियों और दलों की भी नजर रहती है।

बिहार-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगते हुए क्षेत्र मोतिहारी, झंझारपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, वाल्मीकि नगर, अररिया, बेतिया, किशनगंज और सुपौल के मतदान के लिए अपने घरों का रुख कर रहे हैं। लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने के लिए अपने देश पहुंचने के लिए उनके रिश्तेदार भी लगातार संपर्क में हैं , ताकि नियत तारीख से पहले पहुंच सकें। राजनीतिक दलों की भी निगाहें ऐसे मतदाताओं पर टिकी है।

राजनीतिक दल भी एक एक मत की कीमत को पहचानते हैं, इसलिए उन्हें भी इन मतदाताओं के पहुंचने का इंतजार है। समर्थक भी ऐसे मतदाताओं के साथ संपर्क में हैं , ताकि मतदान में पीछे नहीं रहें। मतदान से 72 घंटे पहले भारत-नेपाल सीमा को सील कर दिया जाता है। मताधिकार का प्रयोग करने के लिए भारतीय मूल के कामगार और कारोबारी भी पहुंचने लगे हैं।

भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का संबंध रहा है। इसलिए सीमा पर किसी तरह की रोक टोक नहीं है , लेकिन चुनाव के समय 72 घंटे पहले बिहार से लगे नेपाल सीमा को सील कर दिया जाता है। जो बिहारी वहां वे अगर 72 घंटे पहले भारत सीमा में आ गए तो ठीक है।नहीं तो वे वोटिंग से वंचित हो जाते हैं। जानकार कहते हैं कि नेपाल में बिहारी की आबादी ढाई लाख से अधिक है और इसमें से बड़ी संख्या में वोट डालने पहुंचते हैं।

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