35 साल बाद जल्दी आया मानसून, मुंबई की 96 इमारतों पर खतरा!

मानसून का जल्दी आगमन:

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मुंबई में मानसून 2025 में 27-29 मई के बीच पहुँच गया, जो सामान्य तारीख 10 जून से लगभग दो सप्ताह पहले है। यह 35 वर्षों में पहली बार है कि मानसून इतनी जल्दी आया। इस जल्दी आगमन का कारण एल नीनो का कमजोर होना और अनुकूल हवाओं व दबाव की स्थिति है। IMD ने 105% सामान्य से अधिक बारिश की भविष्यवाणी की है, जो जल संसाधनों और कृषि के लिए लाभकारी है, लेकिन बुनियादी ढांचे के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

96 इमारतें खतरे में:

 

महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ने दक्षिण और मध्य मुंबई में 96 पुरानी इमारतों को “अत्यंत खतरनाक” घोषित किया है, जिनमें 3,162 से अधिक लोग रहते हैं। ये इमारतें बोरा बाजार, मोहम्मद अली रोड, फॉल्कलैंड रोड, मझगांव, गिरगांव, खेतवाड़ी, और दादर-माटुंगा जैसे क्षेत्रों में हैं। MHADA ने इन इमारतों के निवासियों को तत्काल खाली करने और सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होने के लिए नोटिस जारी किया है। दो इमारतें 2024 की सूची से दोबारा शामिल हैं।

3. BMC की तैयारियां:

 

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने मॉनसून से निपटने के लिए व्यापक तैयारियाँ की हैं:

जर्जर इमारतें: BMC ने 134 इमारतों को C1 श्रेणी (रहने के लिए अनुपयुक्त) में चिह्नित किया है, जिनमें से 57 खाली हो चुकी हैं और 77 में लोग अभी भी रह रहे हैं। 56 इमारतें कानूनी प्रक्रियाओं में हैं। 2023 में 387 और 2024 में 188 इमारतों की तुलना में यह संख्या कम है।
सड़कें और जल निकासी: BMC ने बाढ़ रोकने के लिए नालों की सफाई और डिसिल्टिंग की है। 75% प्रमुख नालों और 80% छोटे नालों की सफाई मई तक पूरी हो चुकी है।
सड़क निर्माण: सभी सड़क कार्य 31 मई तक पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं। अधूरी सड़कों को मास्टिक डामर से पूरा किया जाएगा ताकि गड्ढों से बचा जा सके।
आपदा प्रबंधन: BMC ने 24×7 आपदा नियंत्रण कक्ष सक्रिय किया है, जो बारिश, जलभराव, और आपात स्थिति पर नजर रखता है। उच्च ज्वार और भारी बारिश के दौरान आपातकालीन सहायता कार्य (ESF) सक्रिय किए जाते हैं।
हेल्पलाइन: महाराष्ट्र सरकार ने 24×7 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिसमें राज्य आपातकालीन केंद्र, जिला आपदा प्रबंधन, और रेलवे नियंत्रण कक्ष शामिल हैं।

 

चुनौतियाँ और सुझाव:

जल्दी मॉनसून और भारी बारिश के कारण जलभराव और यातायात बाधाएँ बढ़ सकती हैं।
कई निवासी स्थानांतरण का विरोध करते हैं, जिससे पुनर्वास चुनौतीपूर्ण है।
नागरिकों को वाहनों की जाँच, रेनकोट, और आपातकालीन तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए।

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