देशभक्ति दिखाने के लिए मोदी को अमेरिका नहीं जाना पड़ेगा, ट्रम्प ने भारतीय मूल के लोगों को मोदी के पास भेजने की कर दी है व्यवस्था 

चरण सिंह 

अब पीएम मोदी को भारतीय मूल के लोगों से मिलने के लिए अमेरिका नहीं जाना पड़ेगा। अमेरिका ने भारत में ही मोदी के मिलन की व्यवस्था कर दी है। वीजा के लिए 88 लाख रुपए जो कर दिए हैं। भारत की बात मैं इसलिए कर रहा हूं क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एच-1बी वीजा के नए आवेदनों के लिए जो सालाना 100000 डॉलर मतलब 88 लाख रुपए की फीस जो कर दी है। उससे 77 फीसदी भारतीय ही प्रभावित हो रहे हैं। जब 7 लाख रुपए से प्रति माह नए वीजा की फीस देनी पड़ेगी तो फिर कौन रहेगा अमेरिका में ? अमेरिका में कौन सी कंपनी रखेगी भारतीयों को ? पर साहेब को क्या ? डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रेट पीएम जो कह दिया है। अब तो जनता की चमड़ी भी उतर जाए तब भी साहेब पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। उनको व्यक्तिगत स्तर पर तो महान बता दिया है। कहीं और देश भी अमेरिका की तरह न करने लगें ?
दरअसल समझने की जरूरत यह है कि पीएम मोदी ने मुनाफा कराया पूंजीपतियों को फंसा दिया जनता को। पीएम मोदी ने बड़ी रणनीति के तहत शीर्षस्थ पूंजीपतियों को जबरदस्त मुनाफा कराया और जनता को बेवकूफ बनाया है। बेवकूफ भी ऐसा कि उस वर्ग के लिए ही सबसे बड़ी दिक्कत पैदा कर दी जो उनका सबसे बड़ा भक्त होने का दिखावा करता है। रूस से सस्ता तेल खरीद यूरोप को महंगा बेच मुनाफा कमाया मुकेश अम्बानी ने और खामियाजा भुगतना पड़ रही  है बेचारी जनता।
अमेरिका का यह मानना है कि भारत जो रूस से तेल खरीद रहा है, उस पैसे से रूस यूक्रेन से लड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यूक्रेन रूस युद्ध में भारत रूस की मदद कर रहा है। यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले भारत को रूस से तेल न खरीदने की चेतावनी दी और जब मोदी सरकार ने उनकी चेतावनी अनदेखी का दी तो  50 फीसदी टैरिफ लगा दिया। जिन कारोबारियों का सामान अमेरिका में बिकता था वे बेचारे बर्बाद हो गए। अब एक कदम आगे जाकर एच-1बी वीजा के नए आवेदनों के लिए जो सालाना 100000 डॉलर फीस कर दी है। यह सब भारत के लिए किया गया है, क्योंकि अमेरिका में नौकरी करने वाले 77 फीसद भारतीय हैं। इससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीयों को हथकड़ी और बेड़ियों में भेजा था। ट्रम्प लगातार भारत को अपमानित करता रहा और मोदी चुप्पी साधे रहे।
देश के मीडिया की तो बात ही मत करो। मोदी का प्रवक्ता बना हुआ है। ट्रम्प ने मोदी को महान पीएम बोल दिया और मीडिया है कि माहौल बनाने लगा कि जैसे मोदी ने ट्रम्प को झुका दिया है। थोड़ा बहुत टैरिफ कम कर देगा तो माहौल बनाने लगेगा कि मोदी ने ट्रंप को घुटने पर ला दिया है। समझने की जरूरत यह है कि ट्रम्प बिल्कुल मोदी को ऐसे अपमानित कर रहे हैं कि जैसे  किसी गरीब आदमी को सेठ जी कहकर अपमानित किया जाता है। किसी अनपढ़ आदमी को विद्वान कहकर अपमानित किया जाता है। मोदी हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प के द्वारा महान पीएम बोलने पर फूले नहीं समा रहे हैं।
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर को एक प्रोज़ेक्यूशन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें H-1B वीजा के नए आवेदनों के लिए सालाना 100,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) की फीस लगाई गई है। यह फीस पहले की तुलना में करीब 465 गुना ज्यादा है, क्योंकि पहले H-1B वीजा रजिस्ट्रेशन फीस सिर्फ 215 डॉलर (लगभग 18,000 रुपये) और फॉर्म फीस करीब 780 डॉलर (लगभग 65,000 रुपये) थी, जो कुल मिलाकर 1,000 डॉलर से भी कम बैठती थी।   भारतीय मीडिया में इसे “10 गुना से भी ज्यादा” कहा जा रहा है, जो संभवतः अतिशयोक्ति या अनुमानित आंकड़े पर आधारित है, लेकिन वास्तविक वृद्धि इससे कहीं ज्यादा है।
देखिए कैसे भारतीय मूल के लोग अमेरिका में मजबूर कर दिए जा रहे हैं। कंपनियों को प्रत्येक H-1B वर्कर के लिए सालाना 100,000 डॉलर देना होगा। यह टेक, फाइनेंस और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स को प्रभावित करेगा, जहां H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। मतलब ये कंपनियां भारतीय युवाओं को रखने से बचेंगी। अमेरिका के इस कदम से आईटी सेक्टर को बड़ा झटका लगाने वाला है। भारत H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी है (71% वीजा भारतीयों को मिलते हैं)। TCS, Infosys जैसी कंपनियां और Amazon, Google जैसी US फर्म्स पर असर पड़ेगा। अमेज़न के पास ही 10,000 से ज्यादा H-1B वर्कर्स हैं।  छोटी कंपनियां या स्टार्टअप्स अब भारतीय टैलेंट हायर करने से हिचकिचाएंगी।

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