पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट की कार्रवाही पूर्णतया अवैधानिक एवं संवैधानिक अधिकारों का हनन

पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट पर रोक लगाने हेतु महामहिम उत्तर प्रदेश को भेजा गया पत्रक – आईपीएफ

 

 

लखनऊ । आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट की तरफ से उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट पर रोक लगाने हेतु महामहिम उत्तर प्रदेश को एक पत्रक भेजा गया जिसमें कहा गया है कि जब कभी भी कोई जनसंगठन अथवा राजनीतिक पार्टी किसी मुद्दे को लेकर धरना देने अथवा प्रदर्शन करने का आवाहन करती है तो पुलिस उसके पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को घर पर हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर देती है। प्रायः कुछ पुलिस वाले उसके घर पर जा कर बैठ जाते हैं तथा उस व्यक्ति को घर से बाहर नहीं जाने देते। पुलिस का यह कार्य पूर्णतया अवैधानिक है तथा नागरिकों के संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीवन की सुरक्षा एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कानून द्वारा प्रक्रिया के बिना वंचित न किए जाने का निषेध करता है।

पुलिस द्वारा अकारण किसी नागरिक के घर अथवा गेट पर जा कर बैठ जाना न केवल उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बल्कि उसकी निजता के अधिकार का भी हनन है।

पत्र में आगे कहा गया है कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को, अन्य बातों के साथ-साथ— अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता; शांतिपूर्ण और निरस्त्र सभा की स्वतंत्रता; संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता; भारत में स्वतंत्र रूप से आवागमन का अधिकार; और पेशा या व्यवसाय करने का अधिकार प्रदान करता है।

इन अधिकारों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। संविधान कुछ परिस्थितियों में राज्य को उचित प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है। लेकिन ऐसे प्रतिबंध कानूनी आधार पर, उचित, आवश्यक और आनुपातिक होने चाहिए।

इसलिए यदि किसी व्यक्ति को शांतिपूर्ण सार्वजनिक सभा में जाने से रोकने के लिए उसके घर में रहने को मजबूर किया जाता है, तो यह अनुच्छेद 21 की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19 की स्वतंत्रताओं—दोनों को प्रभावित करता है।

उपरोक्त के अतिरिक्त यह भी उल्लेखनीय है कि पुलिस की ऐसी कार्रवाई नागरिकों को प्रदर्शन, सभा और राजनीतिक संगठन में भाग लेने से हतोत्साहित करती है। इससे भय का ऐसा वातावरण पैदा हो जाता है जिसमें लोग अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने से इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें पुलिस कार्रवाई का डर होता है। इसलिए यदि कानूनी नियंत्रण के बिना हाउस अरेस्ट का प्रयोग किया जाता है, तो वह असहमति को दबाने का एक साधन बन सकता है। यह स्थिति किसी भी तरह से लोकतंत्र तथा कानून के शासन के हित में नहीं है।

पुलिस द्वारा हाल में एक व्यक्ति को अकारण रोकने के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इसे पुलिस की गुंडागर्दी कहा है तथा पुलिस को किसी व्यक्ति को किसी प्रदर्शन में जाने से रोकने की कानूनी शक्ति दिखाने के लिए कहा है।

अतः आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट ने महामहिम उत्तर प्रदेश से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को पुलिस द्वारा नागरिकों/ राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट (नजरबंद) करने की अवैधानिक कार्रवाही को रोकने तथा नागरिकों को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं असहमति के अधिकार का प्रयोग करना संभव बनाने हेतु आदेशित करने का अनुरोध किया गया है।

एस आर दारापुरी,

राष्ट्रीय अध्यक्ष,

आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट ।

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