योगी के सामने कहीं नहीं टिकट पाएंगे मौर्य और पाठक!

चरण सिंह
भले ही उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पूरी तरह से मुखर हों पर ये दोनों ही योगी का कुछ बिगाड़ नहीं पाएंगे। इसका बड़ा कारण यह है कि एक ओर आरएसएस का हाथ योगी के सिर पर है वहीं योगी के पक्ष में न केवल बीजेपी के कार्यकर्ता बल्कि बड़े स्तर पर आम लोग भी खड़े हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस उत्तर प्रदेश के बल पर २०१४ और २०१९ के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। जिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बीजेपी में मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद का सबसे बड़ा दावेदार बताया जाता है। वह उत्तर प्रदेश और उस प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विरोधियों के निशाने पर है। बीजेपी में हर चुनाव का जीत का श्रेय पीएम मोदी को देने वाले उनके समर्थक उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की शिकस्त को लेकर योगी आदित्यनाथ को टारगेट कर रहे हैं। टारगेट भी और कोई नहीं बल्कि अमित शाह की लॉबी के नेता करते देेखे जा रहे हैं। एक ओर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ ब्रजेश पाठक ने योगी के खिलााफ मोर्चा खोल रखा है तो दूसरी ओर केशव प्रसाद मौर्य आग उगल रहे हैं। ब्रजेश पाठक ने योगी आदित्यनाथ के वीआईपी कल्चल के खिलाफ अभियान का ही विरोध कर दिया था। केशव प्रसाद मौर्य इनसे भी आगे निकल गये इन्होंने उत्तर प्रदेश की कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में योगी सरकार को पर निशाना साध दिया।

 


यह हाल तब है जब केशव प्रसाद मौर्य चुनाव हारने के बावजूद उप मुख्यमंत्री बन हैं। मतलब अमित शाह ने यह सब कराया है। वह योगी आदित्यनाथ की हिम्मत थी कि अपने दम पर उत्तर प्रदेश में २०१७ के बाद २०२२ में भी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई। जब उत्तर प्रदेश में टिकट बंटवारे में योगी आदित्यनाथ सहमति नहीं ली गई उन्हें मंचों से अपमानित किया गया। गृहमंत्री अमित शाह ने कानपुर में आसपास के लगभग १०० लोगों की मीटिंग की और उनको अपना मोबाइल नंबर दे दिया तथा उनको सारी जानकारी देने की बात कही गई। ऐसे में बेचारे योगी आदित्यनाथ क्या करते ? खुद उनके राजपूत समाज को अपमानित कर दिया गया। गुजरात राजकोट के प्रत्याशी और पूर्व केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने राजपूत शासकोंं को गद्दार बता दिया। ऐसे में योगी आदित्यनाथ कहां कहां से बीजेपी को संभालते। उत्तर प्रदेश में हारने का सबसे अधिक एहसास भी योगी आदित्यनाथ को है।
ऐसे में बार-बार उन्हें हार का जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करना। उनके गुस्से को बढ़ा सकता है। वैसे भी योगी आदित्यनाथ के सामने न तो ब्रजेश पाठक की हैसियत है और न ही केशव प्रसाद मौर्य की।  योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता देश में पीएम मोदी से कम नहीं हैं। योगी आदित्यनाथ की छवि एक मेहनती, जुझारू और ईमानदार नेता की है। भाजपा में एकमात्र नेता हैं जो पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दबाव में नहीं आये और न ही समझौते किये। योगी आदित्यनाथ का जुझारूपन ही उन्हें दूसरे नेताओं से अलग करता है। भले ही अमित शाह लॉबी योगी को घेरने में लगी हो पर योगी को छेड़ना इतना आसान नहीं है। योगी के सिर पर न केवल आरएसएस का हाथ है बल्कि योगी आदित्यनाथ के समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं के अलावा बड़े स्तर पर आम लोग भी हैं। यही वजह है कि अमित शाह और मोदी ने मध्य प्रदेश में शिवराज चौहान को मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया। राजस्थान में वसुंधरा राजे को दरकिनार कर दिया। छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को कोई खास तवज्जो नहीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दोनों नेताओं के बस की बात नहीं दिखाई दे रही है।

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