चरण सिंह
बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने समाजवादी पार्टी के लिए दिक्कतें खड़ी कर दी हैं। जिस तरह से रजवी ने बरेली में सपा के प्रतिनिधिमण्डल भेजने पर अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उससे सपा के खिलाफ गलत संदेश गया है। मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा है कि बरेली को संभल नहीं बनने देंगे। संभल में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा का जिक्र करते हुए मौलाना ने सपा के सांसदों और विधायकों के प्रतिनिधिमंडल को बरेली आने से रोके जाने का समर्थन किया है। समझने की जरूरत है कि जो मुस्लिम सपा का समर्थक माना जाता है उनके संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सपा का विरोध किया है।
दरअसल समाजवादी जिस आंदोलन के नाम से जानी जाती थी वह आंदोलन अब सपा में दूर दूर तक नहीं दिखाई देता है। सपा मुखिया अखिलेश यादव का दिमाग जाति और धर्म के नाम पर वोट बैंक बनाने पर फोकस रहता है। चाहे रामजी लाल सुमन से राणा सांगा को गद्दार कहलवाना हो या फिर राजकुमार भाटी से मोहम्मद पैगम्बर को सबसे बड़ा महापुरष बुलाना हो। या फिर दूसरे बयान।
अधिकतर मामलों में अखिलेश यादव मुद्दों को भुनाने की प्रति अग्रसर दिखाई देते हैं। आजकल उन्होंने समाजवाद की बात करना छोड़ दिया है। पीडीए ही उनका भगवान है। वह बात दूसरी है कि किसी वर्ग के लिए वह कुछ करने को तैयार नहीं। जहां तक पार्टी में प्रतिनिधित्व की बात है। वह उन्होंने पहले से पार्टी में जो नेता थे। उन्हें ही पीडीए के आधार पर बांट दिया है।
पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के समय पार्टी विपक्ष में आंदोलन के नाम से जानी जाती थी अब पार्टी प्रतिनिधिमंडल भेजने के नाम से जानी जाती है। वह दूसरी है कि समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को घटनास्थल तक न पहुंचने दिया जाता हो। अब जब बरेली में आई लव मोहम्मद के नाम से बरेली में हुए बवाल के बाद अखिलेश यादव ने एक प्रतिनिधिमंडल बरेली भेजा। पर प्रतिनिधिमंडल को जाने ही नहीं दिया गया। यह बात अखिलेश यादव भी जानते हैं कि विवादित क्षेत्र में उनका प्रतिनिधिमंडल नहीं पहुंच पाएगा पर माहौल बनाने के लिए वह प्रतिनिधिमंडल भेजते जरूर हैं।
उत्तर प्रदेश में सपा की स्थिति क्या होने वाली है कि मौलाना ने अखिलेश यादव पर चिंगारी लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सपा बरेली को संभल जैसा बनाने की साजिश रच रही है।यह घटना बरेली में हाल के हिंसक प्रदर्शनों से जुड़ी है, जहां कुछ मुद्दों पर तनाव बढ़ा था।







