मनिका बत्रा ने नेशनल कोच पर लगाए थे मैच फिक्सिंग के आरोप, अब दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- महासंघ से उठा विश्वास

मनिका बत्रा ने कहा था, ‘राष्ट्रीय कोच ने मार्च 2021 में दोहा में हुए ओलंपिक क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में मुझ पर अपनी प्रशिक्षु के खिलाफ मैच गंवाने का दबाव बनाया था, ताकि उनकी प्रशिक्षु ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर सके। मतलब मुझसे मैच फिक्सिंग के लिए कहा गया था।

द न्यूज 15 

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा के राष्ट्रीय कोच सौम्यदीप राय पर लगाए मैच फिक्सिंग के आरोपों को सही पाया है। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार यानी 11 फरवरी 2022 को टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीटीएफआई) की कार्यकारी समिति को निलंबित कर दिया। साथ ही टीटीएफआई के संचालन की ‘खेदजनक स्थिति’ पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रशासक की नियुक्ति का आदेश दिया।
अब पदाधिकारियों के बजाय प्रशासक ही प्रबंधन का कार्य संभालेगा। अदालत ने साथ ही कहा कि खेल संस्था से उसका विश्वास उठ गया है। राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता और खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित मनिका बत्रा का आरोप था कि सौम्यदीप रॉय ने उन पर मैच फिक्स करने का दबाव डाला था।
उन्होंने कहा था, ‘राष्ट्रीय कोच ने मार्च 2021 में दोहा में हुए ओलंपिक क्वालिफायर में मुझ पर दबाव बनाया कि मैं उनकी प्रशिक्षु के खिलाफ मैच गंवा दूं, ताकि वह ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर पाए। संक्षेप में कहूं तो मुझसे मैच फिक्सिंग के लिए कहा गया था।’ इन आरोपों के बाद मनिका बत्रा को 2021 एशियाई टेबल टेनिस चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में नहीं चुना गया था। मनिका बत्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा कि मनिका के मैच फिक्सिंग के आरोपों की जांच के लिए गठित 3 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट से पता चलता है कि टीटीएफआई ‘अपने अधिकारियों के हितों का बचाव करता है’ और ‘खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के बजाय, उन्हें अपनी शर्तों पर चलाना चाहता है।’
न्यायाधीश ने कहा कि यह देश अपने खिलाड़ियों पर गर्व करता है। जो लोग यह नहीं जानते हैं कि खिलाड़ियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है उन्हें ‘बाहर होना चाहिए।’ प्रशासक का नाम उनकी नियुक्ति से संबंधित अन्य प्रासंगिक विवरणों के साथ अदालत के आदेश में दिया जाएगा। रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि टीटीएफआई (TTFI) का आचरण ‘प्रथमदृष्टया दोषपूर्ण नजर आता है।’ हितों के स्पष्ट टकराव के बावजूद राष्ट्रीय कोच की नियुक्ति की गई थी।
न्यायमूर्ति पल्ली ने कहा, ‘जांच होनी चाहिए। आप हितों के टकराव में कोच की नियुक्ति कर रहे हैं। आपके कोच एक निजी अकादमी चला रहे हैं। यह क्या हो रहा है? आपके पास एक राष्ट्रीय कोच है जो अपने नाम पर एक अकादमी चला रहा है और उसे एक मैच हारने के लिए कह रहा है।’ उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में सुधार आवश्यक है।
न्यायाधीश ने कहा, ‘रिपोर्ट खेदजनक स्थिति का खुलासा करती है। अदालत ने प्रतिवादी नंबर एक (टीटीएफआई) और प्रतिवादी नंबर तीन (राष्ट्रीय कोच) के काम करने के तरीके को लेकर समिति द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों पर गौर किया है।’ केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि यदि अदालत जरूरत पड़ने पर आगे की जांच के लिए स्वतंत्र समिति नियुक्त करती है तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
अदालत ने कहा कि अभी वह टीटीएफआई के संचालन के लिए केवल प्रशासक की नियुक्ति करेगी। अदालत ने इसके साथ ही आगे किसी भी तरह की जांच के संबंध में आदेश टाल दिया। न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘इन लोगों को बाहर होना चाहिए। ये लोग यह नहीं समझते हैं कि खिलाड़ियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है, उन्हें कैसा सम्मान मिलना चाहिए। ये लोग (खिलाड़ी) देश की शान हैं। इन लोगों (टीटीएफआई अधिकारियों) को निलंबित किया जाना चाहिए।’
उन्होंने कहा, ‘वर्तमान परिस्थितियों में अदालत के पास प्रशासक नियुक्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। प्रतिवादी नंबर एक की कार्यकारी समिति को अब कोई भी फैसला लेना या प्रशासक के कामकाज में हस्तक्षेप करने की मंजूरी नहीं दी जाएगी।’ अदालत ने इसके साथ ही अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभी कई टूर्नामेंट्स का आयोजन होना है, इसलिए उम्मीद है कि वर्तमान प्रबंधन प्रशासक को हर तरह से मदद करेगा।
न्यायमूर्ति पल्ली ने कहा, ‘महासंघ से अदालत का विश्वास हिल गया है। उसे इस तरह से काम नहीं करना चाहिए।’ अदालत ने याचिकाकर्ता के अलावा टीटीएफआई और अन्य पक्षों को तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करने की स्वतंत्रता दी और मामले को आगे की सुनवाई के लिये 13 अप्रैल को सूचीबद्ध किया। टीटीएफआई की तरफ से उपस्थित वरिष्ठ वकील अनुपम लाल दास ने प्रशासक नियुक्त करने का विरोध किया।
पिछले साल नवंबर में अदालत ने मनिका बत्रा के राष्ट्रीय कोच पर लगाए गए मैच फिक्सिंग के प्रयासों के आरोपों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। मनिका ने अपनी याचिका में दावा किया था कि टीटीएफआई अपनी चयन प्रक्रिया गैर पारदर्शी तरीके से चला रहा है तथा उनके जैसे कुछ खिलाड़ियों को निशाना बना रहा है।

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