दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार ब्लास्ट के मामले में NIA की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। आतंकी जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश के फोन से ड्रोन को हथियार में बदलने और रॉकेट हमलों की साजिश से जुड़े सबूत मिले हैं। दानिश को जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया गया था, और वह सामान्य ड्रोनों को घातक हथियारों में बदलने का विशेषज्ञ था।
मुख्य तथ्य
ड्रोन हमले की साजिश: आतंकी मॉड्यूल हमास की तर्ज पर बारूद से लदे ड्रोनों से ताबड़तोड़ हमले की योजना बना रहा था। दानिश नेटवर्क के अन्य सदस्यों को ड्रोन को रॉकेट में बदलने की ट्रेनिंग भी दे रहा था। लंबी दूरी के हथियार वाले ड्रोनों की खेप भारत लाने की तैयारी भी चल रही थी।
दानिश की भूमिका: वह तकनीकी सहायता प्रदान करने वाला मुख्य व्यक्ति था। उसके फोन से ड्रोन मॉडिफिकेशन, हथियार निर्माण और आतंकी डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने के सबूत बरामद हुए।
अन्य आरोपी: उमर मुहम्मद (मुख्य आरोपी) ने आत्मघाती हमलावरों को तैयार करने की कोशिश की थी। आमिर कार और हथियार उपलब्ध करा रहा था। यह मॉड्यूल अल फलाह यूनिवर्सिटी और मदरसों से जुड़ा था।
अन्य आरोपी: उमर मुहम्मद (मुख्य आरोपी) ने आत्मघाती हमलावरों को तैयार करने की कोशिश की थी। आमिर कार और हथियार उपलब्ध करा रहा था। यह मॉड्यूल अल फलाह यूनिवर्सिटी और मदरसों से जुड़ा था।
NIA की कार्रवाई: गिरफ्तारियों के बाद फरीदाबाद और कश्मीर में छापेमारी हुई। यह ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का हिस्सा था, जो जूता बम और अन्य विस्फोटकों का भी इस्तेमाल प्लान कर रहा था।








