नई दिल्ली / नोएडा । केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के मंच एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आज जंतर-मंतर, नई दिल्ली में मजदूर-किसान संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्र सरकार की कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए मजदूरों और किसानों के ज्वलंत मुद्दों व समस्याओं पर व्यापक चर्चा की गई तथा देशव्यापी आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया गया।

मजदूर-किसान संसद को संबोधित करते हुए सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड सुदीप दत्ता ने केंद्र की मोदी सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाली हैं, जबकि मजदूरों और किसानों के अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने देश के मजदूरों और किसानों की समस्याओं को उठाते हुए देशभर में व्यापक और मजबूत आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया।
मजदूर-किसान संसद को विभिन्न मजदूर और किसान संगठनों के राष्ट्रीय नेताओं ने भी संबोधित किया और मजदूर-किसान एकता को मजबूत करते हुए संघर्ष को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम में गौतम बुध नगर से सीटू नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा, रामस्वारथ, जनवादी महिला समिति की नेता रेखा चौहान, शीला पांडे, गुड़िया देवी, सरोज देवी तथा किसान सभा के नेता डॉ. रुपेश वर्मा, अजय पाल भाटी, संदीप भाटी और अजब सिंह भाटी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
सीटू जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा ने बताया कि मजदूर-किसान संसद में व्यापक विचार-विमर्श के बाद आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की गई। इसके तहत 23 मार्च 2026 को शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
साथ ही 1 अप्रैल 2026 को मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने सहित अन्य मांगों को लेकर देशव्यापी काला दिवस मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में देश के सभी राज्यों में महापंचायतों का आयोजन कर मजदूरों और किसानों को उनकी मांगों के समर्थन में संगठित किया जाएगा और बड़े आंदोलन के लिए तैयार किया जाएगा।








