कोसी का रौद्र रूप, सभी 56 फाटक खुले

 बिहार-झारखंड के लाखों लोग दहशत में, 1968 के बाद सबसे अधिक जलस्तर

दीपक कुमार तिवारी

पटना। नेपाल में मूसलाधार बारिश के कारण कोसी नदी का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। 1968 के बाद पहली बार कोसी बराज के सभी 56 फाटक खोल दिए गए हैं, जिससे 6,81,639 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। नेपाल से मिले त्राहिमाम संदेश के बाद बिहार और झारखंड के साहेबगंज जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी जारी किया है। प्रशासन की ओर से दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र और उत्तर बिहार में हो रही भारी बारिश के चलते राज्य में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार शाम कोसी नदी में 6.8 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की आशंका है। पानी की यह मात्रा पिछले 56 सालों में सबसे अधिक होगी।
वहीं, गंडक नदी में आज 31 वर्ष बाद छह लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा सकता है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने अगले 48 घंटों का अलर्ट जारी किया है।
कोसी नदी में रिकॉर्ड डिस्चार्ज की आशंका को देखते हुए सुपौल जिला प्रशासन ने तटबंधों के अंदर और उसके आस-पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। इधर, भीमनगर कोसी बराज के सभी 56 फाटक खोल दिए गए हैं।
सहरसा जिले में कोसी के जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुये जिले के सिमरी बख्तियारपुर, नवहट्टा, महिषी और सलखुआ प्रखंडों के तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों से सतर्क रहने और आवश्यकतानुसार ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गयी है।
नेपाल के देवाघाट से गंडक नदी में आज सुबह पांच लाख तिरानवे हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गोपालगंज और सारण जिले में भी गंडक नदी के सभी तटबंधों पर सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। तटवर्ती क्षेत्र में रह रहे लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गयी है। इस बीच, केन्द्रीय मंत्री राजभूषण चौधरी निषाद ने गोपालगंज जिले में गंडक नदी के बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए अधिकारियों को तटबंधों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
कोसी नदी के उफान पर रहने के कारण गंगा नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी की संभावना है। इसे लेकर झारखंड में साहेबगंज जिला प्रशासन की ओर से गंगा नदी के तट के आसपास रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। इसके लिए प्रशासन की ओर से बोट भी उपलब्ध कराया गया है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के रहने और खाने-पीने की भी व्यवस्था की जा रही है।

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