इसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में वकील और सामाजिक कार्यकर्ता एकत्रित हो गए और डॉ. रुपेश वर्मा की नजरबंदी हटाने की मांग करने लगे। जन दबाव के चलते पुलिस को तत्काल उनकी नजरबंदी हटानी पड़ी तथा अजब सिंह भाटी को भी रिहा कर उनके घर भेज दिया गया। हालांकि कई अन्य नेताओं को अब भी नजरबंद रखा गया है।
भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर खलीफा को भी कई दिनों से नजरबंद किया गया है। सीटू के जिला अध्यक्ष मुकेश राघव को घर में नजरबंद किया गया है तथा सीटू नेता मोहम्मद फिरोज को बीटा-2 थाने में हिरासत में लिया गया है। यह स्थिति पूरे जिले में पुलिसिया दमन और भय का माहौल पैदा कर रही है।
नजरबंदी की सूचना मिलते ही किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पर पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि मजदूरों का आंदोलन पूरी तरह जायज मांगों पर आधारित है, और सभी गिरफ्तार एवं नजरबंद नेताओं और मजदूरों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि नोएडा और एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। मजदूरों को मात्र ₹10,000–₹11,000 वेतन दिया जा रहा है, ओवरटाइम का भुगतान नहीं होता, साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलता, और ठेकेदारों द्वारा खुलेआम शोषण किया जा रहा है। महंगाई के इस दौर में मजदूरों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में केवल 2% वार्षिक वृद्धि की जा रही है, जबकि पहले यह वृद्धि 7% तक होती थी। दिल्ली में न्यूनतम वेतन ₹21,000 से अधिक है और हरियाणा में भी उत्तर प्रदेश से ज्यादा है, जबकि मजदूर संगठन लगातार ₹26,000 न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं।
किसान सभा के महासचिव संदीप भाटी ने कहा कि गरीब मजदूरों के साथ घोर अन्याय हो रहा है और संगठन उनकी रिहाई के लिए संघर्ष जारी रखेगा। जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि किसान सभा मजदूरों की गैरकानूनी गिरफ्तारी, नजरबंदी और दमन की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने मांग की कि सभी गिरफ्तार एवं नजरबंद मजदूरों और नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए
मजदूरों का न्यूनतम वेतन ₹26,000 किया जाए
ट्रेड यूनियनों के साथ तत्काल वार्ता शुरू की जाए
मजदूरों पर हो रहे दमन को तुरंत रोका जाए
यदि सरकार मजदूरों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने और दबाने का प्रयास करेगी, तो किसान सभा और मजदूर संगठन संयुक्त रूप से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।








