किसान सभा–किसान संघर्ष मोर्चा की 25 नवम्बर को कलेक्ट्रेट पर आयोजित होने वाली शांतिपूर्ण महापंचायत—जिसमें 10% प्लॉट, नए भूमि अधिग्रहण कानून के क्रियान्वयन तथा पुश्तैनी आबादियों के निस्तारण की मांग उठाई जानी है—को दबाने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध नगर पुलिस किसानों पर अनुचित दबाव बना रही है।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस रात के समय गांवों में जाकर किसानों को धमका रही है और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत ₹5,00,000 के मुचलके देने के नोटिस थमा रही है। यह कदम पूरी तरह से अनुचित, अनावश्यक, और नागरिक अधिकारों का दमन है।
“किसानों को डराने का प्रयास असफल होगा” — वीर सिंह नगर
किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नगर ने बताया कि बीती रात लगभग 2 बजे पुलिस सैकड़ों किसानों के घरों पर पहुंची, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल फैल गया। यह सब केवल इसलिए किया गया कि किसान अपनी वाजिब मांगें न उठा सकें।
“जिला पुलिस स्टेट बना दी गई है” — गैबरी मुखिया
जिला उपाध्यक्ष गैबरी मुखिया ने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने पूरे जिले को “पुलिस स्टेट” में बदल दिया है। किसान समस्याओं के समाधान को लेकर पुलिस व प्रशासन की ओर से केवल झूठे आश्वासन मिलते रहे, जबकि आज तक किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं हुआ।
शांतिपूर्ण आवाज उठाने पर किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
“हम किसी दबाव में आने वाले नहीं” — सुरेंद्र यादव
किसान सभा के नौजवान सचिव सुरेंद्र यादव ने कहा कि किसानों की पुश्तैनी आबादियों का अधिग्रहण हुआ है और 10% प्लॉट का वैधानिक हक छीना गया है।
उन्होंने कहा, “पुलिस को गलतफहमी हो गई है कि वह किसानों को दबा लेगी। किसान किसी भी दबाव में झुकने वाले नहीं। हम अपने हक की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ेंगे।”
“पूरा वकील समुदाय किसानों के साथ” — गुरप्रीत एडवोकेट
वरिष्ठ सचिव गुरप्रीत एडवोकेट ने कहा कि पुलिस द्वारा किसानों के बोलने के अधिकार पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कानून व्यवस्था का नाम लेकर किसानों की लोकतांत्रिक गतिविधियों को रोकना पूरी तरह अनुचित है।
“गैर-हिंसक किसान संगठनों पर झूठे मुकदमे” — डॉ. रुपेश वर्मा
किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि वर्ष 2023–24 में गौतम बुद्ध नगर में कार्यरत किसी भी किसान संगठन ने कभी कोई हिंसक आंदोलन नहीं किया, फिर भी पुलिस ने किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए ताकि वे
10% प्लॉट,
आबादियों के निस्तारण,
और भूमि अधिग्रहण कानून
की न्यायसंगत मांगें न उठा सकें।
“पुलिस की तानाशाही चरम पर” — सतीश यादव
किसान सभा के सचिव सतीश यादव ने बताया कि गरीब किसानों को रात 2 बजे जगाकर ₹5 लाख के मुचलके नोटिस देना पुलिस की तानाशाही का चरम है।
नोटिस में यह आरोप लगाया गया है कि किसान NH-91 जाम कर सकते हैं—जबकि किसान संघर्ष मोर्चा पहले ही घोषणा कर चुका है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।
किसानों में भारी आक्रोश
पटवारी गाँव में आज हुई पंचायत में किसानों ने पुलिस की इस कार्रवाई पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया और 25 नवंबर की महापंचायत को पूरी मजबूती से सफल बनाने का संकल्प लिया।
सतपाल हरि ने कहा, “भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी बात कहने का हक देता है। प्राधिकरण और पुलिस मिलकर किसानों को दबाने में लगी है, लेकिन किसान पीछे हटने वाले नहीं।”
नोटिस का जवाब दाखिल
किसानों ने BNSS धारा 130 के नोटिस का लिखित जवाब संबंधित ACP न्यायालय में दाखिल कर दिया है।
किसान सभा की मांगें
किसान सभा ने उत्तर प्रदेश सरकार से माँग की है कि:
1. पुलिस की तानाशाही रोकने के लिए तुरंत निर्देश दिए जाएँ।
2. किसानों के संवैधानिक अधिकारों—अभिव्यक्ति, शांतिपूर्ण सभा, विरोध की रक्षा की जाए।
3. 10% प्लॉट, भूमि अधिग्रहण और आबादियों के निस्तारण से जुड़े किसानों के मुद्दों पर
प्राधिकरण को तुरंत समाधान के निर्देश दिए जाएँ।
आज की इस बैठक में
सुरेश यादव, विजय यादव, भिखारी नगर, बुधपाल यादव, अशोक भाटी, दुष्यंत सेन, सुशील यादव, भगत सिंह चेची आदि उपस्थित रहे।








