आरक्षण के मुद्दे पर जाटों की सहानुभूति बटोरेंगे केजरीवाल! 

चरण सिंह

आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में जाट आरक्षण को मुद्दा बना लिया है। केजरीवाल ने इस दांव से एक तीर से कई निशाने साधे हैं। एक तो उन्होंने नई दिल्ली से उनके सामने बीजेपी से चुनाव लड़ रहे प्रवेश वर्मा पर कटाक्ष किया है, दूसरे से दिल्ली के जाटों की सहानुभूति बटोरने की कोशिश की है, तीसरे पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को कटघरे में खड़ा किया है। दरअसल अरविंद केजरीवाल हैं कि वह समीकरण अपने पक्ष में करने के लिए मुद्दा निकाल ही लेते हैं। अब जब बीजेपी के साथ ही उन्हें कांग्रेस भी घेर ले रही है तो उन्होंने फ्री योजनाओं के साथ ही जाट आरक्षण का मुद्दा भी छेड़ दिया है। अरविन्द केजरीवाल ने जाट आरक्षण को लेकर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सवालों की झड़ी लगा दी है। उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी प्रवेश वर्मा भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अरविन्द केजरीवाल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह केंद्र सरकार की व्यवस्था है कि राजस्थान के जाट को दिल्ली में आरक्षण मिलेगा पर दिल्ली के जाट को नहीं। उन्होंने बीजेपी से पूछा है कि ऐसा क्यों है ?  केजरीवाल ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा है। उनका कहना था कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बीते 10 साल में चार बार जाट नेताओं से झूठ बोला है। वादा करके जाटों को धोखा दिया है। अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि 26 मार्च 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली जाट समाज के प्रतिनिधियों को अपने घर बुलाकर यह वादा किया था कि केंद्र की ओबीसी लिस्ट में दिल्ली के जाट समाज को शामिल किया जाएगा। 8 फरवरी 2017 को यूपी चुनाव से पहले अमित शाह ने चौधरी वीरेंद्र सिंह के घर पर दिल्ली और देश के जाट नेताओं से वादा किया कि स्टेट लिस्ट में ओबीसी जातियों को केंद्र की लिस्ट में जोड़ा जाएगा। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली में प्रवेश वर्मा के आवास पर अमित शाह ने जाट नेताओं से मुलाकात की और जाट समाज को केंद्र के ओबीसी लिस्ट में शामिल करने का वादा दोहराया। 2022 में दिल्ली में अमित शाह ने सैकड़ों जाट नेताओं को बुलाया, मुलाकात की और फिर वादा दोहराया।
दरअसल दिल्ली में जाट बहुल सीटों पर अभी आम आदमी पार्टी का दबदबा है। महरौली, मुंडका, रिठाला, नांगलोई, मटियाला, नजफगढ़ और बिजवासन जाट बहुल सीटें हैं और ये सभी सीटें आम आदमी पार्टी के पास हैं। लेकिन इन चुनाव में इन सीटों को बचाने की चुनौती आम आदमी पार्टी के पास है। इसके अलावा भी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में जाट वोटर बहुत प्रभावशाली हैं। दिल्ली में लगभग 10 प्रतिशत जाट वोट हैं। दिल्ली के 364 गांवों में से 225 गांवों में जाटों का दबदबा है।  ऐसे में जब जाट बहुत सीटों पर अरविन्द केजरीवाल के लिए इस बार जीतना बड़ी चुनौती है तो उन्होंने जाटों की सहानुभूति बटोरने के लिए जाट आरक्षण का मुद्दा छेड़ दिया है।

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