बचे हुए चाय पत्ती और बिस्कुट घर ले जाने पर निकाल दिया था नौकरी से
नौकरी बहाल करने और बकाया 50 फीसदी वेतन देने का भी दिया आदेश
वह तो भला हो झारखंड हाई कोर्ट का जो बेचारे चपरासी की परिस्थिति को समझा। नहीं तो वह एक चोर बनकर खुद अपनी नजरों में ही गिर गया था। इस बेचारे का जुर्म बस इतना था कि अधिकारी के नाश्ते के बाद बची हुई चाय पत्ती और बिस्कुट घर ले गया था। अधिकारी ने इसे नौकरी से ही निकाल दिया था। झारखंड हाई कोर्ट ने इस चपरासी को न्याय दिया है।
दरअसल झारखंड हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 साल से सेवा दे रहे संविदाकर्मी (चपरासी) रंजीत कुमार हिमांशु को बहाल करने का आदेश दिया है। उन्हें कार्यालय की मीटिंग में बची हुई चायपत्ती और बिस्कुट घर ले जाने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था। मामले से जुड़े मुख्य बिंदु:याचिकाकर्ता: रंजीत कुमार हिमांशु (जिला ग्रामीण विकास अभिकरण – DRDA, बोकारो में चपरासी) बर्खास्तगी का कारण: अधिकारियों की बैठक के बाद बची हुई चाय-पत्ती और बिस्कुट को अपने बच्चों के लिए घर ले जाना。 अधिकारियों ने इसे गंभीर भ्रष्टाचार माना था।
न्यायालय की टिप्पणी: झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस सजा को अत्यधिक कठोर, अनुचित और असंवेदनशील बताया。 कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन भी करार दिया。अदालत का निर्देश: कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी को जल्द से जल्द सेवा में वापस लिया जाए और उनके 17 वर्षों के स्वच्छ सेवा रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए 50% बकाया वेतन का भुगतान भी किया जाए।
दरअसल झारखंड हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 साल तक सेवा देने वाले चपरासी को बहाल करने का आदेश दिया है। मामला उस वक्त का है जब अधिकारी मीटिंग के बाद बची चाय-पत्ती और बिस्कुट घर ले जाने पर इस चपरासी को नौकरी से निकाल दिया गया था। अदालत ने सुनवाई में पाया कि चपरासी को दिया गया कारण बताओ नोटिस स्पष्ट नहीं था और उसे अपना पक्ष रखने का उचित मौका भी नहीं मिला। कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना।







