17 साल की साक्षी और उसके 18 साल के भाई अजय सक्सेना जो सुदामापुरी निवासी हैं। दोनों बेकरी से सामान लेकर घर लौट रहे थे। स्कूटी पुल के गैप पर पहुंची तो अनियंत्रित हो गई और दोनों स्कूटी सहित गंदे नाले में गिर गए। स्कूटी पुल पर ही फंस गई, लेकिन दोनों नीचे गिरे।
बचाव: स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद की, दोनों को नाले से निकाला और नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। साक्षी की हालत नाजुक बताई जा रही है, जबकि अजय की स्थिति स्थिर है।
पुल पर सुरक्षा जाल, बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं थे, जो प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है।
यह हादसा नोएडा के युवराज मेहता मामले से तुलना किया जा रहा है, जहाँ हाल ही में (जनवरी 2026 की शुरुआत में) सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन पानी भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी। वहाँ भी लापरवाही (खुला गड्ढा, कोई बैरिकेडिंग नहीं, रेस्क्यू में देरी) का मामला था, और अब गाजियाबाद में ऐसा ही खुला/असुरक्षित पुल/नाला लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है।
सोशल मीडिया और न्यूज़ रिपोर्ट्स में लोग पूछ रहे हैं कि नोएडा हादसे के बाद भी प्रशासन क्यों नहीं जागा? क्या और जानें जाएंगी तब तक खुले नाले/गड्ढे ढके जाएंगे? यह घटनाएँ उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और सेफ्टी की बड़ी कमी को उजागर करती हैं। अगर आपके पास इस घटना से जुड़ी कोई और डिटेल या सवाल है, तो बताएं।








