चूड़ी, बिंदी और साड़ी को कायरता का प्रतीक दिखाना बहुत शर्मनाक और आपत्तिजनक
रीवा । नगर पालिक निगम रीवा पार्षद बैठक में गत दिवस भाजपा महिला पार्षदों के द्वारा नगरीय प्रशासन की कार्य प्रणाली के विरोध में निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारियों को चूड़ियां बिंदी देने का जो अभद्र तरीका अपनाया उस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नारी चेतना मंच एवं समता सम्पर्क अभियान ने इसे शर्मनाक और आपत्तिजनक बताया है। महिलाओं की श्रृंगार सामग्री और पहनावे को कायरता का प्रतीक मानकर उन्हें पुरुषों को देना बहुत हास्यास्पद और शर्मनाक बात है। वर्तमान दौर में केंद्र और राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार है। 15 महीने का समय छोड़ दें तो प्रदेश में 2003 से भाजपा शासन है। लंबे समय तक नगर पालिक निगम रीवा पर भी इनका कब्जा रहा है। रीवा में विकास के नाम पर लूट कभी बंद नहीं हुई।
चूड़ी बिंदी का यह विरोध प्रदर्शन पहली बार नही हुआ है। प्रदेश में जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार थी तब 16 अक्टूबर 2019 को रीवा में भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं के द्वारा चुनाव चिन्ह कमल के साथ नगर निगम आयुक्त सभाजीत यादव को उनके कक्ष के अंदर जाकर साड़ी चूड़ियां देने और चूड़ियां फोड़ने का उपद्रव किया गया था। उस समय भी ऐसी घटना पर नारी चेतना मंच ने नाराजगी जताई थी। चूड़ियां भारतीय महिलाओं का श्रृंगार और आभूषण है जिसे किसी भी पुरुष को देकर उसे अपमानित करने की सोच बहुत शर्मनाक है। भारतीय परम्परा में वैसे भी चूड़ियां फोड़ना अच्छी बात नहीं मानी गई है। सभाजीत यादव को तो महिलाओं का पहनावा और पूरी श्रृंगार सामग्री जबरिया भेंट की गई थी। उस दौरान चूड़ियां भी फोड़ी गई थीं।
चूड़ियां बिंदी आदि देकर भाजपा महिलाएं आखिरकार क्या संदेश देना चाहती हैं। नारी चेतना मंच ने कहा कि महिलाओं की कोई भी श्रृंगार और पहनावा कायरता का प्रतीक नहीं है। लंबे समय से देखने में आ रहा कि कुछ महिला संगठनों के द्वारा अपने विरोध कार्यक्रम में चूड़ी चोली लहंगा ब्लाउज आदि पुरुषों को देकर एक गलत परंपरा को बढ़ावा देते हुए खुद महिलाओं का मज़ाक़ उड़ा रहीं हैं। यूपीए शासन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को भाजपा नेता स्मृति ईरानी के द्वारा चूड़ियां भिजवाना भी महिलाओं को अपमानित करने वाला कृत्य था। इस तरह का मामला केवल भाजपा तक सीमित नहीं बल्कि अन्य दल एवं संगठन भी ऐसी शर्मनाक हरकत से बाज नहीं आ रहे हैं।
समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि यदि किसी का राजनीतिक विरोध करना है तो काले झंडे के साथ नारेबाजी करके लोकतांत्रिक प्रदर्शन किया जा सकता है। नारी चेतना मंच तीस साल से भी अधिक समय से संघर्ष कर रही हैं। लेकिन उसने कभी भी श्रृंगार और पहनावे को ग़लत तरीके से इस्तेमाल कर नारी को अपमानित नहीं किया। इस दौरान संगठन ने कभी किसी की आरती नहीं उतारी और ना ही किसी भी पुरुष को चूड़ियां दी गईं। सत्ता की मनमानी के विरोध में कई बार काले झंडे दिखाए गए। रीवा में 12 जून 2003 को जन समस्याओं को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को नारी चेतना मंच ने काले झंडे दिखाए थे। तब शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहीं सैकड़ो महिलाओं पर लाठी चार्ज हुआ था। बुरी तरह घायल 32 महिलाओं का इलाज कराने की जगह उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल से रिहा होने पर महिलाएं चुप नहीं बैठीं और विधानसभा के बाहर और अंदर काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन करके लाठी डंडे की सरकार को बदलने का शंखनाद किया था। श्री खरे ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, व्यवस्था भी बदलना चाहिए। इसके लिए जनता को निरंतर जागरूक बनाने का काम होना चाहिए। डॉ लोहिया कहते थे कि जिंदा कौमें 5 साल इंतजार नहीं किया करती हैं। आज ऐसी बातों को अपनाने की जरूरत है।







