अमेरिका परस्त नीतियों से भारत की संप्रभुता खतरे में
मोदी सरकार गहरे अलगाव में, बड़े लोकतांत्रिक आंदोलन की जरूरत – अखिलेन्द्र
रोजगार के सवाल पर राष्ट्रीय गोलबंदी जरूरी – प्रशांत भूषण
अमेरिका-ईरान युद्ध भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा- प्रोफेसर अरुण कुमार
रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान के राजेंद्र भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्र की रक्षा के लिए संकल्प प्रस्ताव
नई दिल्ली । भारत की विदेश एवं व्यापार नीति तथा ऊर्जा-कृषि-खाद्यान्न संकट पर राजेंद्र भवन में आज आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में लिए प्रस्ताव में अमेरिका–इज़राइल गठजोड़ द्वारा संप्रभु राष्ट्र ईरान पर किए गए अवैध और अकारण आक्रमण की कड़ी निंदा की गई और कहा कि इसने वैश्विक अस्थिरता और जन-पीड़ा को बढ़ाया है। सम्मेलन ने भारत सरकार से मांग की कि वह इस आक्रमण के खिलाफ स्पष्ट, स्वतंत्र और सिद्धांत आधारित रुख अपनाए ताकि राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा हो। सम्मेलन ने रेखांकित किया कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी ऊर्जा और उर्वरक संकट जारी रहेगा, जिससे कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, खाद्य संकट गहराएगा, और महंगाई, मुद्रास्फीति व बेरोजगारी में वृद्धि होगी। अत: सम्मेलन ने सर्वसम्मति से राष्ट्र की रक्षा के लिए संकल्प लिया कि देशभर में अभियान चलाकर जनता को बताया जाएगा कि केंद्र सरकार की वर्तमान नीतियाँ—विशेषकर विदेश और व्यापार नीतियाँ—कैसे इस संकट को बढ़ा रही हैं और देश की आर्थिक संप्रभुता को कमजोर कर रही हैं।
रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान इस मुद्दे को अपने व्यापक आंदोलन का अभिन्न हिस्सा बनाएगा, जो युद्ध, आर्थिक संकट और मजदूरों, किसानों तथा हाशिये के वर्गों के अधिकारों को जोड़ता है। सम्मेलन में स्वागत संबोधन करते हुए ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मोदी सरकार आज जनता से गहरे अलगाव का शिकार हुई है। यह सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। किसान, मजदूर, महिलाएं, एससी, एसटी, अति पिछड़ा वर्ग, पसमांदा मुसलमान समेत छोटे-मझोले व्यापारी तक इस सरकार की नीतियों से तबाही और संकट के दौर से गुजर रहे। आज के सम्मेलन का महत्व यह है कि जहां एक तरफ प्रबुद्ध अर्थशास्त्री और बौद्धिक लोग इस सम्मेलन में हैं वहीं सामाजिक, वर्गीय और तबकाई सवालों पर जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे कार्यकर्ता भी इस सम्मेलन में मौजूद हैं। यह सम्मेलन राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रैक्सिस को खड़ा कर रहा है और हमारी कोशिश है कि देश की सभी लोकतांत्रिक ताकतों को एक मंच पर लाया जाए ताकि इस सरकार के खिलाफ जन राजनीतिक ताकत का निर्माण हो सके।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सम्मेलन को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि रोजगार, विदेश और व्यापार नीति और एसआईआर यह तीन सवाल ऐसे हैं जिन पर देश में बड़ा आंदोलन नागरिक समाज की तरफ से खड़ा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी आज अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के सामने नतमस्तक हो गए हैं। हद यह है कि भारत का अपमान करने वाले वक्तव्य का भी समुचित जवाब मोदी नहीं दे पा रहे। इन्होंने देश की प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुंचाने का काम किया है। प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि दुनिया आज गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। यूक्रेन और ईरान से जुड़े युद्धों में बड़ी शक्तियों की भागीदारी ने वैश्विक अस्थिरता को तेज कर दिया है। ये संघर्ष अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि नव-औपनिवेशिक संकट की गहराती प्रवृत्तियों का परिणाम हैं, जहाँ शक्तिशाली देश संसाधनों और रणनीतिक क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे परिप्रेक्ष्य में ईरान का इन दबावों के बीच टिके रहना वैश्विक दक्षिण के सभी राष्ट्र-राज्यों, विशेषकर भारत, के लिए महत्वपूर्ण महत्व रखता है।
अर्थशास्त्री जया मेहता ने कहा कि इस युद्ध के परिणाम स्वरूप भारत में ऊर्जा और उर्वरक संकट पैदा हुआ है, जिससे कृषि प्रभावित हो रही है और खाद्य संकट की स्थिति बन रही है, साथ ही आवश्यक वस्तुओं की कमी बढ़ रही है। महंगाई, बेरोजगारी और आजीविका का संकट तेजी से गहरा रहा है, जिसका सबसे अधिक असर मजदूरों, किसानों और हाशिये के वर्गों पर पड़ रहा है। इसी के साथ केंद्र सरकार की वर्तमान नीतियाँ देश की आर्थिक संप्रभुता को कमजोर कर रही हैं।
सम्मेलन को डॉक्टर अंबेडकर के सहयोगी व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रहे भगवान दास जी को समर्पित किया गया। सम्मेलन को वैज्ञानिक दिनेश अबरोल, राष्ट्र उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूराम पाल, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के पी. सी. तिवारी, नवनिर्माण कृषक संगठन, उड़ीसा के संयोजक अक्षय भाई, एआईपीएफ राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर राहुल दास, राज्याधिकार पार्टी के. वी. जी. आर. नारागोनी, इंडियन प्रजा कांग्रेस के दिल्ली अध्यक्ष हर मोहन सिंह मोंगिया, बहुजन द्रविड़ पार्टी के उपाध्यक्ष एडवोकेट अशोक कुमार, झारखंड नवनिर्माण दल के संयोजक विजय सिंह, रोजगार अधिकार अभियान के राजेश सचान, कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट नीतिन मिश्रा, आदिवासी वनवासी महासभा के कृपाशंकर पनिका ने भी संबोधित किया। सम्मेलन का संचालन राष्ट्रीय किसान मंच के अध्यक्ष शेखर दीक्षित और एआईपीएफ उपाध्यक्ष नसीम खान ने किया।







