भारतीय युवा बढ़ाएंगे रूस की घटती जन्मदर!

रूस की जमीन पर खेती करेंगे भारतीय, रोजगार के नाम पर इस्तेमाल होंगे भारतीय
भारतीयों के लिए वीजा नियम में ढील कर सकता है रूस, कर सकता है सेक्स फ्री

चरण सिंह 
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारतीय युवाओं को रूस में बच्चे पैदा करने का न्योता दिया गया है। इस पोस्ट को लेकर भले ही  तरह तरह की बातें की जा रही हों। पोस्ट को हास्यास्पद बताया जा रहा हो। भले ही यह पोस्ट कोई आधिकारिक पोस्ट न हो पर जिस तरह की रूस की परिस्थितियां है यह पोस्ट सही भी साबित हो सकती हैं। जिस तरह से गत दिनों केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व ने एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल रूस गया और 7 एमयूओ पर हस्ताक्षर हुए। जिस तरह से इन प्रतिनिधिमंडल में चार मुख्यमंत्रियों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल थे। बाकायदा पत्रकारों से बात करते हुए पूर्वीं रूस में खेती की अपार सभावनाएं जताई और 40 लाख हेक्टेयर जमीन कृषि योग्य जमीन बताया। जिस तरह से 200 साल में रूस की जन्म दर सबसे अधिक गिरावट हुई है। जिस तरह से यूक्रेन से युद्ध के चलते रूस के 6 लाख सैनिकों के मरने की बात सामने आ रही है। जिस से तरह से रूस के युवाओं में काम वासना का अभाव की बात खुद रूस स्वीकार कर रहा है। बच्चे पैदा करने के लिए स्कूली छात्राओं को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। छुट्टी दी जा रही है। 40-50 लाख कामगारों की जरूरत रूस में होने की बात की जा रही है। ऐसे रूस से इस तरह का न्योता आ सकता है और प्रधानमंत्री मोदी भी रूस के इस न्योते को लपक सकते हैं। वैसे भी एक तीर से कई निशाने साधने में मोदी माहिर माने जाते हैं। जब देश में बेरोजगारी चरम पर तो ऐसे में यह खेल मोदी कर सकते हैं।  यह भी जगजाहिर है कि भारत में एक ओर जहां रोजगार की समस्या है वहीं दूसरी ओर काम पढ़े लिखे युवाओं में शादी न होने की भी समस्या ऐसे में रूस की लड़की से शादी के नाम पर भारत युवाओं को रूस जाने के लिए तैयार किया जा सकता है। दरअसल रूस का जन्म दर 200 साल के निचले स्तर पर गिरा है और राष्ट्रपति पुतिन हल जल्द शादी मानते हैं पर रूसी युवाओं में काम वासना की कमी की बात सामने आ रही। संबंध भी नहीं बना रहे हैं ऐसे में पुतिन यह कदम उठा सकते हैं। भारतीय में बेरोजगारी के लिए पीएम मोदी बह यह खेल कर सकते हैं। एक तीर से दो निशाने साधने में माहिर पीएम मोदी इस योजना को आगे बढ़ा सकते हैं।  दरअसल यूक्रेन युद्ध के बीच रूस में कम होती आबादी से राष्‍ट्रपति पुतिन टेंशन में हैं। पुतिन सरकार एक नए मंत्रालय का गठन करने पर व‍िचार कर रहे हैं ताकि लोगों को ज्‍यादा से ज्‍यादा बच्‍चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया जा सके। यही नहीं रूसी कपल को बच्‍चे पैदा करने पर पैसा दिया जा रहा है पर जब रूसी युवा लड़कियों से संबंध ही नहीं बना पा रहे हैं तो बच्चे पैदा होंगे कहाँ से ?
ब्रिटिश मीडिया का दावा है कि यूक्रेन युद्ध में 6 लाख रूसी सैनिक मारे गए हैं। इसी वजह से रूसी अधिकारी नित नए अनोखे विचार लेकर आ रहे हैं ताकि गिरती जन्‍म दर को कम किया जा सके और रूसी जनता को ज्‍यादा से ज्‍यादा बच्‍चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। हालांकि रूसी महिलाओं ने इस तरह के आइडिया का कड़ा विरोध किया है।

पिछले दिनों रात को 10 से सुबह 2 बजे के बीच इंटरनेट और लाइट को बंद कर करने की बात की गई थी ताकि युवा संबंध बनाएं और बच्‍चे पैदा करें। सरकार महिलाओं को घर पर बच्‍चे पालने और घर के काम करने के लिए पैसे दे। रूस में जन्मदर बढ़ाने के लिए एक यह नया मंत्रालय गठित करने की बात भी सामने आई थी। यह मंत्रालय रूसी कपल को उनके पहले डेट पर भारी भरकम पैसा दे। यही नहीं सरकारी पैसे से शादी की रात के लिए होटल में कमरा बुक किया जाए ताकि इससे गर्भधारण को बढ़ावा दिया जाए। इन सबके बावजूद रूस इस ओर सफल होता दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में रूस की मदद भारत ही कर सकता है।
दरअसल घटती जन्मदर को लेकर रूस कितना परेशान है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रूस के कई क्षेत्रों में गर्भवती स्कूली छात्राओं को बच्चों को जन्म देने और उनके पालन-पोषण के लिए लगभग 1 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करना शुरू कर दिया है। हालांकि रूस में इस नीति का विरोध भी हो रहा है।
इधर उन महिलाओं के खिलाफ सार्वजनिक आलोचना बढ़ गई है जो शिक्षा या करियर के लिए मातृत्व में देरी करती हैं या उसे टालती हैं। नकदी, नागरिकता और बच्चे: एक विश्वव्यापी प्रवृत्ति रूस की जनसांख्यिकीय चिंताएँ एक वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाती हैं। 2050 तक, 75% से अधिक देशों में कम प्रजनन दर के कारण जनसंख्या में गिरावट आने की संभावना है। जवाब में, कई सरकारों ने प्रजनन-प्रधान नीतियों को अपनाया है।
उधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी के किसानों और उद्यमियों के लिए रूस में कॉन्ट्रैक्ट खेती करने की अपार संभावनाएं बताई हैं। पूर्वी रूस में 50 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य जमीन होने और काम करने वाले उतने लोग नहीं की बात उन्होंने कही है। उन्होंने एक किलोमीटर दायरे में सिर्फ एक ही घर दिखाई पड़ने की भी बात कही है। दरअसल योगी गत 11-13 अगस्त के बीच रूस की यात्रा पर थे। इस दौरान दोनों सरकारों और दोनों देशों के उद्यमियों के बीच सात एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

दरअसल केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में चार प्रदेशों के मुख्यमंत्री के अलावा 145 निवेशकों समेत 190 लोगों का प्रतिनिधिमंडल रूस गया था। योगी ने कहा कि बागवानी और कृषि समेत कई क्षेत्रों में भारत को विशेषज्ञता हासिल है, जिसका इस्तेमाल हम रूस में कर सकते हैं। हमनें प्रस्ताव दिया कि आपके पास जमीन है और हमारे पास जनशक्ति है। दोनों मिलकर संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं। 90 वर्ष तक के लिए वहां लीज पर जमीन मिल सकती है। यदि 90 साल की लीज पर रूस में खेती की जाएगी तो समझा जा सकता है कि रूस भी इस बात का फायदा उठाएगा। इस में भारतीयों को रूस में सेक्स फ्री जैसी योजना लाकर अपनी जन्म दर बढ़ा सकता है।

योगी आदित्यनाथ का कहना है कि इस पर दोनों देशों के बीच सहमति बन चुकी है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत खेती को विकसित किया जा सकता है। इससे यूपी के युवाओं को रूस में काफी रोजगार मिल सकता है। यूरोप के अलावा कई अन्य देशों में वहां से खाद्य पदार्थों को आसानी से निर्यात किया जा सकता है। यह समझौता भारत के लिए कई मायनों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
दरअसल भारत में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है। हमारे पास स्किल्ड और सेमी स्किल्ड युवाओं की फौज है। रूस में वेतन भारत के मुकाबले काफी बेहतर है। रूस में एक कुशल श्रमिक महीने के 80,000 से 1.5 लाख रुपये तक कमा सकता है। रूस ऊर्जा, परमाणु विज्ञान, और भारी इंजीनियरिंग में दुनिया में सबसे आगे है. जब भारतीय वहां काम करेंगे, तो वे नई तकनीक सीखेंगे. यह ‘स्किल ट्रांसफर’ बाद में भारत के काम आएगा।
किन क्षेत्रों में मिलेंगी नौकरियां?

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, रूस ने विशेष रूप से इन क्षेत्रों में भारतीयों की मांग की है:
निर्माण : यह सबसे बड़ा सेक्टर है। राजमिस्त्री, वेल्डर, पेंटर और इलेक्ट्रिशियन की भारी मांग है। ऊर्जा: साइबेरिया के तेल और गैस क्षेत्रों में काम करने के लिए तकनीशियनों की जरूरत है.
कृषि: रूस के पास विशाल उपजाऊ जमीन है, लेकिन खेती करने वाले कम हैं. भारतीय किसान वहां आधुनिक खेती में मदद कर सकते हैं। टेक्सटाइल और गार्मेंट: कपड़ों की फैक्ट्रियों में मशीन ऑपरेटर। आईटी और बैंकिंग: पश्चिमी कंपनियों के चले जाने के बाद रूस को अपनी आईटी प्रणाली को बनाए रखने के लिए भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की जरूरत है।

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