उत्तर विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी ने अखिलेश यादव को दे दिया बड़ा हथियार !

सी. एस राजपूत 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल टोपी पर दिए बयान के बाद समाजवादी पार्टी ने लाल टोपी को उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में हथियार बना लिया है। ७ दिसम्बर को सपा के आधिकारिक हैंडल से सपा नेताओं की तस्वीरें और अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की रैली का एक वीडियो ट्वीट कर ये क्रांतिकारी लाल टोपियां का कैप्शन दिया गया। इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ८ दिसम्बर को लाल टोपी पहनकर संसद पहुंचे।
दरअसल समाजवादी पार्टी में संगठन के लोहिया वाहिनी प्रकोष्ट से जुड़े कायर्कर्ता ही लाल टोपी पहनते थे पर अखिलेश यादव ने एक रणनीति के तहत लाल टोपी पहनना शुरू किया था। प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी ने लाल टोपी पर बोलकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को एक बड़ा हथियार दे दिया है। अखिलेश  यादव लाल टोपी के माध्यम से लोकनायक जयप्रकाश और डा. लोहिया के अलावा दूसरे समाजवादियों के  संघर्ष को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भुना सकते हैं।  वैसे भी लाल रंग को क्रांति का प्रतीक माना जाता है। यदि समाजवादियों के लाल टोपी पहनने की बात करें तो “लाल टोपी को समाजवादी नेताओं ने 1934 में पटना में अपने पहले सम्मेलन में अपनाया था। पर समाजवादियों के लिए लाल टोपी क्रेज तब बढ़ा जब लोक नायक जयप्रकाश नारायण और डा. राम मनोहर लोहिया ने लाल टोपी पहनना शुरू किया।

दरअसल १९४८ में जब डॉ. राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में समाजवादी कांग्रेस से अलग हो गये तो उसी समय जयप्रकाश नारायण का रूस जाना हुआ। रूस से लौटकर जयप्रकाश नारायण ने लाल टोपी पहनना शुरू कर दिया। उसके बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया और उसके बाद सभी समाजवादियों ने विधिवत रूप से लाल टोपी पहनना शुरू कर दिया। वह दौर समाजवादियों का नेहरू सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने का दौर था। तभी डॉ. लोहिया ने गैर कांग्रेसवाद का नारा दिया था। नेहरू सरकार के खिलाफ समाजवादी लाल टोपी सड़कों पर उतरते थे।
यदि बात सपा के संस्थापक मुलायम सिंह की बात करें तो भले ही वह धोती कुर्ता पहनते हों पर उन्हें कभी किसी रंग की टोपी पहनने का कोई खास शौक नहीं रहा। हां कभी खास अवसरों पर ही लाल टोपी पहन लिया करते थे। हां अखिलेश यादव की पसंद लाल टोपी रही है। जब 7-8 जून 2011 को सपा का आगरा में आठवां राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ तो अखिलेश यादव लाल टोपी पहने देखा गया।
यह अखिलेश यादव का लाल टोपी के प्रति विशेष लगाव ही था कि 2016-17 में पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को लाल टोपी पहनने के लिए प्रोत्साहित किया। 2017 के विधानसभा चुनाव में जब सपा की हार के बाद भाजपा यूपी की सत्ता में आई, तो उन्होंने पार्टी के सभी कार्यक्रमों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में टोपी पहनना शुरू कर दिया। उन्होंने सुनिश्चित किया कि पार्टी कार्यकर्ता योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों और राज्य में अपराध की घटनाओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों में टोपी पहनें।
पार्टी के प्रमुख संगठन – लोहिया वाहिनी और यूथ ब्रिगेड – के लोग भी लाल टोपी पहनते हैं, जिस पर संगठन का नाम छपा होता है।

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