दुनिया के कितने देशों में अमीरों-गरीबों का अंतर ज्यादा, क्यों बढ़ रही यह खाई?

दुनिया में अमीरों और गरीबों के बीच की खाई (आय असमानता) एक गंभीर समस्या है, जिसे आमतौर पर गिनी गुणांक (Gini Coefficient) से मापा जाता है। गिनी गुणांक 0 से 1 के बीच होता है (या 0 से 100 के पैमाने पर), जहां 0 पूर्ण समानता और 1 पूर्ण असमानता दर्शाता है। सामान्यतः 0.4 (या 40) से ऊपर का मूल्य उच्च असमानता माना जाता है।

 

कितने देशों में यह अंतर ज्यादा है?

2025 के जी20 ग्लोबल इनइक्वालिटी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 83% देशों में आय असमानता उच्च स्तर की है, जो वैश्विक आबादी का 90% हिस्सा कवर करती है। विश्व बैंक के परिभाषा के अनुसार, ये वे देश हैं जहां गिनी गुणांक 0.4 से अधिक है। लगभग 195 देशों में से यह करीब 162 देशों का आंकड़ा है। यह असमानता विशेष रूप से विकासशील और उभरते बाजारों (जैसे अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के कुछ हिस्सों) में प्रबल है। विश्व बैंक के नवीनतम डेटा (2022-2023 तक) के आधार पर, उच्च असमानता वाले कुछ शीर्ष देश निम्न हैं:

 

रैंकदेशगिनी गुणांकनवीनतम वर्ष1दक्षिण

 

अफ्रीका63.020142नामीबिया59.120153बोत्सवाना54.920154इस्वातिनी54.620165कोलंबिया53.920236ब्राजील51.620237जाम्बिया51.520228जिम्बाब्वे50.320199कांगो गणराज्य48.9201110ब्रुनेई56.41981
ये आंकड़े विकिपीडिया और विश्व बैंक से लिए गए हैं, जो विभिन्न वर्षों के हैं क्योंकि सभी देशों में डेटा एकसमान उपलब्ध नहीं होता।

 

क्यों बढ़ रही है यह खाई?

 

आय असमानता में वृद्धि कई वैश्विक और राष्ट्रीय कारकों से हो रही है। 2000 से 2024 के बीच, दुनिया के सबसे अमीर 1% लोगों ने नई संपत्ति का 41% हिस्सा हथिया लिया, जबकि निचले 50% लोगों को केवल 1% मिला। मुख्य कारण निम्न हैं:

तकनीकी परिवर्तन : डिजिटल तकनीक और ऑटोमेशन निम्न-कुशल नौकरियों को प्रभावित कर रही हैं, जिससे मजदूरी में असमानता बढ़ रही है। उच्च-कुशल श्रमिकों को फायदा हो रहा है, जबकि निम्न-कुशल श्रमिक पीछे छूट रहे हैं।
वैश्वीकरण और व्यापार: अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आउटसोर्सिंग ने विकसित देशों में निम्न-कुशल श्रमिकों की नौकरियों को प्रभावित किया है। उभरते बाजारों में यह लाभदायक रहा, लेकिन कुल मिलाकर अमीरों को अधिक फायदा पहुंचा।
नीतिगत मुद्दे: निम्न कर दरें (विशेष रूप से अमीरों और निगमों के लिए), न्यूनतम मजदूरी में कमी, और शिक्षा/सामाजिक सेवाओं पर कम खर्च असमानता बढ़ाते हैं। नवउदारवादी नीतियां (जैसे एकाधिकारों को बढ़ावा) और वैश्विक पूंजी की गतिशीलता भी जिम्मेदार हैं।

शिक्षा और अवसरों की कमी : खराब शिक्षा प्रणाली, जन्मजात अवसरों की असमानता (जैसे जाति, लिंग, नस्ल), और ऐतिहासिक कारक (जैसे असमान भूमि वितरण) गरीबी को स्थायी बनाते हैं। कोविड-19 और आर्थिक संकट: महामारी ने असमानता को और गहरा किया, क्योंकि अमीरों की संपत्ति (शेयर बाजार) बढ़ी, जबकि गरीबों की आय घटी।

  • Related Posts

    भारत में समंदर किनारे दबा था दुनिया का पहला बंदरगाह, 4000 साल तक यूरोप में भी नहीं था ऐसा पोर्ट, इतिहासकार ने खोली अंग्रेजों की झूठ की पोल
    • TN15TN15
    • July 22, 2026

    नई दिल्ली। अरसे से पश्चिम के इतिहासकार इस…

    Continue reading
    आखिर क्यों बलूचिस्तान को नहीं छोड़ना चाहता पाकिस्तान?
    • TN15TN15
    • July 15, 2026

    पाकिस्तान के सबसे अशांत और आर्थिक रूप से…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    बिहार: AK-47 का किसने दिया ऑर्डर, कितनों को लगी गोली?

    • By TN15
    • July 27, 2026
    बिहार: AK-47 का किसने दिया ऑर्डर, कितनों को लगी गोली?

    Reservation Hatao आंदोलन को मैथ्स वाले अभिनय सर का समर्थन है या नहीं?    

    • By TN15
    • July 27, 2026
    Reservation Hatao आंदोलन को मैथ्स वाले अभिनय सर का समर्थन है या नहीं?    

    अभी और कुछ देखना बाकी है, अभी भी है क्या अंधभक्ति ?

    • By TN15
    • July 27, 2026
    अभी और कुछ देखना बाकी है, अभी भी है क्या अंधभक्ति ?

    जंतर मंतर आंदोलन पर पैलेट गन के प्रयोग के जिम्मेदार अमित शाह इस्तीफा दें

    • By TN15
    • July 27, 2026
    जंतर मंतर आंदोलन पर पैलेट गन के प्रयोग के जिम्मेदार अमित शाह इस्तीफा दें

    दिल्ली जंक्शन‌ पर कौन उतरा

    • By TN15
    • July 27, 2026
    दिल्ली जंक्शन‌ पर कौन उतरा

    लिखावट साहित्य – सम्मान से सम्मानित हुए युवा आलोचक नीरज कुमार मिश्र

    • By TN15
    • July 27, 2026
    लिखावट साहित्य – सम्मान से सम्मानित हुए युवा आलोचक नीरज कुमार मिश्र