देश के विकास में कला और संस्कृति का महत्वपूर्ण योगदान : जूही कुमारी

उत्तर भारतीय संगीत पद्धति एवं स्वरलिपी पद्धति के जनक पंडित विष्णु नारायण भातखंडे की मनाई गई 164 वीं जयंती

 सुभाष चंद्र कुमार

समस्तीपुर। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 10 अगस्त (गुरुवार) को उत्तर भारतीय संगीत पद्धति एवं स्वरलिपी पद्धति के जनक पंडित विष्णु नारायण भातखंडे की 164 वी जयंती के अवसर पर डाॅ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा परिसर स्थित विद्यापति सभागार में राष्ट्रीय शास्त्रीय संगीत समारोह संगीतांजली का आयोजन किया गया।

बतौर मुख्य अतिथि जिला कला संस्कृति एवं युवा कार्यक्रम पदाधिकारी जूही कुमारी ने कहा कि किसी भी देश के विकास में कला का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह साझा दृष्टिकोण, मूल्य, प्रथा एवं एक निश्चित लक्ष्य को दिखाता है। सभी आर्थिक, सामाजिक एवं अन्य गतिविधियों में संस्कृति एवं रचनात्मकता का समावेश होता है।

कला एवं संस्कृति दोनों ही एक मजबूत समुदाय की जगह की भावना को संरक्षित या मजबूत करने, व्यक्तिगत पहचान बनाने और अपनी रचनात्मकता दिखाने के दो अद्भुत तरीके हैं। कला और संस्कृति सीखने, मनोरंजन, अवकाश, व्यक्तिगत विकास और दूसरों के साथ संचार में सुधार के लिए कई अवसर प्रदान करती है।

प्राचीन कला केन्द्र के निर्देशन में आयोजित इस समारोह में सर्वप्रथम तमाम आगत अतिथियों को सह आयोजक आशा सेवा संस्थान के सचिव अमित कुमार वर्मा, औसेफा निदेशक देव कुमार, ईडेन प्रमुख ब्रज किशोर कुमार, राजम इंडेन के प्रबंध निदेशक अतुल कुमार, शिक्षाविद मिथिलेश कुमार, आदि ने चादर, पट्टा, पाग एवं स्मृति चिन्ह से स्वागत के बाद कार्यक्रम के संयोजक जगमोहन विद्यापति कॉलेज ऑफ आर्ट एंड टेक्नोलॉजी वैनी के सचिव डॉ संजय कुमार राजा ने स्वागत संबोधन एवं विषय प्रवेश कराया।

सर्वप्रथम मुख्य अतिथि जिला कला संस्कृति एवं युवा कार्यक्रम पदाधिकारी जूही कुमारी, विशिष्ट अतिथि संजय कुमार सिंह, निदेशक आईएआरआई डाॅ केके सिंह, दीप प्रज्वलन एवं उत्तर भारतीय संगीत पद्धति के जनक पंडित विष्णु नारायण भातखंडे एवं पंडित जगमोहन झा के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि एवं साक्षी ऋतु के गुरू वंदना के साथ समारोह परवान चढ़ा।

सह आयोजक विश्व प्रसिद्ध ताल दर्शन मंजरी के रचयिता ताल मर्मज्ञ पंडित राम नरेश राय की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में दरभंगा घराने के राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिलब्ध चांसुरी वादक डॉ वेद प्रकाश के शिष्य केशव कुमार धीरज के गायन, रोहन तारा के बांसुरी वादन, खगडिया से पधारे सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित गणेश पाल, कोलकाता से पधारे तबला वादक देवाशीष सिंह राॅय, पटना से पधारे कथक गुरू विजय कुमार मिश्रा एवं उनके शिष्यो के कत्थक और रामचन्द्र गोल्डर के भरतनाट्यम, अलावा राम बालक निराला आदि ने अपनी प्रस्तुति से ऐसा समां बांधा कि गुजरते वक्त का एहसास भी नहीं हुआ।

इसी दरम्यान रामबालक निराला के लहरा पर सुविख्यात पंडित रामनरेश राय के शिष्यों यथा चन्द्रकान्त चौधरी, राम प्रवेश महतो, प्रभात कुमार, सुभाशीष कुमार, उदय कुमार पाठक, अमन कुमार, सत्यम कुमार, नीतेश कुमार द्वारा प्रस्तुत तबला कचहरी के अलावा, रामचन्द्र ठाकुर, रंजन कुमार, तबला संगति से सजी मनोहारी प्रस्तुति ने देर श्रोताओं को बांधे रखा।

इसी क्रम में विशिष्ट अतिथि केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डाॅ मृत्युंजय कुमार ने आयोजन को अनुपम बताते हुए आयोजक टीम को बधाई दी। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ संजय कुमार ने किया। समारोह की सफलता में पंडित रामवृक्ष सिंह, सुमित कुमार सुमन, संतोष कुमार, सुभाष चंद्र कुमार, अरविंद पाठक, दीपक कुमार, कुमार विकास, चंदन कुमार झा, स्नेहा सुमन, हिमांशु भास्कर, निशांत, सुशान्त, प्रमोद कुमार झा, कुमार रौशन ने अहम भूमिका निभाई।

मौके पर अभय कुमार, विभूति कुमार, व्यापार मंडल चंदौली के अध्यक्ष प्रेम कुमार झा, तकनीकी अधिकारी मीरा पांडेय, भवेश कार्यी, सुनील कुमार साह, भाजपा नेत्री मधुमाला, कृष्ण कुमार, उमेश ठाकुर, डाॅ गणेश ठाकुर, अरविंद कुमार, रौशन कुमार, पप्पु कुमार, रंजीत कुमार, ध्रुव कुमार पाठक, चित्तरंजन शर्मा, नंदगोपाल ठाकुर, अरविंद कुमार, एसके निराला, सहित कई लोग मौजूद थे।

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