काश पीएम मोदी बुद्ध के संदेश को इजराइल के गांव गांव तक पहुंचाने की बात करते ?

देश के लिए घातक है रूस और ईरान को नाराज कर इजराइल और अमेरिका के साथ खड़ा होना

इजराइल की तकनीक को भारत के गांव गांव तक पहुंचाने की मोदी की बात देश में अशांति पैदा करने वाली

चरण सिंह 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान पर हमले से पहले जब इजराइल गए तो उन्होंने अपने भाषण में कहा कि वह इजराइल की तकनीक को भारत के गांव गांव तक पहुंचाएंगे। यह बात मोदी ने उस समय कही है जब इजराइल और ईरान में युद्ध की आशंका थी। मतलब जब पीएम मोदी को भारत को दुनिया का महान लोकतंत्र दर्शाते हुए गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी के संदेश की बात करनी चाहिए थी। युद्ध नहीं बुद्ध की बात करनी चाहिए थी।
बुद्ध के संदेश को इजराइल के गांव गांव तक पहुंचाने की बात करनी चाहिए थी। ऐसे में उन्होंने इजराइल की तकनीक को भारत के गांव गांव पहुंचाने की बात कर इजराइल की मार्केटिंग की। क्या मोदी इजराइल की उस तकनीक को भारत के गांव गांव तक पहुंचाना चाहते हैं जिस तकनीक से इजराइल ने ईरान पर हमले के दौरान एक स्कूल को निशाना बनाया और 86 बेकसूर छात्राओं को मार डाला।
युद्ध के बीच यह प्रश्न बहुत तेजी से उभर रहा है कि पीएम मोदी को इजराइल दौरे की जरूरत क्या थी। अवार्ड लेनी की मोदी की मानसिकता ऐसी है जैसी कि स्कूली बच्चे यूनिफॉर्म पहनकर उतावलेपन से स्टेज पर पहुंच जाते हैं। यह प्रश्न इसलिए भी उभरा है क्योंकि मोदी के इजराइल से वापस आते ही। ईरान और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया। मोदी ने इस हमले पर कुछ कहा भी नहीं। जबकि ईरान हमारा परम्परागत दोस्त रहा है।
मतलब मोदी अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद कर रूस को नाराज कर रहे हैं तो युद्ध में खुलकर इजराइल के साथ खड़ा होकर ईरान से नाराजगी मोल ले ली। मोदी उस अमेरिका के साथ खड़े हो रहे हैं जो कभी भारत का हुआ ही नहीं। जिसने हमेशा पाकिस्तान की मदद की। जो लगातार मोदी को अपमानित कर रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प को दुनिया को यह भी बताना चाहिए कि ईरान के पास परमाणु शक्ति होने से खतरा है तो फिर पाकिस्तान के पास परमाणु शक्ति क्या दुनिया में शांति फैलाने के लिए है ?
जमीनी हकीकत तो यह है कि परमाणु शक्ति अमेरिका के पास होने से दुनिया को सबसे अधिक खतरा है। क्योंकि अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के नागासाकी और हिरोशिमा शहर पर परमाणु हमला कर चुका है। क्या अमेरिका के अलावा किसी दूसरे देश ने परमाणु बम का इस्तेमाल किया है ? नहीं न। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की निगाह तेल के कुओं पर है। इराक अमेरिका ने जो आरोप लगाए थे वे झूठे साबित हुए। वेनेजुएला को अमेरिका ने जिस तरह से कब्जाया क्या वह दादागिरी नहीं थी ?
मोदी ही नहीं पूरी दुनिया को यह समझ लेना चाहिए कि यदि ईरान पर अमेरिका का कब्ज़ा हुआ तो डोनाल्ड ट्रम्प सभी देशों को घुटने के बल ला देगा। सबसे अधिक दिक्कत भारत के लिए ही होने वाली है। महंगा तेल देने के नाम पर ट्रम्प दुनिया के देशों को ब्लैकमेल करेंगे। इजराइल और अमेरिका पर कोई विश्वास नहीं किया जा सकता। मोदी बताएं कि क्या जम्मू कश्मीर विवाद पर इजराइल ने कभी भारत का साथ दिया है ? क्या ईरान हमेशा भारत के साथ खड़ा नहीं रहा है ? पीएम मोदी जो रूस और ईरान को नाराज कर इजराइल और अमेरिका के साथ गलबहिया कर रहे हैं यह विदेश नीति की खामिया नहीं बल्कि एक दबाव में डरा हुआ निर्णय दिखाई दे रहा है।
पीएम मोदी व्यक्तिगत निर्णयों के चलते देश की सम्प्रभुता से खिलवाड़ कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प लगातार भारत का अपमान कर रहे हैं और मोदी हैं कि चुप हैं। मतलब मोदी कमजोर प्रधानमंत्री साबित हो रहे हैं। चाहे सीजफायर का मामला हो, टैरिफ लगाने का मामला हो, ट्रेड डील में अमेरिकी किसानों के लिए भारत का कृषि बाजार खोलने का मामला हो या फिर ईरान युद्ध का मामला मोदी सरकार का डिसीजन दबाव भरा है। देश और समाज को नुकसान पहुंचाने वाला है।

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