मैं ज़मीन पर तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं  

मुझे नहीं बताया कभी किसी ने
जो मर जाते हैं आसमान में सितारा बनकर चमकते हैं रात को
एक बकरी का बच्चा पाला था
ख़ूबसूरत सुफेद रंग का इधर उधर उछलता कूदता
हम उसके पीछे दौड़ते उसको नहलाते
पत्ते उसके मुंह में डालते उसको गले लगाते

एक रोज़ बकरी का बच्चा गुमसुम हो गया
बहुत देर तक तड़पा एक भी घरेलू उपचार काम नहीं आया
शाम होते होते बकरी का बच्चा मर गया
उसे स्कूल के नज़दीक तालाब के किनारे बबूल की झाड़ियों के क़रीब दफ़न कर दिया

हम जब उसकी क़ब्र के नज़दीक से गुजरते
ऐसा लगता हम ही मनो मिट्टी के नीचे दबे पड़े हैं और मिट्टी हमारे नथूनो में आंखों में मुंह में घुस रही है
सवाल पर सवाल पूछते रहते मौत के रहस्य से जुड़े
यही बताया गया जब कोई जानदार मख़लूक़ मर जाती है उसे गड्ढा खोदकर दबा देते हैं

रात को सोते समय आसमान में सितारे चहकते हुए देखते
तीन सितारों की जोड़ी सात सितारों का समूह
सुबह सादिक में दिखाई देने वाला मोटा सितारा
आसमान को तकते तकते ही सोया करते कभी दिख जाता
टूटता हुआ सितारा
बताया जाता शैतान जब जश्नत में दाख़िल होने की कोशिश करता है उसे आग का अंगारा फेंक कर मारा जाता है
ये टूटता हुआ भागता हुआ सितारा वही है

एक एक करके अपने अज़ीज़ जुदा होते रहे
तसव्वुर हुआ कि जैसे ये चले गए मौत की आगोश में मिट्टी के नीचे
एक रोज़ मौत का फ़रिश्ता आएगा और रूह क़ब्ज़ कर लेगा
मैं भी मिट्टी के नीचे सोऊंगी एक दिन और क़यामत तक बर्ज़ख़ का स्वाद चखूंगी

मैंने कभी सितारे में अपनी मां को नहीं ढूंडा
न फूप्पी को न ख़ाला को न ख़ालू को न अपने बड़े अब्बा को
मेरी अज़ीज़ सहेली मुमताज़ को गला घोंट कर मारा गया
मेरी कितनी ही प्यारी और अज़ीज़ बाजी और दीदी
आग में जलाकर मार दी गई
मेरे सहपाठी फैल होने पर छत से कूद कर मर गये
मेरा एक मित्र योगा करते हुए बैड पोस्चर की वजह से मर गया
मेरी नानी घाव के सड़ जाने से मर गई
खुर्शीद खालू इलेक्शन की रेली में फंसे रहे और अस्पताल पंहचने से पहले मर गए

और कितना ब्यान करूं इस भागती दौड़ती जिंदगी में
वो दिन आ ही जाता है जब किसी की मय्यत में शामिल होना होता है
इमली के बीज को हाथों में लिए जब कलमा पढ़ती हूं
यही ख़्याल आता है एक दिन सबके लिए ये चियें पढ़े जाएंगे
मलकुल मौत किसी पर रहम नहीं खाता
फिरौन नमरूद दक़ियानूस यज़ीद हिटलर सब इस फानी दुनिया से कूच कर गए

मुझे उन्मादी भीड़ में राक्षसी अट्टहास में दिखाई देते हैं इन सब क्रूर तानशाह शासकों के चेहरे

क़ब्र सबके इंतज़ार में बैठी है।

“क़ुल्लू नफसिन ज़ायकतुल मौत!”

“अनाबयी तिद्दू!”

मैं किड़े मकौड़ों का घर हूं।

एक दिन फ़रिश्ता मुझे भी लेने आएगा
और मैं आसमान में सितारे की सूरत में नहीं चमकूंगी
मिट्टी की आगोश में दबी पड़ी रहूंगी
मेरे मर जाने पर मेरे लिए भी कोई पढ़ेगा इमली के बीज पर कलमा
कौन राज़ी होगा मेरी मृत देह को गुस्ल देने के लिए
कोई एक आंख भी मौजूद होगी जो मेरे लिए एक अश्क़ भी गिराएगी ज़मीन पर

मुझे गुरुदत की फिल्म काग़ज़ के फूल हमेशा तसव्वुर में रहती है इस बाबत
कहीं मेरी मृत देह की भी वैसी ही दुर्गति न हो जैसी फिल्म के नायक की हुई
एक भी आंख बाक़ी न थी उसके लिए आंसू बहाने के लिए
एक भी कांधा बचा नहीं था उसे इज्ज़त से रुख़सत करने के लिए

हम दिनों-दिन इसी बेज़ारी पृथक जीवन शैली और अजनबीयत की ओर बढ़ रहे हैं

मैंने जब से होश संभाला है हर उस इंसान को शिद्दत से याद किया है जो मेरी जिंदगी में शामिल था
मैंने उन्हें स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी के फूलों में महसूस किया
मुझे रंग-बिरंगे फूलों में उनके चेहरे दिखाई देते थे
मैं अक्सर बगीचे में अकेली बैठती फूलों के क़रीब जाकर

मैं अपनी मस्जिद में फूलों के क़रीब खेलती थी
वजू के लौटे से गमलों में पानी डालती थी
मुझे अपनी बकरी का बच्चा उन फूलों में नज़र आता था

मैं अपने कॉलेज में फूलों के क़रीब बैठी हूं
मैंने फूलों से वहां रंगोली बनाई हैं मुझे फूलों में अपनी सहेली मुमताज़ का चेहरा दिखाई देता था
मैं दिल्ली विश्वविद्यालय मैं फूलों के क़रीब बैठी हूं
मुझे मेरी अम्मी का पान खता हुआ हंसता चेहरा उन फूलों में दिखता था

मेरे अब्बा का चेहरा फूलों में देखने के लिए मुझे फिर से स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी में दाख़िल होना है

मैं जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में बैठी हूं फूलों के नज़दीक
मुझे उन फूलों में वो शख़्स महसूस होता था जिसका चेहरा मैंने कभी नहीं देखा
मेरी कल्पना में वो मुहम्मद सा युसुफ सा शख़्स हमेशा रहता है जिसे मैं अपनी ज़िंदगी में शामिल करना चाहती थी

जिन चेहरों को मैंने फूलों में महसूस किया है वे झड़ जाते हैं मिट्टी में
और फिर फिर से बसंत में डाल पर खिल जाते हैं
वे सातवक सत्य की तरह आसमान में नहीं चमकते
वे इसी ज़मीन पर मेरे इर्द-गिर्द स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी के बगीचे में
फिर फिर से लौटकर आते हैं !!

मेहजबीं

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