हीट वेव (लू ) की वजह से आम के फलों की गुणवक्ता में भारी कमी : वैज्ञानिक

सुभाष चंद्र कुमार

समस्तीपुर पूसा। प्रोफेसर (डॉ ) एसके सिंह विभागाध्यक्ष,पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी, प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना, डॉ राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, पूसा-848 125, समस्तीपुर, बिहार के अनुसार इस वर्ष हीट वेव (लू ) की वजह से आम के फलों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हैं।

जिससे उनकी वृद्धि, गुणवत्ता और विपणन क्षमता बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।आम की कुछ प्रजातियों मे इस समय प्राकृतिक रूप से आम के फल पककर गिर रहे है । फलों की गुणवक्ता का अध्यन करने से पता चला है की इस वर्ष हीट वेव (लू ) की वजह से फल की क्वालिटी मे भारी कमी देखी जा रही है।

पके फलों को काटने के बाद अंदर गुद्दा का जेली मे परिपर्तित होते देखा जा रहा है । फलों मे मिठास बहुत कम देखा जा रहा है ।
हीट वेव (लू ) को निम्नलिखित प्रमुख पहलुओं के माध्यम से समझा जा सकता है जैसे शारीरिक तनाव, फलों का विकास, कीट और रोग प्रसार, और कटाई के बाद की गुणवत्ता।

आम के फल के स्वरूप पर (शारीरिक)
हीट वेव (लू ) पर असर

जल तनाव।

हीट वेव (लू ) अक्सर कम वर्षा की अवधि के साथ मेल जुड़ जाती हैं, जिससे आम के पेड़ों में जल तनाव उत्पन्न हो जाता है। प्रकाश संश्लेषण, पोषक तत्वों के परिवहन और फलों के विकास सहित विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए पानी महत्वपूर्ण है। जब आम के पेड़ जल-तनावग्रस्त होते हैं……

प्रकाश संश्लेषण दक्षता: कम प्रकाश संश्लेषण से फलों के विकास के लिए ऊर्जा की उपलब्धता कम हो जाती है।

पत्ती झुलसना और गिरना: उच्च तापमान के कारण पत्ती झुलस सकती है और समय से पहले पत्ती गिर जाती है, जिससे पेड़ की स्वस्थ फलों के विकास को बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है।

फलों का कम लगना और विकास: फूल आने और फल लगने की महत्वपूर्ण अवधि के दौरान जल तनाव के कारण फलों का कम लगना और छोटे फल लग सकते हैं।

ताप तनाव।

उच्च तापमान के सीधे संपर्क में आने से फलों के ऊपर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं…..

सनबर्न: सीधे धूप में आने वाले आम के फल सनबर्न (सूर्य के तापमान की वजह से झुलसना) से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे उनका रंग फीका पड़ जाता है, वे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और बेचने लायक नहीं रह जाते है ।

फल गिरना: अत्यधिक गर्मी के कारण समय से पहले फल गिर सकते हैं, जिससे पैदावार में काफी कमी आ सकती है।

फलों का विकास

आकार और आकृति

हीट वेव (उच्च तापमान) उचित फल विकास में बाधा डाल सकता है, जिससे फल छोटे, विकृत बनते हैं। पर्याप्त पानी और पोषक तत्वों की कमी से फल के विकास और विस्तार के लिए जिम्मेदार कोशिकीय प्रक्रियाएँ प्रभावित होती हैं।

गुणवत्ता ।

बनावट और स्वाद: हीट वेव (उच्च तापमान) के कारण फल तेजी से पकने लगते हैं, जिसकी वजह उनकी गुणवत्ता खराब होने लगती है। तेजी से पकने की प्रक्रिया के कारण बनावट और स्वाद खराब हो सकता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए फल का आकर्षण कम हो सकता है।

पोषण सामग्री: आम की पोषण गुणवत्ता, जिसमें उनकी चीनी सामग्री, अम्लता और विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट का स्तर शामिल है, अत्यधिक गर्मी से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकती है।

कीट और रोग प्रसार

हीट वेव (उच्च तापमान) कीटों और बीमारियों के प्रसार को बढ़ा सकती हैं, जिससे आम के पेड़ों और फलों पर तनाव बढ़ सकता है….

कीटों की बढ़ी हुई सक्रियता: उच्च तापमान फल मक्खियों, मीलीबग्स और एफिड्स जैसे कीटों की सक्रियता और प्रजनन दर को बढ़ा सकता है। ये कीट न केवल फलों को सीधे नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि बीमारियों के वाहक के रूप में भी काम करते हैं।
रोग घटना: गर्मी और नमी फंगल रोगों जैसे एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी फफूंदी के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं। ये रोग कटाई से पहले और कटाई के बाद के फलों को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कटाई के बाद की गुणवत्ता
शेल्फ लाइफ।
अपने विकास के दौरान हीट वेव (उच्च तापमान) के अधीन आमों की शेल्फ लाइफ कम होती है। तेजी से पकने की प्रक्रिया और उच्च श्वसन दर के कारण वे जल्दी खराब हो जाते हैं।

कटाई के बाद की बीमारियाँ
गर्मी के तनाव वाले आमों में कटाई के बाद की बीमारियों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। एन्थ्रेक्नोज और स्टेम-एंड रॉट जैसी स्थितियाँ उन फलों में अधिक प्रचलित हैं जो विकास के दौरान उच्च तापमान के संपर्क में रहे हैं।

परिवहन और भंडारण।
उच्च तापमान परिवहन और भंडारण के दौरान आमों को नुकसान पहुँचाने के लिए अधिक संवेदनशील बना सकता है। फलों पर चोट लगने, त्वचा संबंधी विकार विकसित होने और नमी खोने की संभावना अधिक होती है, जिससे वजन कम होता है और गुणवत्ता में गिरावट आती है।

आर्थिक प्रभाव

आम के फलों पर हीट वेव (उच्च तापमान) के संचयी प्रभाव महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान में तब्दील हो जाते हैं…

कम उपज: कम फल सेट, अधिक फल गिरना और छोटे फल आकार सभी समग्र उपज में कमी में योगदान करते हैं।

गुणवत्ता हानि: धूप से झुलसे, कीट-संक्रमित और रोगग्रस्त फल कम बिक्री योग्य होते हैं, जिससे बाजार में कम कीमत मिलती है।
बढ़ी हुई लागत: सिंचाई, कीट और रोग प्रबंधन और नुकसान कम करने के प्रयासों की बढ़ती आवश्यकता के कारण किसानों को अधिक लागत उठानी पड़ सकती है।

अनुकूलन और हीट वेव (उच्च तापमान)
के कुप्रभाव को कैसे करें प्रबंधित

आम के फलों पर हीट वेव (उच्च तापमान) के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए, कई रणनीतियों को नियोजित किया जा सकता है…
सिंचाई प्रबंधन ।

ड्रिप सिंचाई जैसी कुशल सिंचाई तकनीकों को लागू करने से मिट्टी की नमी के इष्टतम स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है, जिससे आम के पेड़ों पर पानी का तनाव कम हो सकता है।

मल्चिंग ।
आम के पेड़ों के आधार के चारों ओर जैविक मल्च का उपयोग करने से मिट्टी की नमी को बनाए रखने, मिट्टी के तापमान को कम करने और खरपतवार के विकास को रोकने में मदद मिलती है।

छाया जाल ।

छाया जाल लगाने से आम के फलों को सीधी धूप से बचाया जा सकता है, जिससे सनबर्न और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने का जोखिम कम हो जाता है।

कीट और रोग प्रबंधन ।

एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) रणनीतियाँ कीटों की आबादी को नियंत्रित करने और बीमारी के प्रकोप को रोकने में मदद कर सकती हैं। नियमित निगरानी, जैविक नियंत्रण एजेंट और कीटनाशकों का उचित उपयोग आईपीएम दृष्टिकोण के प्रभावी घटक हो सकते हैं।

गर्मी प्रतिरोधी किस्मों का प्रजनन ।

गर्मी और सूखे की स्थिति के प्रति अधिक सहनशील आम की किस्मों को विकसित करना और लगाना गर्मी की लहरों के प्रभाव को कम करने का एक दीर्घकालिक समाधान हो सकता है।

समय पर कटाई।

अधिक तापमान के संपर्क में आने के कारण गुणवत्ता में गिरावट से बचने के लिए इष्टतम समय पर फलों की कटाई की जा सकती है। इसमें फलों की परिपक्वता की बारीकी से निगरानी करना और चरम गर्मी की अवधि शुरू होने से पहले कटाई करना शामिल है।

कुल मिलाकर इसके सारांश पर फोकस करें तो हीट वेव (उच्च तापमान) आम के उत्पादन के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती हैं, जिससे फलों की वृद्धि, गुणवत्ता और विपणन क्षमता प्रभावित होती है।

गर्मी की लहरों से जुड़े शारीरिक तनाव, विकास संबंधी चुनौतियों, कीटों और बीमारियों के प्रसार और कटाई के बाद की समस्याओं को समझकर, किसान इन प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूली रणनीतियां लागू कर सकते हैं।

बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तनशीलता के मद्देनजर आम की खेती की स्थिरता और लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए कुशल सिंचाई, मल्चिंग, छाया जाल, कीट और रोग प्रबंधन, गर्मी प्रतिरोधी किस्मों का प्रजनन और समय पर कटाई महत्वपूर्ण कदम हैं।

  • Related Posts

    BJP विधायक विनय बिहारी धरना पर बैठे, बोले- ‘जब तक सम्राट चौधरी…’  

    लौरिया विधानसभा से बीजेपी के विधायक विनय बिहारी…

    Continue reading
    छठ पर बिहार जाने वालों को मिलेगी राहत, दिल्ली सरकार चलाएगी बसें

    छठ पूजा पर अपने घर बिहार जाने की…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    क्या डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने सनातन धर्म की उस अवधारणा को स्वीकार किया था जिसका दावा रूढ़िवादी हिन्दू करते हैं?

    क्या डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने सनातन धर्म की उस अवधारणा को स्वीकार किया था जिसका दावा रूढ़िवादी हिन्दू करते हैं?

    तो हम संसद अटेंड कर लेते

    तो हम संसद अटेंड कर लेते

    इंडिया गठबंधन मार्च : अखिलेश हिरासत में, UP में सपाइयों ने काटा बवाल

    इंडिया गठबंधन मार्च : अखिलेश हिरासत में, UP में सपाइयों ने काटा बवाल

    पंजाब सीएम के OSD के खिलाफ CBI जांच पर सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, कब होगी सुनवाई?

    पंजाब सीएम के OSD के खिलाफ CBI जांच पर सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट, कब होगी सुनवाई?

    महाराष्ट्र में सूखे का संकट, किसानों का कर्जमाफ, सरकार ने बनाई 12 सदस्यीय कमेटी

    महाराष्ट्र में सूखे का संकट, किसानों का कर्जमाफ, सरकार ने बनाई 12 सदस्यीय कमेटी

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते समय जहाज पर हमला, 11 भारतीय घायल, MEA- बंद कीजिए

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते समय जहाज पर हमला, 11 भारतीय घायल, MEA- बंद कीजिए