पूर्वानुमान की अवधि में हिट वेव जैसे स्थिति उत्पन्न होने की संभावना : मौसम वैज्ञानिक

सुभास चन्द्र कुमार

समस्तीपुर पूसा। डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय स्थित जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से जारी 15-19 मई, 2024 तक के मौसम पूर्वानुमानित अवधि में उत्तर बिहार के जिलों में आसमान में हल्के बादल देखे जा सकते हैं। हलॉकि, पूर्वानुमानित अवधि में मौसम के शुष्क रहने की संभावना है।

इस अवधि में अधिकतम तापमान 39-41 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। जबकि न्यूनतम तापमान 26-28 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रह सकता है। मंगलवार के तापमान पर एक नजर डालें तो अधिकतम तापमानः 36.5 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 0.4 डिग्री सेल्सियस कम
एवं न्यूनतम तापमानः 24.2 डिग्री सेल्सियस, सामान्य से 0.7 डिग्री सेल्सियस कम रहा है। तीन दिनों के बाद तापमान में बढ़ोत्तरी के कारण हीट वेव जैसी स्थिति बन सकती है।

सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 60 से 65 प्रतिशत तथा दोपहर में 30 से 35 प्रतिशत रहने की संभावना है।
पूर्वानुमानित अवधि में औसतन 11 से 15 कि0मी0 प्रति घंटा की रफ्तार से पुरवा हवा चलने का अनुमान है।

समसामयिक सुझाव देते हुए मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि पूर्वानुमानित अवधि में मौसम के शुष्क रहने की संभावना है। जिन किसान भाईयों का अभी तक मक्का तथा अरहर की दौनी नही कर पायें हो वैसे

किसान भाई अविलंब दौनी का कार्य संपन्न करके दानों को सुखाकर सुरक्षित स्थानों पर भंडारित करें।

विगत मौसम पूर्वानुमान की अवधि में उत्तर बिहार के जिलों में वर्षा हुई है, जिसके चलते खेतों में प्रयाप्त नमी आ गई है। किसान भाई इसका फायदा उठाते हुए मक्का, ज्वार, बाजरा तथा लोबिया की बुआई करें। हरी खाद के लिए सनई और दैचा की बुआई करें।

जिन किसान भाई का खेत खाली है तथा वे खरीफ धान की नर्सरी समय से लगाना चाहते है वैसे किसान भाई खेत की तैयारी शुरू कर दें। स्वस्थ पौध के लिए र्नसरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का व्यवहार करें। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई हेतु 800-1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बीज गिरावें। नर्सरी में क्यारी की चौड़ाई 1.25-1.5 मीटर तथा लम्बाई सुविधा अनुसार रखें।

बीज की व्यवस्था प्रमाणित स्त्रोत से करें। देर से पकने वाली किस्मों की नर्सरी 25 मई से लगा सकते है। किसान भाई रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतों की गहरी जुताई कर खेत को खुला छोड़ दें ताकि सुर्य की तेज धूप मिट्टी में छिपे कीड़ों के अण्डे, प्युपा एवं घास के बीजों को नष्ट हो जाये। खरीफ धान की नेसरी के लिए खेत की तैयारी करें। स्वस्थ पौध के लिए र्नसरी में सड़ी हुई गोबर की खाद का व्यवहार करे।

खरीफ मक्का की बुआई के लिए खेत की तैयारी करें। खेत की जुताई में 10 से 15 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करे। उत्तर विहार के लिए अनुशंसित मक्का की किस्में जैसे सुआन, देवकी, शक्तिमान 1, शक्तिमान-2, राजेन्द्र संकर मक्का-3, गंगा-11 है। खरीफ मक्का की बुआई 25 मई से करें।

अदरक की बुआई शुरू करें। अदरक की मरान एवं नदिया किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है। खेत की जुताई में 25 से 30 टन गोबर की सड़ी खाद, नेत्रजन 30 से 40 किलोग्राम, स्फूर 50 किलोग्राम, पोटास 80 से 100 किलोग्राम जिंक सल्फेट 20 से 25 किलोग्राम एवं बोरेक्स 10 से 12
किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करे। अदरक के लिए बीज दर 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें। बीज प्रकन्द का आकार 20-30 ग्राम जिसमें 3 से 4 स्वस्थ कलियाँ हो। रोपाई की दूरी 30X20 से०मी० रखे।

अच्छे उपज के लिए रीडोमिल दवा के 0.2 प्रतिशत घोल से उपचारित बीज की बुआई करें। भिंडी की फसल में फल एवं प्ररोह वेधक कीट की निगरानी करें। इसके पिल्लू भिंडी फलों के अन्दर छेद बनाकर उसके अन्दर घुसकर फलों को खाते हैं तथा इसे पुरी तरह नष्ट कर देते हैं। इसकी रोकथाम के लिए सर्वप्रथम प्रभावित फलों को तोड़कर मिट्टी के अन्दर दबा दें। अधिक नुकसान होने पर डाईमेथोएट 30 ई0सी0 दवा का 1.5 मि०ली० प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

उरद और मूंग की फसल में पीला मोजैक वायरस से ग्रस्त पौधों को उखार कर नष्ट कर दें। यह रोग सफेद मक्खी द्वारा फैलता है। इसके शुरूवाती लक्षण पत्तियों पर पीले धब्बे के रूप दिखाई देता है, बाद में पत्तियों तथा फलियों पूर्ण रूप से पीली हो जाती है। इन पत्तियों पर उत्तक क्षय भी देखा जाता है। फलन काफी प्रभावित होता है।

लत्तर वाली सब्जियों जैसे नेनुआ, करेला, लौकी (कद्दू), और खीरा फसलों में फल मक्खी कीट की निगरानी करें। इन फसलों को क्षति पहुंचाने वाला यह प्रमुख कीट है। यह घरेलू मक्खी की तरह दिखाई देने वाली भूरे रंग की होती है। मादा कीट मुलायम फलों की त्वचा के अन्दर अंडे देती है। अंडे से पिल्लू निकलकर अन्दर ही अन्दर फलों के भीतरी भाग को खाता है। जिसके कारण पूरा फल सड़ कर नष्ट हो जाता है।

इस कीट का प्रकोप शुरू होते ही 1 किलोग्गाम छोआ, 2 लीटर मैलाथियान 50 ई०सी० को 1000 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से 15 दिनों के अन्तराल पर दो बार छिड़काव करें।

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