पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने इस्लामाबाद में आयोजित IWT इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में भारत पर तीखा हमला बोला। हिना रब्बानी खार ने कहा कि भारत का रवैया लगातार आक्रामक होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सिंधु जल संधि को लेकर ऐसा रुख अपना रहा है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। हिना रब्बानी खार ने कहा कि सिंधु जल संधि एक मजबूत और लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था है, जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच कई मुश्किल दौर में भी अपनी अहमियत बनाए रखी है. उनके मुताबिक, यह संधि दो युद्धों के बाद भी कायम रही और दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बनी रही।
हिना रब्बानी खार का दावा
हिना रब्बानी खार ने दावा किया कि अगर भारत इस संधि को रोकने या कमजोर करने की कोशिश करता है, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम अंतरराष्ट्रीय नियमों और समझौतों की भावना के खिलाफ माना जाएगा। उन्होंने भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए। उनके अनुसार, सिंधु जल संधि जैसे महत्वपूर्ण समझौते को लेकर अस्थिरता पैदा करना क्षेत्रीय शांति के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
सिंधु जल संधि कब हुआ था?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ एक अहम समझौता है. इस संधि के तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को लेकर नियम तय किए गए थे. यह समझौता दोनों देशों के संबंधों में हमेशा एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है. हिना रब्बानी खार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कई मुद्दों को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है. उनके बयान के बाद एक बार फिर दोनों देशों के रिश्तों और सिंधु जल संधि पर चर्चा तेज हो गई है।







