ईरान और इज़रायल के बीच 13-15 जून 2025 को हुए 72 घंटे के भीषण संघर्ष में भारी तबाही की खबरें हैं। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, इज़रायल के ऑपरेशन “राइजिंग लॉयन” के तहत ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए, जिसमें 406 ईरानी नागरिकों की मौत और 654 से अधिक लोग घायल हुए। मरने वालों में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक शामिल हैं, जैसे ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल मोहम्मद बाघेरी, रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर हुसैन सलामी, और परमाणु वैज्ञानिक फरदून अब्बासी। इज़रायल ने ईरान की राजधानी तेहरान, इस्फहान, और फोर्डो जैसे इलाकों में परमाणु केंद्रों, मिसाइल बेस, और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया।
जवाब में, ईरान ने ऑपरेशन “ट्रू प्रॉमिस-3” के तहत इज़रायल पर 100-200 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से कुछ तेल अवीव, हाइफा, और रेहोवोट जैसे शहरों में गिरीं। इन हमलों में 16 इज़रायली नागरिकों की मौत और 100 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इज़रायल की मजबूत हवाई रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को नष्ट किया, लेकिन कुछ हमलों से भारी नुकसान हुआ, विशेष रूप से तेल अवीव में। इस संघर्ष ने मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ईरान ने अमेरिका और ब्रिटेन को धमकी दी है कि उनकी सहायता इज़रायल को रोकने की कोशिश की तो उनके जहाजों पर हमला हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र, रूस, और चीन ने इज़रायल के हमलों की निंदा की है, जबकि अमेरिका ने इज़रायल का समर्थन किया है। भारत ने शांति और कूटनीति की अपील की है और शंघाई सहयोग संगठन के निंदात्मक बयान से खुद को अलग कर लिया है।
तेल की कीमतों में 6% से अधिक की वृद्धि हुई है, और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ रहा है। दोनों देशों में हमले जारी हैं, और स्थिति गंभीर बनी हुई है।






