चरण सिंह
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में पानी में डूबकर हुई युवराज का मौत का मामला न केवल नोएडा उत्तर प्रदेश बल्कि देश के लिए भी शर्मनाक है। जितना निकम्मापन जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का है उससे कम विपक्ष के दलों और जनता का नहीं है। नोएडा में कितना भ्रष्टाचार होता रहे। जिला प्रशासन कितना भी निकम्मापन दिखाता रहे किसी को कोई मतलब नहीं।
जनप्रतिनिधियों को इसलिए मतलब नहीं क्योंकि उनको पता है वे कुछ करे न करें नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बीजेपी की इतना बंधुआ वोटबैंक है जिससे उनकी जीत आसानी से हो सकती है। प्राधिकरण के साथ ही जिला प्रशासन में बैठे दूसरे अधिकारियों इसलिए कोई मतलब नहीं हैं क्योंकि उनके आका सरकार में बैठे हैं।
विपक्ष के दलों को अब विरोध करने से इसलिए कोई मतलब नहीं क्योंकि अब ये लोग आरामतलबी हो गए हैं। इनको जेल जाने से डर लगता है। जो उन्होंने कमा रखा उसके जाने से डर लगता है। नोएडा के लोग हैं कि वे अपने में ही मस्त हैं। उनको किसी समस्या से इसलिए कोई मतलब नहीं। क्योंकि उनको लगता है वे तो अपने आप में सक्षम हैं। जरा सोचो युवराज के पिता राजकुमार एसबीआई में निदेशक रहे हैं। मतलब हर मामले में मजबूत हैं। वे अपने बेटे को इसलिए नहीं बचा पाएं क्योंकि सिस्टम निकम्मा हो चुका है।
शासन और प्रशासन में बैठे लोग बताएं कि दमकल विभाग, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का क्या काम है ? उनके पास जो संसाधन होते हैं क्या वे युवराज को बचाने में पर्याप्त नहीं थे ? यदि संसाधन पर्याप्त नहीं थे तो सरकार से मांगे क्यों नहीं गए ? और यदि संसाधन पर्याप्त थे तो फिर युवराज को क्यों नहीं बचाया गया ? घटनास्थल पर उपस्थित 80 लोगों में से एक की भी हिम्मत पानी में उतने की नहीं हुई ? आखिरकार इनकी ड्यूटी क्या है ?
ये लोग बताएंगे कि आखिर वह डिलीवरी ब्वॉय मनिंदर कैसे पानी में उतर गया ? इसलिए क्योंकि वह गरीब है। उसके अंदर संवेदनाएं हैं। समझ जाइये संवेदनाएं किन लोगों में बची हैं। जानकारी मिली है कि इस डिलीवरी ब्वॉय ने पहले भी इस पानी में उतरा था और एक ट्रक ड्राइवर को बचाया था। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या इस ट्रक के गिरने की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं हुई थी ?
यदि ये 80 लोग किसी काम के नहीं हैं तो फिर इनकी जरूरत क्या है ? यदि डिलीवरी ब्वॉय बिना किसे वेतन और लालच के एनडीआरएफ का काम कर सकता है तो फिर मनिंदर सिंह को एनडीआरएफ में नौकरी क्यों न मिले ? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वास्तव में इस मामले में कुछ करना चाहते हैं तो सबसे पहले इस डिलीवरी ब्वॉय को सुरक्षा दें और इसकी एनडीआरएफ में नौकरी दें।








