प्याज किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार ने 13% बढ़ाया खरीद मूल्य 

सरकार ने प्याज खरीद मूल्य बढ़ाया

 

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक के लिए प्याज की सरकारी खरीद की रफ्तार बढ़ाने और किसानों को बेहतर दाम देने के लिए बड़ा फैसला किया है। सरकार ने प्याज का खरीद मूल्य 13% बढ़ाकर 2125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। इससे पहले यह दाम 1875 रुपये प्रति क्विंटल था। चालू सीजन में सरकार द्वारा खरीद कीमतों में की गई यह पांचवीं बढ़ोतरी है। यह संशोधित कीमत 4 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो गई है।
 

बार-बार दाम बढ़ाने पर भी सुस्त रही खरीद

 

मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत प्याज की सरकारी खरीद की रफ्तार बेहद सुस्त रही है, जिसे तेज करने के लिए सरकार को बार-बार दाम बदलने पड़े हैं। 1 जून से शुरू हुई खरीद प्रक्रिया के बाद से सरकार साल 2026 के बफर स्टॉक के लिए अब तक केवल 2000 टन प्याज ही खरीद सकी है।

सीजन की शुरुआत: 12.70 रुपये प्रति किलो

22 मई: 15.80 रुपये प्रति किलो
13 जून: 16.50 रुपये प्रति किलो
20 जून: 17.30 रुपये प्रति किलो
इसके बाद: 18.75 रुपये प्रति किलो

4 जुलाई से (नया दाम): 21.25 रुपये प्रति किलो (2125 रुपये प्रति क्विंटल)

 

 

बाजार में प्याज की स्थिति

 

 

धीमी सरकारी खरीद के बावजूद उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का कहना है कि देश में प्याज की उपलब्धता को लेकर कोई संकट नहीं है। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, साल 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल (307.67 लाख टन) के लगभग बराबर ही है।

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख राज्यों में प्याज का पर्याप्त स्टॉक है। देश की थोक मंडियों में रोजाना 50,000 टन से ज्यादा प्याज आ रहा है। महाराष्ट्र की मंडियों में औसत थोक भाव 18 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रहा है।

वर्तमान में पूरे भारत में प्याज की औसत खुदरा कीमत 31 रुपये प्रति किलो है। मंत्रालय के मुताबिक अच्छी क्वालिटी का प्याज अभी स्टोरेज में रखा है, जो आने वाले कम सप्लाई वाले महीनों में बाजार में उतारा जाएगा।

 

 

मानसून की देरी और सट्टेबाजी का असर

 

 

अधिकारियों के अनुसार देश के कुछ हिस्सों में मानसून की देरी और सामान्य से कम बारिश के चलते कुछ व्यापारियों ने भारी मात्रा में प्याज खरीदकर जमा करना (सट्टेबाजी) शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में सट्टेबाजी की यह गतिविधि वास्तविक मांग के बजाय भविष्य में कीमतें बढ़ने की आशंका के कारण देखी जा रही है। नासिक क्षेत्र में खरीफ प्याज की बुवाई में लगभग 15 दिनों की देरी हुई है, जबकि कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लकेरे बेल्ट में बुवाई सामान्य के मुकाबले केवल 60% ही हो पाई है।

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