बिहार के मुजफ्फरपुर में एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2001 के चर्चित गोलू अपहरण और हत्या कांड का जिक्र किया। उन्होंने इस घटना को महागठबंधन (खासकर लालू प्रसाद यादव की RJD और कांग्रेस) पर तीखा हमला बोलने के लिए इस्तेमाल किया। मोदी ने कहा कि उस समय बिहार में लालू यादव की सरकार थी, जब शहर “जल रहा था” और स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि हेलिकॉप्टर से नए एसपी को भेजना पड़ा था। यह बयान बिहार विधानसभा चुनावों के संदर्भ में आया, जहां मोदी ने विपक्ष पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया।
गोलू अपहरण कांड की पूरी कहानी (2001)
घटना का विवरण: 2001 में मुजफ्फरपुर जिले के एक अमीर व्यापारी के 10 साल के बेटे गोलू का अपहरण कर लिया गया। अपहरणकर्ताओं ने फिरौती मांगी, लेकिन बाद में गोलू की हत्या कर दी गई। उसका शव शहर के पास मिला।
शहर में आग और हिंसा: शव मिलने के बाद पूरा मुजफ्फरपुर गुस्से से भरा था। लोग सड़कों पर उतर आए, शहर बंद हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थानों (नगर थाना, नाका थाना) और पिकेट्स पर हमला किया, उन्हें आग लगा दी। पुलिसकर्मी खाकी पहनकर घूमने से डरते थे। स्थिति दो दिनों तक तनावपूर्ण रही।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई:
पुलिस ने लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की, जिसमें कई लोग घायल हुए।
तत्कालीन सरकार (लालू यादव के नेतृत्व में) ने पटना से IPS रविंद्र कुमार सिंह को हेलिकॉप्टर से मुजफ्फरपुर भेजा। पुराने एसपी नय्यर हसनैन खान को वापस बुला लिया गया।
आरोपी: कुल 32 नामजद और सैकड़ों अज्ञात आरोपी थे। कई आरोपी पहले गिरफ्तार हुए, लेकिन कुछ फरार रहे। 2024 में केस दोबारा खुला, जिसमें 10 आरोपी जमानत पर हैं। कुछ आरोपी अब राजनीतिक दलों में बड़े पदों पर हैं, जो राजनीतिक विवाद पैदा कर रहा है।
राजनीतिक संदर्भ
मोदी का यह बयान बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष पर चोट करने का प्रयास था। उन्होंने इसे “महागठबंधन के राज” से जोड़ा, जहां अपराध चरम पर था। यह कांड बिहार के इतिहास में “जंगलराज” का प्रतीक माना जाता है, जब अपहरण और हिंसा आम थे। RJD ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह बयान चुनावी बहस को गर्मा सकता है।
यह घटना 23 साल पुरानी है, लेकिन मोदी ने इसे वर्तमान चुनावी माहौल से जोड़कर याद दिलाया। अगर आपको इस कांड की और डिटेल्स या वीडियो चाहिए, तो बताएं!15 web pages






