अनंत सिंह की गिरफ्तारी और मोकामा का सियासी तूफान

बिहार की मोकामा विधानसभा सीट पर 2025 विधानसभा चुनावों के बीच अनंत सिंह (जेडीयू प्रत्याशी) को दुलारचंद यादव हत्याकांड के मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार कर लिया गया। यह हत्या 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी, और अनंत सिंह समेत उनके कई समर्थकों को पकड़ा गया। कोर्ट ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जिससे उनका चुनाव प्रचार ठप हो गया। अनंत सिंह पहले भी 2020 में जेल से ही चुनाव जी चुके हैं, लेकिन इस बार मामला गंभीर है—हत्या का आरोप लग रहा है, और विपक्ष (आरजेडी) इसे साजिश बता रही है।

 

ललन सिंह का ‘अनंतमय’ मोड: भावनात्मक अपील और प्रचार की कमान

अनंत सिंह के जेल पहुंचते ही केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (जेडीयू सांसद, मुंगेर) ने मोकामा में कैंप जमा लिया। वे क्षेत्र के गांव-गांव घूमकर अनंत के लिए वोट मांग रहे हैं। उनका सबसे चर्चित बयान—”हर एक शख्स अनंत सिंह है… अनंतमय कर दीजिए पूरे मोकामा को”—एक इमोशनल कार्ड है। इसका मतलब है कि हर व्यक्ति खुद को अनंत सिंह समझे, उनके जुनून से भर जाए, और पूरे इलाके को अनंत सिंह के प्रभाव में डुबो दे। ललन ने कहा, “अनंत बाबू ने कानून का सम्मान किया, लेकिन उनकी गिरफ्तारी साजिश है। अब हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई है—मैंने मोकामा की कमान संभाल ली है।” वे अनंत के बेटों को साथ लेकर प्रचार कर रहे हैं, ताकि समर्थकों में सहानुभूति और जोश पैदा हो।

 

पुराना कर्ज चुकाना या दर्द की मार?

 

यह सवाल बिल्कुल सटीक है—ललन सिंह का यह ‘अनंतमय’ होना न पुराना कर्ज चुकाने जैसा लगता है, तो राजनीतिक दर्द की मार। पुराना कर्ज का एंगल: 2024 लोकसभा चुनाव में ललन सिंह मुंगेर से लड़ रहे थे। अनंत सिंह (तब आरजेडी में) जेल से पैरोल पर बाहर आए और ललन के लिए जोरदार प्रचार किया, जिससे ललन को फायदा हुआ। अनंत की वजह से ललन की जीत मजबूत हुई। अब 2025 में अनंत की मुश्किल में ललन कर्ज चुका रहे हैं—अनंत को जेडीयू में लाकर टिकट दिया, और अब जेल से प्रचार संभाल लिया। यह पारस्परिक समर्थन की राजनीति है। दर्द का पहलू: ललन के लिए यह दर्द भी है, क्योंकि अनंत की गिरफ्तारी से जेडीयू की साख दांव पर है। मोकामा भूमिहारों का गढ़ है, और ललन, अनंत व सूरजभान सिंह (आरजेडी प्रत्याशी वीणा देवी के पति) तीनों इसी जाति से हैं। 2014 में वीणा देवी ने ललन को मुंगेर से हराया था। अगर अनंत हार गए, तो सूरजभान का वर्चस्व बढ़ेगा, जो ललन के मुंगेर किले को खतरा बनेगा। अनंत ने हत्याकांड में सूरजभान पर मदद का आरोप लगाया था, जिसे ललन भी दोहरा रहे हैं। यह अगड़ा (भूमिहार) बनाम पिछड़ा (ओबीसी) की लड़ाई बन चुकी है—अनंत की जीत से ललन अपना ‘दर्द’ कम करेंगे और जातिगत नेतृत्व मजबूत करेंगे।

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