“हमारे बच्चों को न्याय दो”: डीपीएस द्वारका की मनमानी, कोर्ट और शिक्षा विभाग के आदेशों की अनदेखी के खिलाफ अभिभावकों का प्रदर्शन

सभी अभिभावकों ने एक स्वर में मांग की: “डीपीएस द्वारका स्कूल का दिल्ली सरकार अधिग्रहण करो और बच्चों का उत्पीड़न बंद करो!”

नई दिल्ली । लगभग 200 चिंतित और आहत अभिभावक आज जंतर मंतर पर एकत्र हुए ताकि डीपीएस (DPS) द्वारका की हैरान कर देने वाली मनमानी और गैरकानूनी कार्यवाहियों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद कर सकें। यह स्कूल दिल्ली उच्च न्यायालय और शिक्षा निदेशालय (DoE) के स्पष्ट आदेशों की खुलेआम अवहेलना करते हुए बच्चों के नाम स्कूल से हटा रहा है। इस विरोध में दिल्ली के 20 से अधिक स्कूलों के अभिभावक समूह भी एकजुटता दिखाने पहुंचे।

स्पष्ट निर्देशों के बावजूद — जैसे कि 22.05.2024 को जारी शिक्षा निदेशालय (DoE) का आदेश और 16.05.2025 का दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्देश जिसमें अतिरिक्त शुल्क की वापसी और 31 बच्चों की पुनः नामांकन की बात कही गई थी — डीपीएस (DPS) द्वारका ने अब तक पालन नहीं किया है और न ही कोई गंभीरता दिखाई है। इन बच्चों के नाम आज भी हटा दिए गए हैं — यह अमानवीय और अवैध कार्यवाही बच्चों को मानसिक और शैक्षणिक रूप से गहरी चोट पहुँचा रही है।

“हमारे बच्चों को सिस्टम की विफलता की सज़ा दी जा रही है। क्या यही न्याय है? क्या भारत अपने भविष्य के साथ ऐसा व्यवहार करता है?” — एक अभिभावक ने प्रदर्शन के दौरान कहा।

उत्पीड़न और उपेक्षा का एक सिलसिला

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने न केवल बच्चों के नाम स्कूल से हटाए, बल्कि उन्हें गंभीर उत्पीड़न का भी शिकार बनाया — उन्हें लाइब्रेरी में बंद किया गया, शौचालय जाने से रोका गया, अन्य छात्रों से अलग-थलग किया गया और स्टाफ की निगरानी में रखा गया। ये सब अमानवीय व्यवहार हैं और बाल अधिकारों का घोर उल्लंघन करते हैं।

इस मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ अभिभावकों ने बताया कि स्कूल ने बच्चों को स्कूल में प्रवेश से रोकने के लिए बाउंसर तक तैनात किए और कई मामलों में बच्चों के साथ बदसलूकी भी की गई। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि स्कूल प्रबंधन और सुरक्षा कर्मियों पर नाबालिगों के उत्पीड़न के लिए तत्काल आपराधिक कार्यवाही होनी चाहिए।

अदालत में, डीपीएस सोसाइटी (DPS Society) के वकील ने यह तर्क दिया कि इसके सदस्य “प्रतिष्ठित व्यक्ति” हैं। लेकिन यह बड़ी सहजता से भूल गए कि जैसे एक डाकू वाल्मीकि बन सकता है, वैसे ही पद और पैसा किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति की नैतिकता को डगमगा सकता है।

सबसे शर्मनाक बात यह है कि इन स्वयंभू प्रतिष्ठित लोगों में से किसी ने भी अब तक बच्चों पर हो रहे इस अमानवीय अत्याचार की निंदा नहीं की या उसे रोकने का प्रयास नहीं किया। उनकी चुप्पी बहुत कुछ कहती है।

ऑडिटिंग में भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी तय हो

प्रदर्शनकारियों ने ऑडिट प्रणाली पर भी सवाल उठाए। शिक्षा विभाग की स्पष्ट रिपोर्ट में अधिशेष राशि पाई गई थी, इसके बावजूद स्कूल ने इस ऑडिट को अदालत में चुनौती दी है। अभिभावकों की मांग है कि सरकार उन चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) के लाइसेंस रद्द करे जो वित्तीय अनियमितताओं को छुपाने में स्कूल का साथ दे रहे हैं। यह सिर्फ एक स्कूल की बात नहीं है — यह पूरे देश की शिक्षा और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है।

प्रदर्शन द्वारा अभिभावकों प्रमुख मांगें

1. बिना किसी शर्त या विलंब के सभी 31 बच्चों का तत्काल पुनः नामांकन।

2. DPS द्वारका द्वारा कोर्ट और DoE के आदेशों का सख्ती से अनुपालन।

3. स्कूल प्रबंधन और बाउंसरों पर बाल उत्पीड़न के तहत आपराधिक कार्यवाही।

4. शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा शुल्क वृद्धि प्रस्ताव की समयबद्ध समीक्षा या जिम्मेदार अधिकारियों का निलंबन।

5. ऑडिट प्रणाली में सुधार और अवैध वित्तीय प्रथाओं को सहयोग देने वाले चार्टेड अकाउंटेट (CAs) के लाइसेंस रद्द किए जाएं।

“यह केवल फीस की लड़ाई नहीं है — यह हर बच्चे के सम्मान, शिक्षा और सुरक्षा के अधिकार की लड़ाई है।” — महेश मिश्रा, राष्ट्रीय महासचिव, राष्ट्रीय युवा चेतना मंच एवं डीपीएस (DPS) द्वारका के अभिभावक।

प्रशासन एवं दिल्ली सरकार की विफलता — और कीमत चुका रहे हैं बच्चे एवं अभिभावक

यह विरोध डीपीएस (DPS) द्वारका और दिल्ली सरकार (Delhi Govt.) के शिक्षा निदेशालय (DoE) के बीच 2020–21 सत्र से चल रहे टकराव का एक और अध्याय है। बीते वर्षों में स्कूल ने उन अभिभावकों को टारगेट किया जो सवाल उठाते थे। 2025–26 सत्र में हालात और भी बदतर हो गए — बच्चों के नाम हटाए गए, भावनात्मक प्रताड़ना दी गई और मूलभूत अधिकार छीन लिए गए।

दिल्ली सरकार, भारत सरकार, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति और समाज से अपील

अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट, शिक्षा निदेशालय, दिल्ली सरकार, भारत सरकार और राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे तत्काल और कड़े कदम उठाएं ताकि कोई भी स्कूल कानून से ऊपर न बन सके।

“ये आखिरी बार होना चाहिए जब किसी बच्चे को शिक्षा का अधिकार मांगने पर अपमानित किया गया हो। यही एक सुरक्षित और न्यायसंगत शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत होनी चाहिए।” — एक अभिभावक ने कहा।

दिल्ली भर से समर्थन: न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष

दिल्ली के लगभग 20 प्रतिष्ठित स्कूलों के अभिभावकों ने एकजुट होकर डीपीएस (DPS) द्वारका के बच्चों और उनके परिवारों का समर्थन किया और स्कूल प्रबंधन की अमानवीय और अवैध हरकतों की तीव्र निंदा की। उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ परिवारों का मामला नहीं बल्कि दिल्ली के घर घर का मुद्दा है।

सहयोग देने वाले स्कूलों में शामिल थे —
क्वीन मैरी स्कूल (मॉडल टाउन), एपीजे स्कूल (साकेत और शेख सराय), डीएवी (शालीमार बाग और अशोक विहार), डीपीएस रोहिणी, बिरला विद्या निकेतन (पुष्प विहार), इंद्रप्रस्थ वर्ल्ड स्कूल (पश्चिम विहार), पूर्णा प्रज्ञा स्कूल (वसंत विहार), सृजन स्कूल (मॉडल टाउन), इंद्रप्रस्थ इंटरनेशनल स्कूल (द्वारका), मीरा मॉडल स्कूल (जनकपुरी), चिन्मया विद्यालय (वसंत विहार), वीजीएस (रोहिणी) और अन्य।

इनमें से कई स्कूल खुद भी अवैध फीस वृद्धि के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन डीपीएस द्वारका द्वारा बच्चों के नाम काटना और बाउंसर जैसे अनैतिक साधनों का इस्तेमाल करना — यह अत्यंत निंदनीय, क्रूर और कानूनविरोधी है।

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