मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पी. विजयन समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया. ममता बनर्जी को साउथ एवेन्यू में टीएमसी नेता डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ हिरासत में लिया गया. इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान सीपीएम के कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी हिरासत में ले लिया गया. सीपीएम नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की. हिरासत में लिए जाने के बाद पी. विजयन ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा कर एनडीए सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी को ओपन जेल में तब्दील करने का आरोप लगाया. उन्होंने पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के जरिए लोकतंत्र को कुचलने का भी आरोप लगाया.
कई नेता हिरासत में
विजयन ने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन उन कदमों के खिलाफ था, जिनके जरिए लोगों के मतदान के अधिकार को कमजोर किया गया है. उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का आधार है. मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली में पार्टी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद माकपा ने शनिवार को केरलम के विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया.
केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, पार्टी महासचिव एम. ए. बेबी और राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन समेत माकपा केंद्रीय समिति के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने केरल हाउस के पास उस समय हिरासत में ले लिया, जब वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए बाहर आए थे.
दिल्ली से केरलम तक प्रदर्शन
पुलिस के मुताबिक, कोझिकोड में बेपोर के विधायक पी. ए. मोहम्मद रियास के नेतृत्व में माकपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन मार्च निकाला और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए. सभा को संबोधित करते हुए रियास ने कहा कि दिल्ली में पार्टी नेताओं को हिरासत में लिया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों और विरोध प्रदर्शन के अधिकार के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होगा. कन्नूर में माकपा के जिला सचिव के. के. रागेश ने प्रदर्शन मार्च का नेतृत्व किया, जबकि पार्टी की जिला समितियों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन आयोजित किए.
अधिकारियों के मुताबिक, पलक्कड़ में डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई. इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया. अधिकारियों ने कहा कि राज्यभर में आगे भी प्रदर्शन मार्च निकाले जाने की आशंका को देखते हुए पुलिस सतर्क है.
भारत में अब लोकतंत्र खत्म: प्रियंका गांधी
दूसरी ओर, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शनिवार को आरोप लगाया कि भारत में अब लोकतंत्र नहीं रहा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में तानाशाही चलाई जा रही है.
प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने और उसे नष्ट करने में सहयोग करने वाले लोग देश के खिलाफ देशद्रोह कर रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि पहले 254 सांसदों के साथ मारपीट की गई और उन्हें पूरी तरह अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया. इससे उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ.
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी की घेराबंदी कर दी गई. उन्होंने कहा कि दिल्ली को चारों ओर बैरिकेडिंग लगाकर सील कर दिया गया, ट्रेनों और मेट्रो सेवाओं को रोका गया, इंटरनेट बंद कर दिया गया और जगह-जगह जांच चौकियां बना दी गईं.





