सीएम पद से हटाना तो दूर की बात योगी पीएम पद के दावेदार!

चरण सिंह

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों विधायकों की लामबंदी के बाद योगी आदित्यनाथ के बारे में तरह की बातें हो रही हैं। टीवी चैनल उनके हटने की ख़बरें चला रहे हैं। योगी के विरोधी नेता खुश नज़र आ रहे हैं। भले ही उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इन विधायकों को हिदायत दी हो पर राजनीतिक गलियारों में एक संदेश दे दिया गया है। इसमें दो राय नहीं कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ फिर से ब्राह्मण नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का इन विधायकों का बचाव करना मामले पर मुहर लगा रहा है।
दरअसल असली खेल पीएम पद के दावेदार को लेकर है। नरेंद्र मोदी के बाद गृह मंत्री अमित शाह पीएम बनना चाहते हैं। यही वजह है कि यूपी में अपने समर्थक नेताओं से योगी आदित्यनाथ की घेराबंदी करा रहे हैं। क्योंकि बीजेपी की अधिकतर ताकत अमित शाह के हाथ में है, इसलिए अपने को भावी प्रधानमंत्री मानकर चल रहे हैं। अमित शाह जानते हैं कि देश में एकमात्र नेता योगी आदित्यनाथ ही हैं जो उनके प्रधानमंत्री पद का रोड़ा हैं। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ का टकराव समय समय पर देखा जाता रहा है। लोकसभा चुनाव में जब टिकट बंटवारे में अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ को तवज्जो नहीं दी तो योगी आदित्यनाथ नाराज हो गए।
यही वजह रही कि राजकोट के सांसद पुरुषोत्तम रुपाला ने जब राजपूतों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ राजपूतों की पंचायतें होने लगी। जब अमित शाह ने पंचायतों का वजूद को नकार दिया तो मामले ने और तूल पकड़ लिया। यह उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की नाराजगी ही थी कि पश्चिमी उत्तर पदेश में सहारनपुर, कैराना और मुजफ्फरगर सीटें बीजेपी ने गंवा दी। यूपी में बीजेपी की सीटें 36 रह गई। चुनाव की समीक्षा में योगी आदित्यनाथ को घेरा गया। दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ ही तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के साथ ही अपना दल की मुखिया अनुप्रिया पटेल और ओम प्रकाश राजभर ने भी जमकर योगी का विरोध किया पर योगी आदित्यनाथ की घेराबंदी न की जा सकी। योगी ने टिकट बंटवारे में अपनी उपेक्षा की बात सामने कर दी। उन्होंने कहा कि 32 टिकट उनकी बिना सहमति के दिए गए। अधिकतर सीटें बीजेपी उन क्षेत्र में ही हारी थी। योगी की बात मानी गई। उन्हें अपने को  साबित करने के लिए 10 सीटों पर हुए  विधानसभा उपचुनाव की जिम्मेदारी दी गई। योगी ने 10 में से 9 सीटें जीतकर अपने को साबित कर दिया।
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी योगी की घेराबंदी की गई थी पर कुछ न बिगड़ सका था। अब जब 2027 में विधानसभा चुनाव है तो फिर से योगी की घेराबंदी की जा रही है। पंकज चौधरी भी प्रदेश अध्यक्ष योगी के खिलाफ हो रही घेराबंदी को मजबूती देने के लिए बनाया गया है। दरअसल अमित शाह चाहते हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले योगी की छवि धूमिल कर दी जाए पर जमीनी हकीकत तो यह कि आज की तारीख में योगी हिंदुत्व का ब्रांड हैं। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से ज्यादा लोकप्रियता योगी की है। योगी देश के एकमात्र मुख्यमंत्री हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बोलते हैं। उन्हें यूपी के साथ ही दूसरे प्रदेशों में पसंद किया जाता है। यही वजह है कि योगी को घेरने का मतलब बीजेपी में बगावत। आज की तारीख में योगी को घेरना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव है। बीजेपी के समर्थक और हिन्दू मोदी के बाद योगी को पीएम पद के रूप में देख रहा है। मतलब मोदी के बाद अमित शाह नहीं बल्कि योगी पीएम बनना देखना चाहते हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि बीजेपी में मोदी के बाद योगी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार बनने की संभावना ज्यादा है।

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